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कोरोनासंगे खाद्य संकटके ‘महामारी’

पहुरा | ७ श्रावण २०७७, बुधबार
कोरोनासंगे खाद्य संकटके ‘महामारी’

उन्नती चौधरी
धनगढी, ७ सावन ।
कैलालीके कैलारी गाउँपालिका–६ के बुढीकला परियार (५०) के दुई छावा–पटुहिया, ७ नटियानटिनीया सहित १३ जनहनके परिवार बा । भारतमे काम करुइया दुई छावा मासिक रूपमे रु. ५/६ हजार पठाइट । ओत्र रकमसे घर खर्च नाइ चलल् पाछे उहाँहुक्रे गोसियासंगे गत बरसके माघ मसान्तमे मजदूरी करे दिल्ली गैली ।

मने, भारत पुगके काम करे लागल दुसरा महीनामे बन्दाबन्दीमे होडेहल । कोरोनाभाइरस महामारी ओ बन्दाबन्दीसे रोजगारी खोसलपाछे उहाँहुक्रे सक्कु जाने घर आइल बाटै । विपद्के घडीमे परिवारके सदस्य साथ रहलमे आडभरोसा टे मिलल् बा, मने खैना मुह बह्रला पाछे आब कैसिक गुजारा चलैना कना समस्या आइल बा ।

बुढीकला कहली, ‘आपन कुछ करी कलेसे जग्गा जमीन नाइहो, यी वेला हत्तपत्त काम नाइ मिलठ् ओ मजदूरी पैलेसे फेन समयमे पैसा नाइ मिलठ् । घर चलैना कर्रा होसेकल ।’

कैलारी गाउँपालिका–६ के प्रदेशी चौधरी (३२) १० बरस यहोर भारतमे मजदूरी करटी आइल रहिट । बरसमे दुईचो भारत जैना उहाँ ८० हजारसे १ लाखसम भारु लेके आइट ।

बन्दाबन्दीके अवधिमे उहाँ गोसिनीया ओ चार जने बालबच्चासहित सीमा लग्गे भारतके गन्ना कम्पनीमे काम करटी रहिट । सीमानाका खुल्ना पर्खाइमे रहल बेला १५ जूनमे ओहकान गोसिनीया हेरागैली । चार जने बच्चा लेके नेपाल आइल उहाँ कबु नै भारत जैना निधो करले बाटै । ‘गोसिनीया फेला नाइ परली, लर्का बच्चा स्याहारटी आब अपने जमीनमे व्यावसायिक खेती कैना सोच बनैले बाटुँ,’ उहाँ कहलै ।

सुदूरपश्चिम प्रदेशके ६ लाख जनशक्ति वैदेशिक रोजगारीमे बाटै । उ मध्ये ढिउर भारतमे काम करठै । मने, कोरोनाभाइरस महाब्याधीपाछे रोजगारी गुमाके नेपालीहुक्रे भारतसहित टमान मुलुकसे घर लौट्ना क्रम बह्रल बा । ओम्ने फेन अन्य प्रदेशके तुलनामे सुदूरपश्चिम प्रदेशके ढिउर नागरिक लौटल बाटै ।

सुदूरपश्चिम सरकारके आन्तरिक मामिला तथा कानून मन्त्रालयके तथ्यांक अनुसार, बन्दाबन्दी हुइल ११ चैतसे १ असारसम टमान मुलुकसे सुदूरपश्चिममे २ लाख ४२ हजार ५२९ जने घर आइल बाटै । अब्बे घर लौटल कामदारहे रोजगारीके अवसर डेना ओ खाद्यान्न व्यवस्थापन कैना विषय प्रदेश सरकारके लाग चुनौती बनल बा ।

