थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १५ कुँवार २६४३, बिफे ]
[ वि.सं १५ आश्विन २०७७, बिहीबार ]
[ 01 Oct 2020, Thursday ]

बच्चन्के टिहुवार ‘गुरही’

पहुरा | ११ श्रावण २०७७, आईतवार
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बच्चन्के टिहुवार ‘गुरही’

भूमिकाः

संस्कृटि हरेक समुडायके आपन मौलिक पहिचान हो । पहिचान, कौनो फेन जाटके आपन कला, संस्कृटि ओ भासासे जोडल रहठ् । थारू समुडायमे फेन अस्टे ढेर संस्कृटि रहल बा । जौन अब्बे ढेउरहस् लोप हुइना अवस्ठामे बा । बँचल कुछ संस्कृटि बाह्य संस्कृटिके प्रभावमे बा । अब्बे उ संस्कृटिक मौलिकटा उपर फेन प्रस्न उठ्टि आइल बा । यिहेओरसे थारू समुडायके द्विविढामे रहटि आइल बा । ओ, आ–आपने मेरके टर्क विटर्कसे समाज भिट्रे अन्यौलके स्ठिटि सिर्जना हुइल यठार्ठ फेन हमार ठन बा । ओम्हेंसे थारू समुडायके एक महट्वपूर्न टिउहार ‘गुरहि’ फेन हो ।

का हो गुरहि ?

‘गुरहि’ थारू समुडायके एक बाल पर्व हो ओ यिहिहे ढेउरजाने खाँज–खुज्लि फेक्ना पर्वके रुपमे फेन लेठाँ । यि पर्व सावन महिनाके ओजरिया (शुक्ल पक्ष)के पञ्चमीके डिन परठ् । यिहे डिन हिन्दूनके नामपञ्चमि परठ् ओ अवधी समुडायके गुडिया पर्व फेन परठ् । उहे कारनसे ‘गुरहि’ ओ नागपञ्चमि अक्के हो कना ढेउर मनैनके बुझाइ रहल बा । मने यि संयोग किल हो वास्टविकटा नै हो । थारू समुडायके ‘गुरहि’ पर्वके अपने सामाजिक मुल्य ओ मान्यटा बा कलेसे नागपञ्चमिके आपन बा । नागपञ्चमीमे साप ओ बिख्खार किरानके पूजा कैजाइठ् मने गुरहिमे न सापनके पूजा हुइठ् न टे कौनो बिख्खार बिच्छि, गोजरके । यि डुनु पर्वके मुल्य–मान्यटा ओ लोक बुझाइ फेन अलग अलग रहल ओरसे यि अलग–अलग पर्व हो कना बाट बुझ्न जरुरि रहल बा ।

थारू समुडाय प्रकृटि पुजक अठवा प्राकृट ढरम समूह भिट्टरके एक जाट हो । प्रकृटि प्रटिविश्वास कैना समुडाय रहल ओरसे प्राकृट ढरम हि थारू जाटिनके पुरान ढरम हो कना बाट ढेर इटिहासकार उल्लेख कैले बटाँ । मने पाछेक समयमे हिन्दू ढरमके प्रभावसे आपनहे हिन्दू रहल डाबि करुइयनके संख्या फेन बा । उहे कारनसे कुछ हिन्दू ढरमके पौरानिक मान्यटा फेन थारू समुडायमे अनुसरन हुइटि आइल बा । यि स्वभाविक प्रकृया फेन हो । खस्मोर्वा बैठाइ फेन कारन हो । उहेसे एक औरेक ढरम, आस्ठा ओ संस्कृटिप्रटि सड्भाव ओ समान व्यवहारके कारन अन्य समुडायके सांस्कृटिक प्रभावसे कुछ संस्कृटि थारू समुडायके लाग आपने मौलिक होसेकल बा ।

