थारु राष्ट्रिय दैनिक
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हानीकारक परम्परा विरुद्धके यी पौला

पहुरा | २० आश्विन २०७७, मंगलवार
हानीकारक परम्परा विरुद्धके यी पौला

उन्नती चौधरी
धनगढी,२० कुवाँर ।
सामाजिक अभियन्ता बासुदेवी कुछ दिन आघे कैलाली अदालतके एक कर्मचारीसंग चर्काे बोली बोल्टी रहल अवस्थामे भेटली । उहाँ प्रश्न रहे, ‘यैसिन मुद्दामेफे मिलापत्र कहाँ करे मिली ? गरिबके छाई उप्पर जा फे कहाँ मिली टे ? दुखी गरिब बाँचे नइपैना हो टे ?’

कैलालीके ९ वरसके बलात्कृत लौण्डीक न्यायके लाग उहाँ अदालत पुगल रहिट । विपन्न परिवारके बलात्कृत लौण्डीक न्यायके लाग सेफे पैसाके आडमे मुद्दा कमजोर बनैना ओ पीडकहे उन्मुक्ति डेना चलखेल हुइल कहटी उहाँ आक्रोस व्यक्त करटी रहिट । ‘पैसासे न्याय किने सेक्ना हो कलेसे आब यम्ने संलग्न सक्कुहुनके पोल खोलम  । यम्ने अदालत प्रयोग नइहोडेहे उहाँक चेतावनी रहे ।

हेरेबेर सामान्य व्यक्तित्व । मातृभाषासहितके नेपाली लवज । पाटिर ज्यान । मने उहाँ उ कर्मचारीसंग बोलल शब्द ओ आत्मबल भर बहुट उच्चस्तरके । लागे कुछ करके यी लौण्डी न्यायालयसे न्याय नइपैली कलेसे बासुदेवीले अपन शक्ति प्रयोग करही ओ उहाँहे न्याय डेहुवैही । बलात्कृत लौण्डी ओ न्यायप्रति उहाँक ओसिन लगाव रहे ।

विगतमे अपनही हिंसामे परके बार–बार अदालत पुगल रहिट, बासुदेवी । अपने परिवार ओ छिमेकीसे डेहल पीडाविरुद्ध न्यायालयके ढोका ढक्ढकाइल निरक्षर बासुदेवीमे न्यायप्रतिके माया यिहे कारणसे जुर्मुरैटी रहल । ओ उहाँ अन्यायमे परल हरेक लौण्डी ओ महिलाके लाग ज्यान डेके लग्ठी ।

‘न्याय खोज्न कटरा कठिन बा कना बाट मै स्वयं भुक्तभोगी मनै । सही हुइलेसेफे पीडितके पक्षमे आवाज उठाडेना संस्कार लगभग नइहो । टबमारेफे अन्यायमे परल हिंसापीडितके लाग आवाज उठैना करल बाटु,‘ बासुदेवी कहली, ‘जे कमजेर रहठ, ओकरउप्पर अन्याय हुइठ । ओ के साथ डेना ? मै अपनही भोगल पीडा भुल्न ओ और पीडितके आवाज बन्न उहाँहुकनहे साथ डेना करल बाटु ।’

के हुइटी बासुदेवी ?

असारके महिना रहे, किसानहुक्रे रोपाइँमे व्यस्त हुइसेकल रहिट । मने बासुके खेतुवामे वियारफे नइछिटल रहे । गोसियासे झगडा परके बोलचाल नइहुइल दुई महिना बिटसेकल रहे । उहाँ छाईहे कहली, ‘जा छाई अपन बाबाहे उ घरसे बोलाके आ, बरु छोटे धानके बियार धारके लगैबी ।’

२०६७ असार ७ गतेक दिन, झिमझिम पानी परटी रहे । बासुके गोसिया बार–बार बोलैलेसेफे नइअइलै । ‘पहिले टे डाईछाई कोडरासे खोडली । नइसेकलपाछे छाईहे जा गोरु, खोल मै जोटम कनु । पाछे मै मजासे खेतुवामे किलवाही ओ पटेला नन्लु, उहाँ कहली, ‘हर बोक्के खेतुवामे चाहिँ लैजैना करल हुइलेसेफे महिलाहे हर जोटे नइडेना सामाजिक कुरीति अनुसार विगतमे हर जोटले नइरहिट । एकघाचिकपाछे टे मोर गोसियासहित पूरे गाउँले आके महीहे घेरलै । कालोमोसो घस्लै । जुत्ताके माला घलैलै । गाउँ घुमैलै । ओ अनेकथरी गारी बेइज्जती करटी गाउँसे निकाला करलै ।’