भोकमरीके जोखिम

विदेशसे मनैहुक्रे अइना क्रम बह्रलसंगे सुदूरपश्चिम प्रदेशमे कोरोना संक्रमितके संख्या फेन उल्लेख्य बह्रे पुगल बा । ४ साउनसम यी प्रदेशमे संक्रमितके संख्या ४ हजार ५४ पुगलमे १ हजार ६७१ जने डिस्चार्ज हुइल बाटै कलेसे ६ जनहनके मृत्यु होसेकल बा । कोरोनासँगृे यी महामारी ओ बन्दाबन्दीसे निम्त्याइल आर्थिक शिथिलताके कारण खाद्यान्न अभावके समस्या डेखे लागल बा ।

२०६८ सालके जनगणना अनुसार २५ लाख ५२ हजार ५१७ जनसंख्या रहल सुदूरपश्चिम प्रदेशके कैलाली ओ कञ्चनपुर बाहेक सात पहाडी जिल्लामे स्थानीय उत्पादनसे बरसभर खाइ नाइ पुगठ् । जीविकोपार्जनके लाग ढिउर मनै मजदूरी करे भारत जैना करल बाटै । काम करुइया जनशक्तिके
विदेश पलायन, सिंचाइ असुविधा लगायत समस्याके कारण पहाडके ढिउर जमीन बाँझ बावै ।

यी प्रदेशमे खेतीयोग्य जमीन ३ लाख ६९ हजार ७९६ हेक्टर रहलमे ३ लाख २२ हजार हेक्टरमे किल खेती करजाइठ् । ओम्ने फेन १ लाख ६६ हजार ३२५ हेक्टर जमीनमे किल सिंचाइ सुविधा रहल बा ।

कोरोना कहरसे देशभित्रे आयआर्जनके डगरा बन्द होके हात–मुह जोर्न संकट डेखे लागलमे विदेशसे अउइयाहुक्रनके बह्रटी रहल संख्यासे चुनौती आउर बह्रल स्थानीयहुक्रे बटैठै । दार्चुला गोकुलेके हर्कसिंह धामी दुर्गम बस्तीमे भोकमरीके समस्या बल्झल बटैलै । ‘बन्दाबन्दीमे स्थानीय तहसे खाद्यान्न राहत बाँटल रहे, उहीसे स्थानीयहे कत्रा दिन पुगी,’ उहाँ कहलै ।

सुदूरपश्चिममे कुल जनसंख्याहे वार्षिक रूपमे ५ लाख ४३ हजार ४२ मेट्रिक टन खाद्यान्न आवश्यक परठ् । कैलाली ओ कञ्चनपुरके आन्तरिक उत्पादन खपत होके बचत हुइठ् ।

मौसम प्रतिकूल नाइ होके बालीनाली सप्रेबर डडेल्धुरा ओ डोटीके उत्पादनसे लगभग बरस दिन पुगठ् । बाजुरा, बझाङ, अछाम, दार्चुला ओ बैतडीके १० लाख ५६ हजार ४८ जनसंख्या भर खाद्य असुरक्षामे बा । यी जिल्लामे गैल आर्थिक बरस खाद्यान्न उत्पादनमे करीब ३५ हजार मेट्रिक टन कमी आइल रहे ।

खाद्य अधिकारकर्मी देवीलाल खनाल कोरोना महामारीपाछे सुदूपश्चिममे भोकमरीके चपेटामे पर्ना जोखिम बह्रल बटैलै । ‘खाद्य संकटमे पर्ना वर्गहे लक्षित कैके कृषि उत्पादन ओ रोजगारीके कार्यक्रम आवश्यक बा । यकर लाग सरकारके लगानी सदुपयोग करे परल,’ उहाँ कहलै ।

सुदूरपश्चिम कृषि विकास निर्देशनालयके सूचना अधिकारी टेकबहादुर विष्ट प्रदेशके सात पहाडी जिल्लामे खाद्यान्नके आन्तरिक उत्पादन अपुग हुइना करल बटैलै । यद्यपि तराईके जिल्लामे खाद्यान्न बचत हुइटी रहल ओरसे अँट्याइ पर्ना अवस्था भर नाइ रहल उहाँके कहाइ बा ।

