थारु राष्ट्रिय दैनिक
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संविधान निर्माण प्रक्रिया थारु विरोधी

पहुरा | ३१ भाद्र २०७७, बुधबार
संविधान निर्माण प्रक्रिया थारु विरोधी

नेपाल सरकार बैधानिक कानून २००४ जेम्ने ६८ धारामे लिपिवद्ध बा । उ पहिल कहल संविधानके मौलिक हकमे मुलुक भर अनिवार्य निःशुल्क प्रारम्भिक शिक्षा पैना हक, उमेर पुगल ओरसे भोट डारे पैना बाहेक जनपक्षीय कुछ नइहो । खाली राजा महाराजाहुकनके संरक्षण ओ गुनगानमे सीमित बा ।

दुसरा नेपालके अन्तरिम विधान २००७ जिहीहे ६३ वटा धारामे लिपिबद्ध करल रहे । यी फे पहिलसे ढेर फरक नइरहे । खाली मुलुकके सासन सम्बन्धी अख्यिारके पञ्जापत्र बमोजिम राणाहुक्रे मुलुके शासन सत्ता सञ्चालन कैना वैधानिकता पाइल अधिकारहे निषेध पार डेहल ।

टिसरा नेपाल अधिराज्यके संविधान २०१५ मे ७७ ठो धारामे लिपिवद्ध करल रहे । जौन और विषय कौनो लौव टे नइरहे मने नेपाल अन्तरिम शासन विधान २००७ के प्रतिवद्धतासे राजसंस्था बढि सत्यशाली बनैना कार्य कैगिल ।

चौठो नेपालके संविधान २०१९ मे ९७ ठो धारा लिपिबद्ध करल रहे । जिहीहे निर्दलिय दलविहिन प्रजातान्त्रिक पञ्चायत प्रणालीसे राजा महेन्द्रहे निरंकुशताके सक्कु अधिकार सौपडेहल ।

पाँचौ नेपालके संविधान २०४७ मे १३३ ठो धारामे लिपिबद्ध करल । जौन जन आन्दोलनके बलिदानहे सम्मान करटी निर्दलियताके अन्त्य करटी बहुदलिय प्रजातान्त्रिक संसदीय प्रतिस्पर्धाहे स्वीकरटी आघे बढ्न लक्ष्य डेहल । मने राजतन्त्रके निषेध करे नइसेक्गिल । जनभावना सम्बोधन कैना बहुमत प्राप्त पार्टी मन्त्रीपरिषद जननिर्वाचित संसद बनल । बहुदलिय प्रतिस्पर्धामे करिब सक्कु जैसिन भारी दल विभाजित हुइलै केल सत्ताके कुर्सीके लाग ।

छैठौं नेपालके अन्तरिम संविधान २०६३ मे १६७ ठो धारामे लिपिबद्ध कैगिल । जेकर प्रस्तावनामे कहल बा ‘हम्रे सार्वभौमिक सत्ता ओ राजकीय सत्ता सम्पन्न नेपाली जनता, नेपाली जनतासे २००७ साल पहिलेसे हालसम बार–बार करटी आइल एैतिहासिक संघर्ष ओ जनआन्दोलन मार्फत लोकतन्त्र शान्ति ओ अग्रगमनके पक्षमे प्रकट हुइल जनादेशके सम्मान करटी, देशमे विद्यमान वर्गीय, जातीय, क्षेत्रीय लैंगिक समस्याहे समाधान कैना राज्यके अग्रगामी पुनःसंरचना कैना संकल्प करटी, प्रतिस्पर्धात्मक बहुदलिय लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था, नागरिक स्वतन्त्रता, मौलिक अधिकार, मानव अधिकार, आवधिक निर्वाचन, व्यक्तिक मताधिकार, पूर्ण स्वतन्त्रता, स्वतन्त्र न्यायपालिका तथा कानूनी राज्यके अवधारणा लगायत लोकतान्त्रिक मूल्य ओ मान्यताप्रतिके पूर्ण प्रतिवद्धता व्यक्त करटी नेपाली जनताके अपन लाग अपनही संविधान बनाई पैना ओ भयमुक्त वातावरणमे संविधान सभाके स्वतन्त्र ओ निष्पक्ष निर्वाचनमे सहभागि हुई पैना आधारभूत अधिकारके प्रत्याभूति करटी लोकतन्त्र शान्ति, सम्बृद्धि, अग्रगमन, आर्थिक सामाजिक परिवर्तन तथा देशके सार्वभौमिकता, अखण्डता, स्वतन्त्र स्वाभिमानहे केन्द्रमे रख्टी राजतन्त्रके विधिवद्ध अन्त्य करके नेपाल एक संघीय लोकतान्त्रिक, गणतन्त्रामक राज्य रहल घोषणा करटी आज समके क्रान्ति ओ आन्दोलनहे प्राप्त उपलब्धीहे संस्थागत कैना संविधान सभासे नयाँ संविधान नइबनटसमके लाग राजनैतिक सहमतिसे तयार हुइल यी नेपालके अन्तिरिम संविधान २०६३ जारी हुइल घोषणा करटी ।

