थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०१ जेठ २६५०, शुक्कर ]
[ वि.सं १ जेष्ठ २०८३, शुक्रबार ]
[ 15 May 2026, Friday ]

विचार

नारीवादी दृष्टिकोणके आधारम बुढनी उपन्यासके विश्लेषण

नारीवादी दृष्टिकोणके आधारम बुढनी उपन्यासके विश्लेषण

लेखसार यि अध्ययनम इन्दु थारूद्वारा लिखल बुढनी उपन्यासके नारीवादी मूल्य, मान्यता र दृष्टिकोणके आधारम विश्लेषण कैगिल बा । यी अध्ययनम पुस्तकालय विधिके प्रयोग कैक गुणात्मक प्रकृतिके वर्णनात्मक ओ संश्लेषणात्मक ढाँचामा कैगिल बा ।
लाल आयोग प्रतिवेदन सार्वजनिकः शुभ साइत कहिया ?

लाल आयोग प्रतिवेदन सार्वजनिकः शुभ साइत कहिया ?

इहे चैत १३ से १५ गतेसम टीकापुरमे टीकापुर साहित्य महोत्सवके टिस्रा संस्करन हुइल । ‘साहित्यमार्फत् सामाजिक सद्भाव’ मुल नारा रहल अप्सरिक महोत्सव इ कारन खास रहे कि एक डिनके पुरा कार्यक्रम थारु साहित्य, संस्कृति विसेस रहे । ७ ठो सेसनमे
जोहारी वकिल साप, आब कबु नाइ बजि ‘डिजे’

जोहारी वकिल साप, आब कबु नाइ बजि ‘डिजे’

‘बाबा टैं का करटे ?’‘कुछ नाई, अस्टे बैठल बाटुँ, टीका भाइसे बट्वाइटु’ मै छावाहे जवाफ डेनु ।‘जोहारीक बारेम कुछ पटा पैलेबाटे ?’‘नाइ टो’ मै कनु ।‘बरा गरु बाटैं कना बाट आइटा । पंकज फोन कर्ले रहे, अस्पतालमेबाटैं हुँ ।’पंकज मोर भान्जा, वकिल
जोहारी वकिलः थारु समाज ओ अधिकारके सवाल

जोहारी वकिलः थारु समाज ओ अधिकारके सवाल

सामाजिक सन्जाल आज्कल सुचनाके बरवार माध्यम बनल बा । इहे क्रममे २०८२ पुस ६ गते वकिल जोहारीलाल चौधरीके असमायिक निधनके खबर सामाजिक सन्जालसे मिलल् । इ खबरले मन मुर्झा गइल । काजे कि उहाँसे हम्रे संग्संग्हिक रहि । महिसे केवल एक बरसले
वकिल सापके ठैली बिठ्कोरेबेर

वकिल सापके ठैली बिठ्कोरेबेर

वकिल साप जोहारीलाल चौधरीसे मोर पहिल भेंट कहिया हुइल, कहाँ हुइल । इ बात महि याद नैहो । औपचारिक परिचय नैहुइलक ओर्से हुइ सायद पहिल भेंटके सम्झ्ना याद नैरहल । जहाँ फेन कानुनी सल्लाहकार जब २०५९ साल चैत २९ से प्रकाशक दिलबहादुर चौधरी, सम्पादक
बेलौरी नगरपालिका र जेनजी : माग, भ्रम, सत्यता र सबैलाई प्रश्न

बेलौरी नगरपालिका र जेनजी : माग, भ्रम, सत्यता र सबैलाई प्रश्न

हालै नेपालमा २०८२ भाद्र २३ र २४ गते भएको जेनजी आन्दोलनका बारेमा सम्पूर्णसबै लाई सर्बबिधितै छ । यसै आन्दोलन बाट बेलौरी नगरपालिका समेत अछुतो रहन सकेन  । मेरो बुझाईमा जेनजी समूहको थुप्रै माग मध्ये प्रमुख दुई वटा माग रहेको पाएको
अनुभूति, अनुभव ओ सन्देश

अनुभूति, अनुभव ओ सन्देश

एक महिना आगे एकजाने १७ वर्षके किशोरीहे आफन्त मनोविमर्शके लाग लेके अइलैं । किशोरी एकडम निराश ओ कमजोर आत्मविश्वासके अवस्थामे रहि । मै एकान्तमे सुरक्षित वातावरण निर्माण कैके बाट करे लग्नु, उहाँक बाटमे अनुभूतिपुर्वक सुन्नु ओ कौनो
थारु समुदायके अटवारीः कहिया ओ कैसिक

थारु समुदायके अटवारीः कहिया ओ कैसिक

अटवारी, थारू समुदायके महान् चाड माघ पाछेक दोसर भारी पर्वके रूपमे मानजाइठ । यी पर्वमे खास कैके पुरुषहुक्रे निराहार व्रत बैठके मनैठैं । यद्यपि स्वेच्छा कोइ महिलाहुक्रे फेन व्रत बैठल पाजाइठ । दीर्घायू, सुस्वास्थ्य एवम् सुखमय जीवनके
ज्योर्तिमय अस्टिम्की पर्व ओ थारु

ज्योर्तिमय अस्टिम्की पर्व ओ थारु

हरेक जातजातिके सभ्यताके विकास सँगसँग भाषा, कला, संस्कृति, मूल्यमान्यताके विकास हुइटि गैल ओ कालान्तरम मैगर संस्कृति बन पुगल । थारु जाति कला संस्कृतिम बहुट धनी ओ सम्पन्न जातिके रुपम चिहिन्जाइठ । थारु समुदायम मनाजिना विविध चाडपर्वमध्ये
दक्षिण एसियाके आर्थिक आउर राजनीतिक किनारामे थारु किसान आउर कमैया थारु

दक्षिण एसियाके आर्थिक आउर राजनीतिक किनारामे थारु किसान आउर कमैया थारु

थारु किसान दक्षिण एसिया आउर नेपाल के इतिहासमे किसान आन्दोलनके एकथो बहुत बरवार हिस्सा ओगथ्थै। थारु पहिचान आउर राजनीतिक, आर्थिक संघर्ष आठारौं शताब्दी से सुरु हुके आजतक फेन चल्ती रहल बा। नेपाल जब एकथो बरवार नेपालमे एक नइ हुइल रहे तब