‘गुरहि पर्व एक गुरहि (नेपाली भासामे गाइने किरा) से जोडल बा । गुरहि एक उड्ना किरा हो । यि मच्छर, भुस्का लगायट छोट–छोट किराहे खैठाँ । यइनके संरच्छनसे मच्छर (लामखुट्टे) ओ भुस्का लगायट किरानमे कमि हुइना रोग–विरोख कम लाग्न बैज्ञानिक ढारना बा ओ यिहे किरानके पूजासे टमान मेकरे रोग–विरोख कम हुइना जनविश्वास थारू समुडायमे रहल बा ।

लोक–मान्यटाः

गुरहि पर्वसे सम्बन्ढि एक लोक बट्कोहि बा । टबक जवानामे नरकमे मेरमेरिक किरानके संख्या बर्हल ओ रोग फेन फैलल् । रोगके कारन मनैनके अकालमे मौट हुइ लागल । मनैं मुँवट डेख्के स्वर्गलोकके डेउटा फेन अचम्म पर गैलाँ ओ यि बाट बुझक लाग एक लवन्डिहे नरकलोक (पिर्ठमी) मे पठैलाँ । ओ, उ लवँरिया एक साढारन परिवार जलम लेहल् । ओकर बाल्यकाल बहुट सुखसे बिटल । परियारमे सक्कु जाने मजा मानिट । मने, ओकर भौजि कब्बो निक नै मन्ना उहेहे डेखके सहे नै सेक्ना, बहुट डुःख डिस् । विचारि उ सहके बैठे ।

उ छोट–छोट लर्कन संगै खोब खेल्न मन पराए ओ खेले । उहिहे लर्का फेन बहुठ निक मानिट । लर्कनसंगे उ चिर्कुट्टि–चिर्कुट्टा लग्रक गुरहि खोब मन पराए । मने, ओकर गुरहि डेखके ओकर भौजि सहे नै सेक्ना ओ गुरहि कबु नुका डेना कबु फेका डेना करिस् । अइसिक करेबर उ बहुट डुःख माने । मुले उ कुछ कहे नै सेके । उ भौजिक डरसे कबु डेहरिक गोराटिर नुकाए, कबु घरक कोनुवामे । अइसिक नुकैलेसे फेन भौजी फेंकाडिस् । एक डिन आपन खेलौना गुरहिहस् किरनके उट्पट्टि कराइल् । जब गुरहि हावामे उडे लग्लाँ टब उ ओट्रा सुग्घर सुग्घर डेख्के बहुट फोंहाइल् । ओकर बाल सखि–सहेलिन फेन कुडुक कुडुक खेले लग्लाँ । उहे गुरहि मच्छर, भुस्का लगायट छोट–छोट किरनहे खाइ ओ मारे लग्लाँ । जिहिसे मच्छर, भुस्काके प्रकोप फेन कम हुइल हो ओ रोग–विरोख फेन कम हुइल ।

यहोर मनैनके फेन अकालमे मौट नै हुइलग्लिन । यहोंर जब मनैं चयन खाइ, पिए, सुटे लग्लाँ । आब उ लवन्डिहे फेनसे स्वर्गलोक जाइ पर्ना हुइलिस् । संगे उठ बैठसे ओकर बालसखा लोग उहिसे मोहिट होसेकल रहिँट । उहसे उहिहे कौनो हालटमे नै जाइडेब कैके रोके छेंके लग्लाँ । लकिन केक्रो कुछ नै लागल् । उहिहे जैहि पर्ना हुइल ओरसे कोइ फेन रोके नै सेकल् ।