हर जोटल कारण १० वर्षआघे अपने गोसिया लगायत छिमेकीसे अमानवीय भोगल वासुदेवीमे हर जोत्न आँटचाहिँ कैसिक आइल टे ? उहाँ कारण सुनैली, ‘गाउँमे आयोजना करल महिला अधिकारसम्बन्धी एक ठो तालिममे सहभागी हुके प्रशिक्षकहे पुछले रहु, ‘कौनो महिला हरे कहे नइ जोटना ? जेकर घरेम पुरुष नइहुइट, गोसिया सहयोगी नइहुइट । छरछिमेक सहयोग नइकरठै । ओ महिला का खेतुवा बाँझ रख्न ?’ उहाँक प्रश्नके जिज्ञासा मेटैना प्रयाससहित प्रशिक्षकसे जवाफ डेहल, ‘कानूनसे हर जोत्न कार्य दण्डनीय मानल नइहो । बरु महिलासे हर जोटलेसे नइमजा व्यवहार कैनो समाजविरुद्ध सार्वजनिक मुद्दा लागठ ।’ अटरा सुनलपाछे बासुदेवीके मुटु बल्गर हुइल । ओ असहयोगी गोसिया ओ छिमेकीहे चुनौती डेना हर जोटडेली ।

कैलालीके गौरीगंगा नगरपालिका–४ सिप्रान टोलके ५० वर्षीया वासुदेवी सुनार हर जोत्न आघे घरेलु हिंसासेफे पीडित हुइली । करिब २०÷२२ बार न्यायके लाग ईलाका प्रहरी चौकी जासेकल रहिट । उ दिन उहाँ रहरसेफे बाध्यतासे हर जोटल रहिट । मने बदलामे अपने गोसिया सहिट पूरे बस्तीसे सामाजिक बहिष्करणमे परली । सहाराविहीन हुइली ओ मानसिक रुपमे विक्षिप्त हुइली ।

बासुदेवीके भोगाइसे कहठ, उहाँ अन्यायविरुद्ध लरेक लाग केल जन्मल हुइट । २०४६ सालमे वीरबहादुर सुनारसंग बैबाहिक बन्धनमे जोरना क्रममे मण्डपमे दुलाहा ओ दुलही पक्षबीच दाईजके बाट लेहे कुटाकुट हुइट । गाउँलेहुकनके सहयोगमे मिलापत्र करके भोजफे हुइल मने गोसियक साथ ओ समर्थन भर कबु नइपैली ।

बासुदेवी पहिल चो २०४९ सालमे ईलाका प्रहरी कार्यालय चौमलामे घरेलु हिंसाके फाईल आघे बह्रैली । प्रशासनसे दुनु जनहनहे बोलाके मिलापत्र करडेहल । गोसिया गोसिनीया कागजमे टे मिल्लै मने मन कबु नइमिलल । फलस्वरुप उहाँ महिनपिच्छे चौकी जाई लग्ली । ‘प्रहरीसे भर ठरुवा जन्नीक झगरा, पैरक आगी कहटी’ कहटी मिलापत्र करके घर पठाडेहल ।

३ कक्षासम केल औपचारिक शिक्षा हासिल करल उहाँक टमान गैरसरकारी संस्थासे सञ्चालित महिला सशक्तिकरण परियोजनासे प्रौढ शिक्षा लेटी आइल बटैली । प्रौढ कक्षासंगे उहाँ उहाँक बालविवाह, बहुविवाह, चेलिबेटी बेचबिखन रोकथाम सम्बन्धी कक्षा लेहल रहिट । उहे अभियान गाउँमे सञ्चालन करे खोजल रहिट ।

उहे समयमे हर काण्ड हुइल । गाउँले मुहारभर कालोमोसो ओ घेचामे जुत्ताके माला घलाडेहलपाछे गाउँ निकाला करलपाछे कहाँ जैना कौनो अत्तोपत्तो नइरहे । मने उहे दिन उहाँ अपनहे तालिम डेहल धनगढीस्थित ओरेक कैलाली घटनाबारे जानकारी डेली । ओरेकसे घटनाबारे प्रहरीसहित सक्कु सरोकारवाला निकायहे खबर करलपाछे उहाँ उहे दिन प्रहरीके सहयोगमे सदरमुकाम धनगढी पुग्ली ओ छाई सहित ओेरेक नेपालके सुरक्षित आवास गृहमे बैठे लग्ली ।

सुरक्षित आवास गृहके बसाईके क्रममे उहाँ कानूनी उपचारके डगर खोज्ली । जिल्ला कानूनी सहायता समिति कैलालीके प्रमुख तथा अधिवक्ता देवीलाल चौधरीमार्फत जिल्ला अदालत कैलालीमे घरेलु हिंसा (कसूर सजाय) ऐन अन्तर्गत अपने गोसिया वीरबहादुर सुनार ओ १२ जाने छिमेकीविरुद्ध सार्वजनिक अपराध अन्तर्गत मुद्दा दायर करली ।

