थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत २२ अगहन २६४६, बिफे ]
[ वि.सं २२ मंसिर २०७९, बिहीबार ]
[ 08 Dec 2022, Thursday ]
‘ कोरोना कहर ’

दलित महिला कठै ‘पेट कैसिक पल्ना ?’

पहुरा | २ भाद्र २०७७, मंगलवार
दलित महिला कठै ‘पेट कैसिक पल्ना ?’

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २ भदौ ।
‘यी बरसके धान लगौनीक बेला कोई काम नइडेलै, काम नइहुइलपाछे पैसा अइना टे बाटे नइहुइल, पैसा नइहुके भोकमरीसे मुना डर बा’ कैलालीके गोदावरी नगरपालिका–७ के ३० बरसके कल्पना नगारी कहली, ‘कामके भ्याइ नभ्याई हुइना असारमे एक सुकोके काम नइपागिल । पेट कैसिक पल्ना बहुुट चिन्ता बा ।’

ज्याला मजदुरी करके जीविकोपार्जन कैना कल्पनाहे कोई काम नइडेनाके कारण रहे, कोरोनाके संक्रमणमे परल उहाँक गोसिया । गैल वैशाख १५ गते उहाँक गोसिया टिकानारायण नगारी भारतसे
नेपाल अइलै । नेपाल पुगके कोरोना परीक्षण करेबेर संक्रमण (पोजेटिभ) डेखगिल । ५० दिनके क्वारेन्टिन बैठाईपाछे टिकानारायण अपन घर पुग्लै । घर पुग्केफे परिवार, छिमेकी कोई लग्गे नइगिलै । अर्थात फेर ७ दिन घारीक ‘होम क्वारेन्टिन’मे बैठलपाछे केल घरेम पेलै ।

कल्पनाके अपन घर नइहो, बैठक लाग बहुरिया एक ठो कोठा डेले बाटिन, ओइने सक्कु उहे कोठामे बैठै । २०७६ पुसमे ससूइया बिटली, भारतमे मजदुरी कैना टिकानारायण डाइक किरिया करे नेपाल अइलै । लौटके भारत जैना मन टे नइरहे । स्वदेशमे ज्याला मजदुरी करके परिवार पल्ना सोच बनैले रहिट मने डाइक किरिया करेक लाग लेहल साहुके कर्जा चुक्ता कैना उहाँ बाध्यहुके फेर भारत जाई परल ।

भारत पुगके काम फे पैलै । मने काम पाइल २२ दिनमे कोरोना महामारीके कारण भारतमे बन्दाबन्दी सुरु हुइल, करटी रहल काम बन्द हुइल । बन्दाबन्दीपाछे और काम नइपागिल । बाँचेक लाग संघरीयाभैयनसे ऋण निकरलै । ऋणउप्पर ऋण ठपेबेर टिकानारायणहे तनावफे ठप्टी गैलै । अन्ततः ज्यानहे जोखिममे धारके उहाँ घर लौटल रहिट ।

‘आज खैना जुटैली, काल्ह का खैना चिन्ता रहठ । सम्झेबेर बेहोस हुइठु जैसिन लागठ । साहुके ऋण बढल के बढल बा’ कल्पना ठप्ली, ‘अइसिन बेलामे असारमे रोपाइँ शुरु हुके काम पाजाई कहिके टे झन् कोई काम नइडेलै, तोर गोसियाहे कोरोना बा, टुहिफे सरल हुई, खेतुवामे संगे काम करे परठ, हम्रे टे संगे काम नइकरब कहलै ।’

सरकार भदौसे स्कुल खोल्न कहल सुनके कल्पना ओ टिकानारायणहे ठप तनाव बा, साहुके ऋण ३० हजार नाघसेकल, छावाछाईक किताब कापी किने नइसेकल हो ।

महामारीके बीच परदेशसे जैसिक टैसिक ज्यान जोगाके टिकानारायण घर टै लौटलै मने उहाँसंगे खुशी नइलौटल । तोर बाबाहे कोरोना बा, हम्रहिनहे सरी, उहोर जाउ’ कहटी छावाछाइहेफे छिमेकी ओ आफन्तके हेला ओ अपमान सहलै ।