फाइल फाेटु

टब यहोंर ओकर सखिया–गोहियन मेरमेरिक गुरहि ओ डगरामे भुख लग्लेसे खाइक लाग चना लगायटके खैना चिज डेके बाजा सहिट बिडाइ करे जैठाँ । यहोंर ओकर भौजि आपन छावइहे ओकर गुरहि अँछोरके बगाइ कैह्के सिखाके पठैले रठिस् । सक्कु सखिन लावा लावा झुलवा घालके चानक कोंहरिक पहुरा लेके गाउँक सिवानासम पठाइ जैठाँ । जब कोंहरि ओ चिर्कुटिक गुरहि–गुरहा डेके बिडाइ करे लग्ठाँ टब्बहें ओजिक छावन अँछोरके बगैना ओ सोंटाले पिटे लागल टे उहे कोंहरि डेके पठैला ओ गुरहिहे गाउँसे बिडा कैलाँ ।

घर छोरके जाइबेर उ आपन घरक डेहरिक गोराटिर ढैल गुरहि सम्झ । टब डाइहे डेहरि टिर ढइल् गुरहि मजासे ढैडेहो, मजासे सहेर डेहो कैह्के गिट गइटि असिक कहठ्:

दाङ बोले टिम्कि, महदेवा बोले ढोल
डेहरिक गोरटिर ढइल बा मोर गुरहि ।

ओत्र किल नै हो, स्वर्गलोक जाइबेर उ ढेर ठाउँ बिसैंटि जाइठ् । अमली, असना, गुलरिक रुखुवा टिर बैठ्के आपन विरह असिक पोठ्:

दाङ बोले टिम्कि, महदेवा बोले ढोल
अमलिक रुखवाटिर बैठहिं मोर गुरहि ।
दाङ बोले टिम्कि, महदेवा बोले ढोल
असनक रुखवाटिर बैठहिं मोर गुरहि ।
दाङ बोले टिम्कि, महदेवा बोले ढोल
गुलरिक रुखवाटिर बैठहिं मोर गुरहि ।

अइसिक भूख, प्यास, डुःख कस्ट झेल्टि उ स्वर्गलोकमे हाजिर हुइल् । यहोंर उहे लवन्डि गुरहिक सम्झनामे यि गुरहि मनैन चलन चलल् हो ।

सामाढामाः

गुरहिमे आपन चेलिबेटि नाटनट्कुरनहे नेउट जाइठ् । नाट–पाँट अइलेसे थारू घरेक खानपिनके सामाढामा कैना पुरान चलन हो । बिहान्नि सुवर मर्ना लगाके काम आउर आउर टिउहारके नन्हे गुरहिमे फेन सामाढामा हुइल रहठ् । पहिलक जवानामे लुगरा फाटा कम रहे उहसे मुस्किलसे एक जोर जरावर मिले । घरक सक्हुनके लग नै पुगाइ सेक्लेसे फेन लर्कन लग भर सिवइहि पर्ना रहे । गुरहि अस्राइ जाइबेर लावा लावा लुगरा घालके जैना हुइलक ओरसे लर्कनके फेन लावा जरावरके अस्रा रहिन् ओ घरक गघुरिक बाढ्यटा फेन रहे । ओस्टक लर्कन लुग्रा सिलक उबेनु चिर्कुटिक गुरहि–गुरहा बनैना, लवन्डन लग रारा खरह्के सोंटा । सोंटा बनाइक लग लाल–काइल रंग ओ मूँज अठवा पूँज । चानक घुघरि (कोंहरि) चाना नै रहले डलहन बालि बर्का केराउ, भट्ठर निढ्ना, भुज्ना । पछिल्का समयमे भूजा फेन बिकल्पके रुपमा डेखा परल् बा । उहेसे भूजा भुज्ना । ओस्टके गुरहि उठैना नुइयाँ, सुपलि टठिया फेन चाहठ् ।

कैसिक मनाजाइठ् गुरहि ?