अदालतके २०६७ फागुन २३ गतेक फैसलासे उहाँक गोसियाहे ६ महिना कैद ओ २१ हजार जरिवाना हुइल कलेसे औरहे जनही १०–१० हजार जरिवाना कराइल ।

हर जोटल दिनसे उहाँ गोसियासे अलग बैठे लग्ली । मुद्दा फैसला हुइलपाछे आर्थिक जोहो कैना भारतके पञ्जाब पुग्ली । चार वर्ष उहरे बिटैली । लौटके आइलेसेफे गोसिया नइस्वीकारलै । मने उहाँ हार नइमन्ली । उहाँ कहली ‘१० वर्ष पाछे २०७६ कुवाँर महिनामे गोसिया महीसे माफी मागे अइलै । माफीफे डेनु । चार महिना मजासे बिटल । मने खै काहेक हो, गोसिया माघ ३ गते घरेम आत्महत्या करलै ।

सत्य नुकैना ओ गलतके आघे झुके नइजानल उहे वासुदेवी आजकाल्ह उहे समाज सुधारके अभियानमे जुटल बाटी । अपन उप्पर कालोमोसो खन्यइना गाउँलेसंग हातेमालो करके विकास निर्माण ओ न्यायके लाग बुलन्द आवाज उठैटी रहल बाटी ।

समाजसे अपहेलित हुइल वासुदेवी अपन विचारसे भर कहु फे विचलित हुइल नइहुइट । बरु अपनहे निकाला कैना समाज बडरना अभियानमे जुटल बाटी । पहिलेसे समाज सुधारके डगरेम अग्रसर उहाँ हालफे निरन्तर क्रियाशील बाटी ।

ओस्टेक गौरीगंगा नगरपालिका वडा नं. १ के १९ वर्षीया प्रमिला नेपालीफे बाँचेक लाग ढेर संघर्ष करे परल । पाँच वर्षके हुके बावा गुमाइल नेपाली कहठी ‘आर्थिकरुपसे एकदम विपन्न परिवारमे डाईक एक्केली हम्रहिन हुर्कैली । बाबाक मुहार कैसिन रहे पत्ता नइहुइल, तस्वीर हेरके चित्त बुझैठु । छोट रहेबेर औरसे डेहल कपरा लगाके हुकर्नु । छोटकी डाडु छोटसे मजदुरी करके मै पह्रैनु ।’

प्रमिलाके डाडु बहिनीया डाई जबफे भारी मनै बन्न, नाउ कमैना कहिट । डाई दुःख करके अपनेहुकनहे हुर्काइल डेखके उहाँक मेफे डाईक इच्छा पूरा कैना सपना रहे । उहे सपना साकार पपर्ना उहाँ डगर खोजे लागल रहिट ।

गौरीगंगा नगरपालिका वडा नं. ११ के २४ वर्षिय प्रेम चौधरीले मजदुरी करके स्नातक तहसमके पढाई करलै । टमान आरोह अवरोहके बाबजुत २०७३ सालमे प्लान इन्टर नेश्नल नेपालके आर्थिकमे ओरेक नेपालसे सञ्चालित बालिका पैरवी परियोजना अन्तगर्तग गठन करल प्रगतिशील नगर स्तरीय यूवा सञ्जालमे काम कैना मौका पैलै । उहे दिनसे उहाँ सामाजिक अभियन्ताके रुपमे क्रियाशील बाटै ।

हिंसाविरोधी अभियानमे सक्रिय हुइलपाछे अपनहे हेर्ना समाजके दृष्टिकोण परिवर्तन हुइल उहाँ बुझाई बा । हाल उहाँ दुईवर्षसे गाउँक भलमन्साके जिम्मेवारी निर्वाह करटी आइल बाटै । उहाँ कहलै, ‘लैंगिक हिंसाविरुद्ध युवा अग्रसर हुइना जरुरी बा । यी महिलाके केल मुद्दा नइहो ।’

ओस्टेक अन्तर धार्मिक सञ्जालके सचिव दुखीराम चौधरी पछिल्का अवस्थामे टमान धर्ममे आवद्ध धर्मगुरुहुक्रे सामाजिक अभियन्ता हुके काम करटी रहल बटैलै । उहाँक अनुसार छाउपडी, बालविवाह, बोक्सी प्रथा विरुद्ध सक्कु जे एकजुट हुके अवाज उठैटी रहल बाटै । साथे धर्मगुरुहुक्रे अन्तर धार्मिक सञ्जालमे आवद्ध हुइलपाछे मठमन्दिरमे उमेर नइपुगल लउण्डा लउण्डी भोज करके आइबेर सम्झाई बुझाई लौटैना करल बटैलै ।

चौधरीसे धर्मग्रन्थ वा बाईबलमे हानीकारक परम्परागत अभ्यास जैसिन कुप्रथा कहि कटैफै उल्लेख नइरहल कहटी समुदायस्तरमे जनचेतना मूलक अभियान चलैटी रहल बटैलै ।

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