थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०२ सावन २६४८, बुध ]
[ वि.सं २ श्रावण २०८१, बुधबार ]
[ 17 Jul 2024, Wednesday ]

डशिया सुरु, थारुहुक्रे जेउँरा ढरलै

पहुरा | २९ आश्विन २०८०, सोमबार
डशिया सुरु, थारुहुक्रे जेउँरा ढरलै

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २९ कुवाँर
। हिन्दु परम्परा अनुसार डुटिया (जोन्ह्य) हेरलक दिन जेउँरा ढर्ना चलन रहल बा, मने थारु समुदायसे भर आज सकारे (डुटिया हेरलक डुसर दिन) जेउरा ढरटी रहल बटै ।

थारुहुक्रे भर परम्परासे डुटिया हेरलक दुसर दिन जेउँरा ढरटी आइल चलन अनुसार आज सकारे विधि रुपमे जेउँरा ढारे लागल हुइट । पञ्चाङ निर्णायक समितिसे भर जेउँरा ढरना (घटस्थापना) के उत्तम साइत अँटवारके रोज दिनके ११ बजके २९ मिनेट टोक्ले रहे ।

थारु बृद्धिजीवी तथा धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर ८ धनगढी गाउँक भल्मन्सा सरोज चौधरी थारु समुदाय पुर्खोसे डुटिया हेरलक दुसर दिन जेउँरा ढरटी आइल ओरसे अपनेहुक्रेफे आज सकारे लहालहुके जेउँरा ढरना बटैलै । उहाँ कहलै, ‘हमार पुर्खाहुक्रे अभिनसम डुटिया हेरलक दुसर दिन जेउँरा ढारिट, उहे अनुसार हम्रे ओइनके सिखाइल चालचलनहे निरन्तरता डेटी आइल बटी ।’ सकारे या साँझके लहालहुके डेउटनाके कोठक पाटामे (डेहुरार) जेउँरा ढरटी आइल उहाँ कहलै ।
थारु नागरिक समाज कैलालीके संयोजक दिल बहादुर चौधरीफे थारु समुदायसे डुटिया हेरलक दुसर दिन ढेर जैसिन थारुहुक्रे जेउँरा ढरटी आइल बटैलै । उहाँ कहलै, ‘हम्रेफे जेउँरा नइढरले हुई, पुर्खाहुक्रे डुटिया हेरलक दुसर दिन जेउँरा ढारिट उहे अनुसार आज सकारे विधि अनुसार जेउँरा ढाराटी ।’

थारु कल्याणकारिणी सभाके केन्द्रीय सदस्य तथा थारु बुद्धिजिवी प्रभातकुमार चौधरी हिन्दु परम्परा अनुसार डुटिया हेरलक दिन जेउँरा ढरना चलन रहल मने कोई–कोई थारुहुक्रेफे आब ज्योतिसके पत्र हेरके ओकर सिको करे लागल बटैलै ।
धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर ५ जाँई गाउँक भल्मन्सा कुलविर चौधरीफे अपनेहुक्रे पुर्खासे चलन अनुसार आज सकारे जेउँरा ढारे लागल बटैलै । उहाँ आने सालक डशिया रहरङगी करटी, नाँचगान करटी मनागैल ओरसे यी बरसफे मिलजुलके मनैना बटैलै ।

थारु महिला बुद्धिजीवी तथा थारु कल्याणकारिणी सभाके पूर्व सह–महामन्त्री इन्दिरा चौधरी कहली, ‘पहिले–पहिले थारुहुक्रे डुटिया हेरके दुसर दिन जेउँरा ढारिट मने कोक्रो–कोक्रो भर डुटियक हेरलक रोजफे ढरना चलन बटिन ।’
अँटवारसे नवरात्र सुरु हुइल बा । नवरात्रके पहिल दिन घर–घरमे घटस्थापना करजाइठ । आश्विन शुक्ल प्रतिपदासे वडका डसिया सुरु हुइल मानजाइठ ।

यी दिन चित्रा नक्षत्र ओ वैधृति योग परल ओरसे घटस्थापना कैना आघे चित्रा नक्षत्र ओ वैधृति योगके शान्ति करके घटस्थापना कैना शास्त्रसम्मत डेख्ना समिति जनैले बा । वडका डसिया कुवाँर शुक्ल पूर्णिमासम १५ दिन धूमधामके साथ मनाजाइठ ।

दुर्गा देवीके तीन ठो रुप महाकाली, महालक्ष्मी ओ महासरस्वतीके नवरात्रभर विधिपूर्वक आह्वान करके पूजा आराधना करजाइठ । महाकाली शक्तिके प्रतीक, महालक्ष्मी धनधान्य, ऐश्वर्यके प्रतीक ओ महासरस्वतीहे विद्या ओ बुद्धिके प्रतीकके रूपमे पूजा आराधना कैना वैदिककालसे परम्परा बा ।

दुर्गासे आसुरी प्रवृत्तिके प्रतीकके रूपमे रहल चण्ड, मुण्ड, शुम्भ, निशुम्भ ओ रक्तवीज लगायतके राक्षसहे वध कैना लेहल नौ ठो रुपके दुर्गा पक्षके अवसरमे विशेष पूजा, आजा ओ आराधना कैना करजाइठ । यी आराधनासे वर्षभर गलत प्रवृत्तिविरुद्ध लरना शक्ति प्राप्त हुइना विश्वास करजाइठ । कुवाँर शुक्ल प्रतिपदासे पूर्णिमासमके १५ दिनहे दुर्गा पक्षफे कहठै ।

नौ दिन नौ दुर्गाके पूजा– नवरात्रके पहिल दिन शैलपुत्री, दुसरा दिन ब्रह्मचारिणी, टिसरा दिन चन्द्रघण्टा, चौठा दिन कुष्माण्डा, पाँचौँ दिन स्कन्दमाता, छैटौँ दिन कात्यायनी, सातौँ दिन कालरात्री, आठौँ दिन महागौरी, ओ नवौँ दिन सिद्धिदात्री देवीके पूजा आराधना कैना करजाइठ । यिहे नौ दुर्गाके रुपहे नवदुर्गाफे कहठै ।

डसियाके सातौँ दिन धार्मिक विधि अनुसार फूलपाती भिटरयाजाइठ । कार्तिक ४ गते सकारे ९ बजके ३५ मिनेटमे फुलपातीके साइत रहल समिति जनैले बा ।

महाअष्टमी ओ महानवमीके दिन बलि पूजा कैना डसिया घर, कोत ओ शक्तिपीठमे बलिसहित विशष पूर्जा करठै ।
विजयादशमीके साइत कार्तिक ७ गते सकारे ११ बजके २ मिनेटमे– नवरात्र कहिके समेत चिन्हा दसैँ नौ रात ओ दश दिनके रहठ । अँटवार विधिपूर्वक घर घरमे आह्वान करके पूजा आराधना कैना दुर्गा देवीहे कार्तिक ७ गते विजयादशमीके दिन विसर्जन करके मान्यजनसे प्रसादके रूपमे टीका, जेउँरा ओ फूल प्रसाद ग्रहण कैना करजाइठ । कार्तिक ७ गते देवी विसर्जनके साइत सकारे १० बजके ३७ मिनेटमे रहल समिति जनैले बा । टीका प्रसाद ग्रहणके लाग साइत खोजुइयाके लाग भर ११ बजके २ मिनेटके साइत उत्तम बा । विजयादशमीसे कोजाग्रत पूर्णिमासम देवीके प्रसाद लगैना चलन बा ।

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