ओजरिक चौठा डिन चौकिडरवा गाउँमे हाँक परठ । ‘घुघरि भिजाउ रे ! घुघरि भिजाउ’ । गाउँक सक्कु जाने सन्झा चानक घुघरि (कोंहरि, चानक एक विशेष प्रकारके परिकार) भिजैठाँ । दोसर डिन पञ्चमीक रोज सन्झा चाना निढ्ठाँ ओ गाउँक सक्कु घरके छोट–छोट लर्का बिसेस लवन्डिन चिर्कुटिक टुक्रक गुरहि, चानक घुघरि चाना नै रलेसे केराउ अठवा डलहन बालिके कोंहरी (घुघरि) ओ लवन्डन भर सोँटा (कोंर्रा) लेके टयार हुइठाँ । सोँटा रारा (काँस)के एक फुल्रा अठवा डुइ फुल्रावाला रहठ् । यहोंर गाउँभरिक सक्कु लर्कानहे खोब जोग्निहस् सँपरैठाँ ।

साँझके गाउँके चौकिडरवा हाँक पारठ । ‘अरे ! गुरहि अस्राइ चलो रे, गुरहि अस्राइु टब गाउँक लर्कानहे लेले लर्कनके डाइ, डाइ नै अइलेसे डिडि, फुइनके संगे लेके निकर्ठा । सक्कु जाने घर–घरसे नुइया, टठियामे गुरहि ओ घुघरि बहुट मजासे सेंरह–मेंरहके निक्रठाँ । जब यहोंर गुरहि अस्राइ निक्रठाँ टब गाउँक सक्कु घरक मल्किनियँन, गघुनियँन या भन्सरियन टठिया ओ सुप्पा ठटैटि ‘खाँज खुजलि सक्कु लैजा, रोग बिरोख सक्कु लैजाु कहटि घरक भिट्टरसे निक्रठाँ ओ डगरसम गुरहिसंगे रोग–विरोख पठाइ अइठाँ । ओ पिर्ठमिलोक (पृथ्वी) छोरके स्वर्गलोक जाँइबर उ गुरहिसे पोखल विरहके भाव फेन गइठाँ:

दाङ बोले टिम्कि महदेवा बोले ढोल,
अमलिक रुखवाटिर बैठहिं मोर गुरहि ।

जब गौर्हि (गाउँभरके गोरु जम्मा हुइना ठाउँ)मे गाउँ भरिक लवन्डा–लवन्डिन अठवा कन्या लवन्डिन जम्मा हुइठाँ । टब गाउँके पन्हेरवा एकठो निसाना गारठ् । ओकर एक पाँजर सक्कु लवन्डन पट्निक पटानके ठ¥याइठाँ । यहोर लवन्डिन नुइया, टठियामे लानल् गुरहि ओट्ठँहे फकैठाँ ओ लवन्डन उहे गुरहिहे सोंटासे ठठैटि ‘डे घुघरि, डे घुघरि’ कहठाँ । ओकरपाछे घुघरि मागे लग्ठाँ । छोट–छोट बाबुनके आपन डाइ, डिडिनके सहयोगमे सक्भर ढेरजनहनहे पुग्नामेरके घुघरि बाँट्ठाँ ओ बाँट्टि गाउँके मरुवा (भुइह्यारठान) मे जैठाँ । उहाँँ गाउँक ग्राम डेउटनहे प्रसाड चर्हाके मरुवाक छाप्रक उप्पर छिट्ठाँ । ओ घुघरिमे डुब्बा मिलैठाँ । असिके डब्बा मिलाइल घुघरि खैनायोग्य नै हुइठ् ओ बाँट्ना काम फेन ओराइठ् । ओ सक्कु जाने आपन आपन घर अइठाँ । घर आके फेन आपन घरक उप्पर, अनाज ढैना ढनसार ओ बारिमे लगाइल टिनाटावनमे छिट्ठाँ । अइसिक करलेसे घरेम भूटप्रेट नै अइना, रोग–विरोख ओ खाँज–खुजलि नै लग्ना, बखारिमे बरकट अइना, बारिके टिनाटावन फर्ना थारू समुडायमे जनविश्वास रहल बा ।

