थारु राष्ट्रिय दैनिक
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[ थारु सम्बत ०३ बैशाख २६४८, सोम्मार ]
[ वि.सं ३ बैशाख २०८१, सोमबार ]
[ 15 Apr 2024, Monday ]
‘ प्रदेशस्तरीय महिलावादी मञ्च उसरल ’

माग ओ प्रतिवद्धता सहित १५ बुँदे घोषणापत्र जारी

पहुरा | २६ आश्विन २०८०, शुक्रबार
माग ओ प्रतिवद्धता सहित १५ बुँदे घोषणापत्र जारी

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २६ कुँवार ।
टमान माग ओ प्रतिवद्धता सहित १५ बुँदे घोषणापत्र जारी कैटी सुदूरपश्चिम प्रदेश स्तरीय महिलावादी मञ्च २०८० उसरल बा ।

महिला तथा यौनिक तथा लैंगिक अल्पसंख्यकहुक्रनके शरीरहे हेर्ना पितृसातमक सोच ओ हानिकारक परम्परागत अभ्यासके कारण महिलाके जीवन, परिवार, समाज ओ समग्र विकासमे परटी रहल प्रभावके विश्लेषण कैटी महिला तथा यौनिक लैंगिक अल्पसंख्यकहुक्रनके शरीरउपरके अपने नियन्त्रण हुइना वातावरण सिर्जना कैना, महिलाहुक्रनके समग्र श्रमहे मर्यादित श्रममे रुपान्तरण कैना सवालके पहिचान कैके तिनु सरकार सममक्ष विभेदकारी नीतिके परिमार्जन तथा रहल नीतिके प्रभावकारी कार्यान्वयके माग रहल बा ।

ओस्टके संविधानके धारा ३८(४) अनुसारके कानुन निर्माण कैके अविलम्ब कार्यान्वयन, निर्वाचनके प्रक्रिया ओ नियमावलीमे परिवर्तन कैटी समुदाय तहसे महिलाके समावेशी समानुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चिताके लाग स्थानीय तहमे रहल जनप्रतिनिधी, महिला मानव अधिकार रक्षक, नागरिक समाजके प्रतिनिधिहुक्रे सहकार्यतामे कार्य कैना प्रतिवद्धता फेन जनैले बाटै ।

उहाँहुक्रे असमान शक्तिसम्बन्धसे लानल संरचनागत विभेदके अन्त्य कैटी सक्कु जाने समान न्यायके अनूभूति करे सेक्ना वातावरण निर्माणके संगठित रुपमे समुदाय तहसे अभियान सञ्चालन कैना, संविधान प्रदत्त सामाजिक सुरक्षाके हक घरेलु श्रमिक, कृषि श्रमिक, गिट्टी कुटुइया, मनोरञ्जन लगायतके अनौपचारिक क्षेत्र ओ टमान जोखिमपूर्ण श्रममे कार्यरत महिलाहुक्रे समेत प्राप्त करे सेक्ना स्थि िनिर्माणके लाग समुदाय तहसे नै नेतृतव एवं सहकार्य कैना प्रतिवद्धताके साथ यकर लाग आवश्यक नीतिगत व्यवस्थाके निर्माणके माग रहल बा ।

ओस्टके महिला भिट्टर फेन अपांगता रहल, दलित, जनजाति, बादी, मधेशी, यौनिक तथा लैंगिक अल्पसंख्यक, समुदायके लाग राज्यके हरेक संरचनामे विशेष व्यवस्था कैना, महिलाके आन्तरिक, राजनीतिक ओ आर्थिक श्रोत उपरके नियन्त्रयाके कारण नेतृत्वमे परल असरहे विश्लेषण कैटी महिलाके सम्पत्तिउपरके हक, सूचनाके हक, शिक्षाके हक, आवासके हक, सामानुपातिक समावेशी नेतृत्वके अधिकारहे संविधानमे उल्लेख करल बमोजिम कार्यान्वयनके लाग आवश्यक पहल, मानवीय संकटके समयमे महिला, बालबालिका तथा किशोरीहुक्रे, यौनिक तथा लैंगिक अल्पसंख्यक समूह थप जोखिममे पर्ना हुइल ओरसे संकट व्यवस्थापनके प्रक्रियामे महिला, अपांगता रहल व्यक्ति, यौनिक तथा लैंगिक अल्पसंख्यक समुदायके व्यक्तिहुक्रनके समावेशी सहभागिता सुनिश्चितताके लाग पहल कैना लगायतके प्रतिवद्धता जनैले बाटै ।

