थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १७ अगहन २६४६, शनिच्चर ]
[ वि.सं १७ मंसिर २०७९, शनिबार ]
[ 03 Dec 2022, Saturday ]
‘ पोष्टा समीक्षा ’

थारू मन्टरके दस्तावेज

पहुरा | २० असार २०७७, शनिबार
थारू मन्टरके दस्तावेज

                ‘थारू गुर्वाः परम्परागत उपचार प्रणाली’ नाउँके किताब हालसाले आदिवासी जनजाति उत्थान राष्ट्रिय प्रतिष्ठान प्रकाशन कर्ले बा ।  कृष्णराज सर्वहारी गुरुवन्के विविध पक्षके अनुसन्धान कैके अनुसन्धानमे पैलक तथ्यहे विश्लेषण कैके यी किताब लिख्लक् हुइट ।

                प्रस्तुत किताब पढ्ना लिरौसी बनाइकलाग कुल चार खाँरामे बाँटगैल बा । पहिल खाँरामे अध्ययन परिचय डेगैल बा, जेम्ने उद्देश्य, सीमा, क्षेत्र अध्ययन विधि डेहल बा । डुस्रा खाँरामे गुरुवन्के राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक महत्वके साथसाथे व्यक्तिगत ओ सामूहिक पूजापाठके बारेम जानकारी करागैल बा । अस्टके टिस्रा खाँरामे गुरुवन्के वर्तमान अवस्था केरागैल बा । यम्हे गुरुवा मन्टर ज्ञान, मन्टरके विशेषता, गुरुवन्के जडिबुटी ज्ञान, गुरुवाई ज्ञान लोप हुइना कारण उँक्रैना प्रयास कैगैल बा । यी खाँरामे गुरुवन्के मन्टरमे कट्ना शक्ति रठिन कना बाट जोरदार रुपमे प्रमाणित कैना कोशिक कैलेवटाँ लेखक । गुरुवक मन्टरसे पशपन्छीके रोग उपचारसे हैजा जैसिन महामारिहे फेन रोक्ना तागत रहठ, अस्टके लरका रुइना, कपार बठैना, जुरी अइना, साँप विच्छी, गोजर कट्लकमे फुकफाक कैके ठिक कैना शक्ति थारू गुरुवन्के मन्टरमे रहठ कना डेखागैल बा ।

                यी पोस्टाके सबसे बरा विशेषता कलक थारून्के उत्पत्तिकालसे आजसम थारू गुरुवन्मे रलक मन्टर ज्ञानके खोजी कैके कुल मिलाके एक सय एक्काईस ठो मन्टरहे लिखित दस्तावेजीकरण कैगैल बा । पोस्टामे पुरुव सुनसरी, मोरङसे लेके रुपन्देही, दाङ देउखर, कैलाली, कञ्चनपुर क्षेत्रमे प्रचलित मन्टरहे समोटगैल बा । तुलनात्मक हिसाबसे पश्चिउहा मन्टर ढेर बा ।

                राना थारूबाहेक अन्य थारू समुदायमे अक्केठो फे जन्नी गुरुवा नैरना पितृसत्तात्मक सोच यहाँ फेन हावी रलक यी अध्ययन डेखैले बा । थारू समुदायमे अभिनसम गुरुवा उपर विश्वास करुइया मनैन्के संख्या कम नैरलक बाट लेखक अंग्रयैले बटाँ । रोचक बाट गैरथारू फेन थारू मन्टर ओ बैदवा ज्ञानमे विश्वास कैलक अध्ययन डेखैले बा । यहाँ टक कि विदेशमे वैठल थारू बुद्धिजीवी फेन थारू गुरुवन उपर भारी विश्वास कैलक अध्ययन डेखैले बा । 

                लेखक चौठा खाँरा उपसंहारमे थारू गुरुवा ज्ञान संरक्षणके लग अइना डिनमे चाले पर्ना कदमके बारेम कुछ उपाय, मार्गनिर्देश सुझैले बटाँ । ओस्टक अनुभव÷अवलोकनहे फेन चार खाँरामे बाँटगैल बा । प्रत्यक्ष गाउँमे जाके गुरुवन्के मेरमेरिक क्रियाकलाप जस्टे गुरै अवलोकन, असारी पूजा, आछट पाटी, खेरहन्वा बन्ढलक, बैडवा उपचार कैलक गतिविधिके शुरुवातसे अन्तसमके विधि ओ प्रकृया प्रत्यक्ष अवलोकन कैके लिपिवद्ध कैके दुरुस्त ढैल बा । यी घटना अध्ययनहे विश्वनिय ओ रोचक बनैले बा । ओस्टक अन्तमे कर्रा शब्दके पारिभाषिक शव्दावलीके अर्थ ओ अनुसन्धान करेबेरिक फोटु समावेश कैके पोस्टाहे थप गुदगर बनागैल बा ।

यी किताब अनुसन्धानके दस्ताबेज हुइलक ओरसे पाठकके अपेक्षा कुछ ढेर हुईना स्वभाविक हो । अगिल्का खण्ड पढलेसे सन्दर्भ सामग्रीक कुछ कम हुइल महसुस हुईठ । गुरुवन्के वर्तमान आर्थिक, सामाजिक ओ सांस्कृतिक अवस्था खास कैके तथ्यांक आइट टे यी किताब आउर गुदगर हुइना रहे । करिब ३ महिना एकठो गुरुवक दिनचर्या अध्ययन कैल डेखा गैल बा लेकिन उ गुरुवा कौन कौन काममे सफलता पाइल ? यी प्रश्नके उत्तर अनुत्तरित बा । गुरुवक दिनचर्या केवल धार्मिक ओ सांस्कृतिक काममे किल सीमित विल्गठिस । यी किताब अभिन गुरुवन्के विषयमे गहिँर अध्ययन कैना जरुरी बा कना डेखैले बा ।

यी किताबमे आबक ३५ से ४० बरस भिट्टर चितवन, देउखरमे गुरुवा पुरे लोप हुईना खतरा रलक अंग्¥यागैल बा । पक्के फेन यी गम्भीर विषय हो । थारून्के पहिचानसे जोरल गुरुवा प्रथा बचैना काममे एकचो सक्कु सरोकारवाला लग्हीपर्ना जरुरी डेखैले बा यी किताब । हेरैटी गैलक थारून्के लोक संस्कृति जोगैनामे यी किताब अहम् भूमिका खेली कनामे दुइ मत नै हुइ ।

लेखकः शत्रुघन चाैधरी

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