ओस्टके लवन्डनसे ठटाइ लैगइल सोंटा कोइ फेन नाइ डेख्ना मेरके नुकाके अठवा चोराके नान्जाइठ् । उ नानके टिनहाँ बारिमे बाँढ जाइठ् । अइसिक करलेसे किरा फटिंगा नै लग्ना ओ फल फेन मजा लग्ना बाट थारू समुडायमे सामाजिक ढारना रहल बा । ओस्टके उहे सोंटाहे ढूप लगाके घोटके घाउ, खट्रामे लगैलेसे चोखैना, पेट बट्ठि ओ जुरि आइलेसे फेन यि बिरुवक रुपमे काम लग्ना जानकारलोग बटैठाँ । अइसिक गुरहि पर्व विढिवट् ओराजाइठ् ।

यि खास कैके छोट–छोट लर्कनके पर्व हो अठवा कन्या लवन्डि सहिटके पर्व हो । यि पर्वहे भाटृट्वप्रेमके पर्व फेन मानजाइठ् । घुघरि बँट्ना जौन चलन बा । यि एक डोसरमे भावनात्मक सम्बन्ढ जोरठ ओ आत्मविस्वास पैडा करठ् । ओट्रे किल नै यि टिउहारमे आपन चेलिबेटि, नाटनट्कुर फेन नेउँट जैना हुइलक ओरसे आट्मियटा बर्हठ् । कलेसे खेटिमाटि कैलक जिउ, हिलाकिचाके कारन अँगेम् खाँज–खुजलि ओ आपन अन्नबालि फेन सप्रना जौन सामाजिक ढारना बा यिहिसे फेन यकर महिमा बर्हके आइल् बा ।

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आवश्यकता !आवश्यकता ! !आवश्यकता ! ! !

आवश्यकता !आवश्यकता ! !आवश्यकता ! ! !सुदुरपश्चिममा स्थापना भई हाल प्रसारणमा रहेको नेपालको पहिलो थारु टेलिभिजन प्रा. लि. को लागी तपसिल वमोजिमको पदहरु सेवा करार प्रक्रियावाट पदपुर्ति गर्नुपर्ने भएकोले ईच्छुक नेपाली नागरीकले यो पहिलो पटक सुचना प्रकासित भएको मितिले १५ (पन्ध्र) दिन भित्र Online Form मा शैक्षिक योग्यता तथा अनुभव सम्वन्धी प्रमाणपत्र upload गरी निम्न email ठेगानामा पेश गर्नुहुन् सुचित गरिन्छ ।

नोट:

  • उम्मेदवारले यो सूचना प्रकासित भएको मिति देखि १५ दिन भित्र शैक्षिक योग्यता, तालिम, अनुभव पत्र, नेपालि नागरिकताको प्रमाण पत्र scan गरि PDF format मा यस कार्यालयको EMAIL ठेगानामा  पठाउनु पर्नेछ।
  • तोकिएको मिति भन्दा ढिला प्राप्त भएका निबेदनहरु छनौट प्रक्रियामा समाबेश गरिने छैन।
  • छनौट प्रक्रियामा परेका आवेदकहरुलाइ आवेदकको उपलब्ध गराएको मोबाईल न. तथा ईमेल मार्फत जानकारी गराइनेछ।
  • सेवा सुविधा कार्यालयको नियमानुसार हुनेछ।
  • Short Listing मा छनौट भएकालाई मात्र अन्य प्रक्रियामा सहभागी गराइनेछ।
  • उम्मेदवारले आफुले भरेको पद अनुसारको दस्तुर नेपाल बैंक लिमिटेड धनगढी शाखामा रहेको थारू टेलिभिजन प्रा. लि. (Tharu Television Pvt. Ltd.)  को खाता न. 13700106782606000001 मा जम्मा गरि भौचर सहितको नम्बर र भौचरको फोटो email गर्नु पर्नेछ।

 

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