‘न्याय, समानता ओ पर्यावरणीय अधिकारके सुनिश्चितता ः सामाजिक रुपान्तरण सहितके दिगो विकासमे सुनिश्चितता’ कना मूल नारा सहित इहे कुँवार २५ ओ २६ गते धनगढीके शुभश्री प्यालेसमे कार्यक्रम हुइल रहे । कार्यक्रममे मुख्य कैके महिलाके श्रमके अधिकार, शरीर ओ पर्यावरणीय न्याय, मानवीय संकट ओ महिलाके नेतृत्वके सवालमे प्यानलगत छलफल हुइल रहे ।

प्यानलगत छलफलमे पहिल रोजके दुसरा सत्रमे शरीर मोर नियन्त्रण औरेक कना विषयमे महिला मानव अधिकार रक्षक राष्ट्रिय सञ्जालके अध्यक्ष श्याम कुमारी शाह सहजी करल रही । ओस्टके उहे विषयहे लेके उठल सवालगत प्रस्तुतीकरण सुदूरपश्चिम समाज (यौनिक तथा लैंगिक अल्पसंख्यक)के करुणा नेपाल करल रही ।

महिला मानव अधिकार रक्षकहुक्रनके राष्ट्रिय सञ्जालके संस्थापक अध्यक्ष डा. रेणु अधिकारी श्रमके अधिकार विषयमे प्यानलगत छलफलके सहजीकरण करल रही । ओ सवालसे सम्बन्धित प्रस्तुतीकरणमे तरंगिनी फाउण्डेसनकेके कार्यक्रम संयोजक लुमन्ती सिद्धि बज्राचार्य करल रही ।

ओस्टके कार्यक्रमके दुसरा दिन अनुसन्धानकर्ता, सञ्चारकर्मी इन्दु थारु, महिला मानव अधिकार रक्षकहुक्रनके राष्ट्रिय सञ्जालके संस्थापक अध्यक्ष डा. रेणु अधिकारी पर्यावरणिय न्यायः मानवीय संकट एवं महिला नेतृत्व बीचके अन्तरनिर्भरता ओ सिड सम्बन्धी कार्यशालाके सहजीकरण करल रही । जेम्ने सवालसंग सम्बन्धित प्रस्तुतीकरणमे दलित महिला अधिकार मञ्चके सावित्रा घिमिरे करल रही ।

उद्घाटन कार्यक्रमके बर्का पहुना उद्योग पर्यटन वन तथा बातावरण मन्त्री रमेश धामी रहल रहिट । खास पहुनामे उपसभामुख कोइली देवी चौधरी ओ पहुनामे प्रदेश सभा सदस्य सन्तोष थापा, जुना दानी, ललिता सुनार, तुलसी देवकोटा, लक्ष्मी विक, गीता चौधरी, खेमा देवी विष्ट, इन्द्रा गिरी, जानकी ऐर, देवी कुँवर, पालिका प्रमुख ओ उपप्रमुख लगायत रहल रहिट ।

महिला मानव अधिकार रक्षकहुक्रनके राष्ट्रिय सञ्जाल लगायत टमान संघसंस्थाके आयोजनामे हुइना कार्यक्रममे प्रदेशके ९ जिल्लाके ८८ पालिकाके महिला जनप्रतिनिधी, महिला मावन अधिकार रक्षक, महिला अधिकारके क्षेत्रमे काम करुइया संघसंस्थाके प्रमुख, स्थानीय सरकारके पदाधिकारी, सञ्चारकर्मी ओ महिला अधिकारकर्मी सहित चारसयसे ढेर जनहनके सहभागिता रहल रहे ।

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