यी संविधानसे राजाहे प्रदान करल स्वविबेकके अधिकारके प्रयोग सार्वभौमसत्ता ओ राजकीय सत्ता जनतामे सार्वभौम करटी राजसंस्थाहे विधिवद्ध अन्त्य कैगिल । यहाँ अन्तरिम संविधान २०६३ के आधारमे पहिल संविधान सभा निर्वाचन हुइल । निर्धारित समय सीमाभिटर संविधान नइलिखटसम बार–बार समय सीमा ठप करेबेरफे खास करके संघीयताके वास्तविक ठोस ओ वस्तुवादी व्यवस्थापन करे नइसेकल । वास्तविक संघीयता पक्षधर ओ बाध्यतासे संघीयता स्वीकार्न बाध्य हुइल पक्ष विभाजित हुइलै । संघीयता व्यवस्थापनके निश्चित आधार फे ठोस कैगिल । मने अपनही ठोस करल आधार पहिचान ओ सामाथ्र्य भारी पार्टीके भारी नेता मन्ना तयार नइहुइलै । अन्ततः पहिल संविधान सभा भंग हुइल । दुसरा संविधान सभा निर्वाचनके समय सीमा घोषणा हुइल । मित्रदेशहुकनके सहयोगमे दुसरा संविधान सभा निर्वाचनफे हुइल ।

सातौं नेपालके संविधान २०७२ घोषणा हुइल । जिहिहे ३०८ ठो धारामे लिपिबद्ध करगिल । हाल यी संविधान कार्यान्वयके अग्रसत्तामे शासकहुक्रे कटिबद्ध बाटी कहटै । मने कहटी हम्रे यी संविधान करिया, कप्टि ओ पहिचान विरोधी बा ।

यी सातौं संविधानसे राज्यके पुनःसंरचना करेबेर खासकैके द्वन्द्व व्यवस्थापन, शान्ति प्रक्रियाहे मुख्य केन्द्रमे राखे नैसेकल । औटे नामांकरण ओ सीमांकन पहिचान ओ सामथ्र्यके आधारमे टेकके करेपरना रहे । मने जनभावना विपरित सक्कु अधिकार सिंहदरबार केन्द्रीकृत एकात्मकवादी सोचसे ग्रसित हुइल । महाभुकम्पके मौका छोपके सामन्ती नेताहुकनके स्वार्थ अनुकुल सात प्रदेश निर्माण कैके घोषणा करल । एैतिहासिक जातीय, सामुदयिक ओ क्षेत्रीय पहिचानके आधारमे प्रदेशके सीमांकन हुइपरनामे औरफेन नामके किल संघीयता लड्ना खोजल प्रष्ट बा । गण्डकी प्रदेश, बागमती प्रदेश, कर्णाली प्रदेश सुदूरपश्चिम प्रदेश नामांकन करना जैसिनसे पहिचान विरोधी सोच ओ उच्च जातीय अहंकार झल्कठ । आदिवासी जनजातिहुकनके सघनता रहल ऐतिहासिक भूगोलहे खण्डीकरण कैके जनसंख्याके हिसाबसे अल्पमतमे पारके सत्तामे ओइनके प्रतिनिधित्व पुगे नैसेक्ना कैके राज्यके पुनःसंरचना करल बा । यी सात प्रदेशके संरचनासे न टे लोकतन्त्रिक गणतन्त्रहे संस्थागत करे सेकी, न टे लम्मा समयके द्वन्द्वहे सामाधान करे सेकी ।

अधिकार ओ न्यायके लाग शान्तिपूर्ण आन्दोलनमे लागल कारण निर्दोष थरुहट नेता एवम् जनप्रतिनिधि माननीय रेशम चौधरी सहित सोझासाझा थारु अगुवा बडघर, भल्मन्सा एवम् सर्वसाधारणहे सुनियोजित रुपमे टमान झुठा मुद्दामे जेल कोचल बाटै । टीकापुर घटनाके विषयमे सरकारसे गठन करल पूर्व न्याधिस गिरिसचन्द्रलाल आयोग ओ गृहमन्त्रालयसे देवीराम शर्माके संयोजत्वमे गठित छानविन समितिके प्रतिवेदन सार्वजनिक नैकैके लुकाके ढरना हमार सूचनाके हकहे समेत छिंनल बा, ओली सरकारसे ।

२०७२ साल भदौं ८ गतेक् दिन निषेधज्ञा कफर््यू लागल बेला टीकापुरमे रहल थारुहुकनके घर पसल, व्यवसायिक केन्द्र मिडिया हाउसमे छान–छान आगजनी, लुटपात, चोरी चन्डाली स्थानीय गुण्डाहुक्रे परिचालित कैके सरकारके निर्देशनमे दुरभाग्यपूर्ण सामाजिक सद्भाव बिगर्ना काम शासकहुक्रे करलै । जातीय द्वन्द्व फैलैना सरकार लागल डेखाइठ । यी करनाके पाछे करिया अधुरा अपुरा पहिचान विरोधी संविधान घोषणा करना रहे ।

हमार फेन इच्छा चाहना रहे । असोज ३ गते संविधान दिवस भव्यताके साथ मनैना । मने शासकहुकनके दमनकारी थारु विरोधी निरंकुशतावादी सोचसे हम्रिहिनहे सडकमे उत्रना बाध्य बनागिल बा । यी सातौं नेपालके संविधानसे फेन हम्रिहिनहे न्याय ओ अधिकारसे बञ्चित करल । हमार उप्पर करल जंगली दमनबारे ढेर व्याख्या करे नैपरल । हमार भोगाई काफि बा ।

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