उहे टोलके ४० बरसके कलावती आउजीके दुःख फे कम नइहो । गोसिया विटल ९ वर्ष हुइल, सम्पतिके नाउँमे दुई कठ्ठा ऐलानी जमिन बा, छुटकी छावाहे मुटुके रोग बा । जेनतेन करके तीन छावा हुरकैटी रहिट, अपने विधवा रहल उहाँ बरकी पटुहियक सेन्डुर अपने आघे उजरल डेखे पैली । बरकी पटुहिया ओ नटिया पटियनहे स्याहरटी बाटी । मन्झला छावक कमाईसे जेनतेन खर्च धन्टी रहल कलावती पिडा सुनैठी ।

दीपक रोगजारीके शिलशिलामे भारतमे बैठिट । ४ हजार रुप्या भाडा टिरके बम्बैसे गैल जेठ ३० गते नेपाल लौटलै । नेपाल पुग्टीकी डाईहे फोन करलै । कलावती कहली, ‘गोजीमे पैसा नइहुइलेसेफे छावा सकुशल पुगल बा कहिके सोच्नु, बहुट खुशी हुइनु, मने दिपक हत्तपत्त अपने तीन दिनसे भुखे रहल बटाइलपाछे फोनमे रुई लग्नु मै । उहीहे धारल क्वारेन्टिनमे पुग्नु, भेटे नइडेगिल, बहुट मन दुखल ।’

नेपाल पुगल दिपकहे कोरोना पोजेटिभ डेखगिल, लक्षण नइविल्गाइल कारण ३५ दिन क्वारेन्टिमे धारगिल, दुःखीहे दुःख नइछोरठ । उहाँफे ओस्टे दुःख ओ अपमान झेल्लै उहाँ । कथित दलित जाती हुइलक कारण क्वारेन्टिमे टे झन् जातिय विभेदफे भोग्लै । घर आके एक अठुवार उहाँफे घारीक क्वारेन्टिनमे बैठलै । ‘उहाँसे निकरे नइपैटी आफन्त ओ छिमेकीके छिछी ओ दूरदूर सहे परल दिपक सुनैलै ।

गोदावरी नगरपलिकाके पारालिगलके संयोजक कौशिला विक गोदावरी नगरपालिकाके दलित
बस्ती कोरोनाके उच्च जोखिममे रहल बटैली । उ बस्तीमे कोरोनाके कारण बेरोजगारी बढ्नाके साथे आर्थिक संकटके कारण भोकमरी हुइना जैसिन समस्यासे महिला हिंसाके घटनामे बृद्धि हुइल बटैली ।

गोदावरी नगरपालिकाके उपप्रमुख रत्न कडायत अत्तरिया ‘ट्रान्जित प्वाइन्ट’ रहल ओरसे यी नगरपालिका कोरोनाके उच्च जोखिम रहल बटैली । उपप्रमुख कडायत अति विपन्न परिवार, दलित, महिला तथा सिमान्तकृत समुदायके लाग आर्थिक वर्ष २०७७/०७८ के नीति तथा कार्यक्रम अन्तरगत ओइनहे रोजगारमूलक कार्यमे खटैना बटैली ।

अति न्यून आर्थिक अवस्था रहल व्यक्तिहुकनहे कृषिमे अनुदान डेना, पुरान सीप हस्तकला प्रवद्र्धनके लाग सहयोग कैना, आयआर्जनओर उन्मुख करैना नगरपालिके योजना रहल उप–प्रमुख कडायत बटैली ।

बन्दाबन्दीमे दलित महिला ओ सीमान्तकृत समुदायहे राहत वितरणमे जुटल अधिकारकर्मी एवम् दलित महिला अधिकार मञ्च (डीडब्लूआरएफ) नेपालके अध्यक्ष सावित्रा घिमिरे बटैली । विपद्के बेला सुत्केरी तथा गर्भवती महिला, बालबालिका, महिला, दलित तथा जेष्ठ नगरिक उच्च जोखिममे पर्ना ओरसे स्थानीय सरकारसे कार्य विधि बनाके लैंगिकमैत्री बनाई पर्ना सुझाव डेली ।

जनाअवजको टिप्पणीहरू