प्रदेशभरमे ढिउर खाद्यान्न उत्पादन हुइना कैलाली ओ कञ्चनपुरके उत्पादनहे व्यवस्थित रूपमे वितरण करे सेक्लेसे सुदूरपश्चिममे खाद्य संकट नाइ हुइना विष्ट बटैठै । ओहकान अनुसार, कैलालीमे १ लाख २ हजार ७२४ मेट्रिक टन ओ कञ्चनपुरमे ७७ हजार ११० मेट्रिक टन कैके १५ लाख ८ हजार ९१९ मेट्रिक टन खाद्यान्न बचत हुइटी रहल बा ।

‘उ खाद्यान्नहे अन्यत्र निकासी नाइ कैके पहाडी जिल्लामे वितरण कैना प्रणाली बनैलेसे संकट नाइ आइ,’ विष्ट कहलै ।

खस्कल रेमिटेन्स

कोरोनाभाइरस महाब्याधीके कारण नेपालीके श्रम गन्तव्य मुलुकके अर्थतन्त्र ओ व्यवसायमे गहिर असर परलपाछे रोजगारीमे गैल नेपालीके आम्दानी घटल बा ।

बन्दाबन्दीके तीन महिना अर्थात् गैल आर्थिक बरस २०७६/७७ के चैत–जेठमे देशमे भित्रल रेमिटेन्स नै करीब रु. ३४ अर्ब ३८ करोड घटल बा । उक्त तीन महीनामे करीब रु. १ खर्ब ८२ अर्ब ४४ करोड किल रेमिटेन्स भित्रल बा । जबकि, आघेक बरस २०७५/७६ के चैत–जेठमे रु. २ खर्ब १६ अर्ब रेमिटेन्स भित्रल रहे ।

गैल आर्थिक बरसके ११ महीना अर्थात् जेठसम वैदेशिक रोजगारीसे ७ खर्ब ७४ अर्ब ८७ करोड रेमिटेन्स आइल बा । टमान मुलुकमे नेपाली कामदारहुक्रे रोजगारी गुमैटी रहल समाचार अइटी रहल बेला सुदूरपश्चिममे अइना रेमिटेन्स फेन खुम्चल बा ।

कोरोनाभाइरसके कारण विकास ओ अर्थतन्त्रमे परल असरहे ध्यान डेटी कतिपय स्थानीय तह प्राथमिकता तय करले बावै । कैलारी गाउँपालिकाके अध्यक्ष लाजुराम चौधरी लौव आर्थिक बरसमे विकास ओ रोजगारीसंगे कृषि पेशाहे गति डेना नीति लानल बटैलै । गाउँपालिकाके जनशक्तिहे कृषिमे आकर्षित कैना अल्पकालीन, मध्यकालीन, दीर्घकालीन, कृषि योजना निर्माण कैना उहाँके कहाइ बा ।

‘वैदेशिक रोजगारीसे आइल युवाहे कृषि क्षेत्रमे आकर्षित कैना सार्वजनिक जमीन, गुठीके जमीन, सामुदायिक वन ओ लडियाके बगरमे खेती कैना नीति अवलम्बन करल बा,’ उहाँ कहलै ।

‘कृषिहे प्राथमिकता’, समस्यामे किसान

कृषि क्षेत्रहे विशेष जोड डेना सरकारी योजना सुन्टी आइल किसान उ अनुसारके सुविधा ओ सहयोग भर नाइ पैले हुइट । सिंचाइ असुविधा, मल अभाव, बजारीकरणके दुःख ओ उत्पादनके कम मूल्य किसानके साझा समस्या हो ।

सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारसे कृषिहे मुख्य प्राथमिकता डेके कृषि आधुनिकीकरण ओ यान्त्रिकीकरण कैना कहटी ‘मुख्यमन्त्री कृषि कार्यक्रम’ सञ्चालन करले बा । मने, प्रमुख अन्नबाली धान लगाके सेकढरलेसे फेन यहाँके किसानसे सरकारी अनुदानके रासायनिक मल नाइ पैले हुइट ।

कैलालीके कैलारी गाउँपालिका– ८ के किसान प्रेमबहादुर चौधरी (५०) मल विना नै धान लगाइल बटैलै । समयमे मल प्रयोग करे नाइ पाके धान उत्पादन घट्ना उहाँके चिन्ता रहल बा । ‘मलके लाग लग्गे सहकारीमे पहिले नै पैसा जम्मा करल रहुँ, मने समयमे नाइ पैनु,’ उहाँ कहलै ।

कैलालीके गौरीगंगा नगरपालिका–१० के पदम ऐर खेतुवामे धान हरियर हुइलेसे फेन मल डारे नाइ पाइल सुनैटी यी बरस उत्पादनमे ह्रास अइना चिन्ता सटाइल बटैलै । ‘प्रमुख अन्नबाली धानमे मल डारे नाइ पाके उत्पादनमे असर पर्ना हुइल, यी बरस खाद्य संकट निम्टना हो कि कना चिन्ता हुइल बा,’ उहाँ कहलै ।

साल्ट ट्रेडिङ धनगढीके अनुसार, धानके लाग कैलालीमे १५९.४५ मेट्रिक टन डिएपी, २ हजार ६७४.८० मेट्रिक टन युरिया ओ ८४ दशमलब ३० मेट्रिक टन पोटास बिक्री हुइल बा ।

सुदूरपश्चिममे विगत बरसमे कृषि सामग्री केन्द्रसे २० हजार मेट्रिक टन रासायनिक मल वितरण करलमे यी बरस ३० हजार मेट्रिक टन लन्ले बा । ओस्टके, साल्ट ट्रेडिङसे फेन १० हजार मेट्रिक टन वितरण करलमे यी बरस ६०० मेट्रिक टन ढिउर भित्र्याइल बा ।

ओस्टके, कृषि सामग्री कम्पनी धनगढीसे कैलालीमे चैतसे असारसम १ हजार २६९ मेट्रिक टन डीएपी ओ १ हजार ३३३ मेट्रिक टन युरिया बिक्री करल निमित्त क्षेत्रीय प्रबन्धक नवलसिंह बोगटी जानकारी डेलै । जेठसम डीएपी फेन बिक्री करलेसे फेन पाछेक समय मल डगरामे रुकलपाछे आपूर्ति हुइ नाइ सेकल बटैलै ।

सुदूरपश्चिम सरकारके भूमि व्यवस्था, कृषि तथा सहकारी मन्त्री विनितादेवी चौधरी मलके लाग समयमे टेन्डर आह्वान करलेसे फेन कोरोनाभाइरस महामारीके रोकथामके लाग देशभर लागू करल बन्दाबन्दीके कारण मल डगरामे अँटकलपाछे किसानहे समस्या हुइल बटैली ।

मन्त्री चौधरीके अनुसार, सुदूरपश्चिममे विगत बरसमे कृषि सामग्री केन्द्रसे २० हजार मेट्रिक टन रासायनिक मल वितरण करलमे यी बरस ३० हजार मेट्रिक टन लन्ले बा । ओस्टके, साल्ट ट्रेडिङसे फेन १० हजार मेट्रिक टन वितरण करलमे यी बरस ६०० मेट्रिक टन ढिउर भित्र्याइले बा ।

‘विगतके बरससे यी बरस १० हजार ६ सय मेट्रिक टन मल ढिउर आइल बा, मने किसानहे अपुग होके मल कहाँ गायब हुइल कना विषयमे हम्रे छलफल करटी रहल बाटी,’ उहाँ कहली ।

साभारः हिमालखबरसे

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