थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत २८ सावन २६४६, शनिच्चर ]
[ वि.सं २८ श्रावण २०७९, शनिबार ]
[ 13 Aug 2022, Saturday ]

अटवारी ओ ‘भेवा’ पर्व

पहुरा | ११ भाद्र २०७७, बिहीबार
अटवारी ओ ‘भेवा’ पर्व

मै बैठक कोठामे छिरेबेर मोर बाबा ओ डाई ‘अटवारी’ के बारेमे कुछ छलफल करटि रहिट । मै ओइनके बाटचिट सुन्नु टब मही यी अटवारीके बारेमे लेख लिख्ना विचार हुइल । मै यी विषयमे ठोर–ठोर कन्फयुज रहु टबमारे मोर बाबा कुछ विचार डेलै ।

अटवारी थारु समुदायके पवित्र पर्व हो । अटवारी विशेष करके नेपालके पश्चिमी तराईमे थारू समुदायहुक्रे मनैठै । अटवारी पर्व भैया ओ बहिनीयाके लागफे मनाजाइठ। यी पुरान पीढीसे पुस्तौसे मनैटी आइल बाटै । यी वर्षमे एकदिन केल मनाजाइठ ओ जौन अँटवारके दिन परठ । अँटवारी पर्व खास करके भदौ महिनामे परठ, तिथि अनुसार कबु–कबु सावन महिनामेफे परे सेकठ । यीपर्व कृष्णजन्म अष्टिमी (अस्टिम्की) टिहुवारके दुसरा अटवारके रोज मनाजाइठ ।

‘महाभारत कथा’ मे हमार पुर्खाहुकनके विश्वासबा, हम्रे ‘महाभारत कथा’ मेफे विश्वास करठी मने हमार पुर्खाहुक्रे एक कथाबनैलै । एक दिन, पाँच पाण्डव बनवास गैलै । ओइने एक ठो छोट गाउँ भेट्टैलै ओ उहे बसोबास करे लग्लै । उहाँएक विशाल राक्षस रहे ओ राक्षसजबफे गाउँलेहुकनके धानबाली नष्ट करडेहे । उ राक्षस जिहीपाएउहीहे खाडारे ओ महिलाहुकनफे दुःख डेटी आइल रहे ।

एक दिन, पाँच पाण्डवहुक्रे खाना पकैटी रहिट की एक मनैया आइल ओ पाण्डव भाइहुकनहे कहलकि राक्षस सब चिज नष्ट कैडेहल, महिलाहुकनहे खोब दुःख डेटी रहल बा । टब भीम गाउँलेहुकनहे सहयोग करे गैलै । भीम उ राक्षससे लडाई करके मुवडेलै ओ विजय प्राप्त करलै । भीम गाउँलेहुकनके जीवन ओ महिलाके मर्यादाके संरक्षण करलै । भीमयी फे भेटैलै कि गाउँलेहुक्रे उ रक्षसके कारण ढेर दिनसे खाई नइपाके भुखे बैठल रहिट । भीम ओइनहे खैनाचिजफे डेलै ।

उ दिनसे अटवारीपर्व मनाजाइठ। काहेकी यी उत्सवमे“अटवारी“धारगिलरहे । भीम राक्षसहे जौन दिन हरैलै उ दिनफे अँटवार दिन परल रहे । उ दिनसे महिलाहुक्रे भीमहे भैयाकहिके सम्बोधन करलै । विशाल राक्षससे भीम ओइनहे बचैठै टबसे महिला दिदीबाहिनीया डाडुभैया कहिके सोच्ठै, थारु भाषामे भैयाहे “भेवा“कहिके चिन्ठै, जौन हमार पुर्खाहुक्रे विश्वास करके अँटवारी पर्वके कहानी बनैलै मने मै यीबारे अनविज्ञ बाटु ।

अटवारी पर्वमे थारुमनै मुरगा बोल्नासे पहिले शनिच्चरके रात १ से ४ बजेभिटरे उठठै । ओ ओइने खाइक लाग टमान परिकार पकैठै ।उहीहे दर “भिन्सार्य) खैना कठै । यदि ओइने मुरगा बोल्नासे पाछे खैलेसे नइमजा हुइठ यनिकी ओइने डुठेहरु हुजैठै । जुठो (डुठेहरु) हुइल ओइने अटवारीके ब्रत बैठे नइपैठै ।

दुसर दिन अँटवारके रोज अटवारी पर्व थारुमनै ओ जन्नीमनै रहै । विशेष करके यी पर्वमे पानी समेट नइखाके निराहर ब्रत बैठके साँझके केल ब्रत खोललपाछे बरिया, खुर्मा, अन्डिक रोटी, फलफूल, दही, दूध, मिठाइ, मह और टमान ढेर चिज मने नोन बिना सूर्यास्तसे पहिले खाइ परठ, ओ सूर्यास्तपाछे पानीफे पिए नइमिल्न चलन बा । खैनासे पहिले भेवाके पुजा कैनाचलनबा । ओ एक भाग दिदीबहिनीहुकनके नाउँसे निकारजाइठ ।

दुसर रोज सोम्मारके सकारे ओइने भात लगायत ११ मेरिक स्वाडिस्ट टिना पकैठै, चाउरसे बनल फुलौरी, खरिया, सिद्ध्रा, केराउगुडा, पोइक टिना पकाजाइठ । खैना आघे ओइने अपन दिदीबहिनीहुकनके लाग सक्कु खाना अलग निकरके टबकेल खैठै उहीहे ‘फरार’कहिजाइठ।
पहिल ओ दुसरदिनके भैयक काँढल खैना चिज दिदीबहिनीयहुकन उपहार स्वरूप डेजाइठ । उहीहे थारु भाषामे अग्रासन कहिके चिन्जाइठ । अग्रासन (कोशेली) विशेष करके भोज हुइल दिदीबहिनीयहुकन डेना चलन बा ।

महीहे अटवारी पर्वके बारेमे ढेर पत्ता नइहो मनै मै लिख्नु ओ सोच्नु । मोर बाबा मही यकर बारेमे कुछ विचार डेलै । यी फे मोर लाग अप्थ्यारो रहे ।

मै यी चाडके बारेमे मै बहुत चीज मन परैठु, ढेर चाड पर्वमे जन्नी मनै अपन गोसियाके नम्मा जीवनकालमे लाग ब्रत बैठै चलन बा । मने थारु (पुरुष) मनै यी पर्वमे दिदीबहिनीयाके नम्मा आयूके लाग ब्रत बैठे परल ।

हँ महिलाहुक्रे अपन गोसियाके नम्मा आयूके लागब्रत बैठै, मने पुरुष भर कहे नइबैठना ? महीहे यकर जवाफ पत्ता नइहो, यदि मै गलत बाटुकी,पुरुषफे आब ब्रत बैठे परल ।

कुछदिन आघे मै गुरही पर्व सम्बन्धी एक ठो लेख लिख्ले रहु ओ ढेर जनहनहे मन परल रहे । उ लेखमे मै लिख्ले रहु की हम्रे अपन संस्कृतिओ परम्पराके संरक्षण ओ सम्बद्र्धन करे परठ । काहम्रे अपन संस्कृति संरक्षण करटी ? वा फोटु खिच्ना ओ सामाजिक संजाल (फेसबुक)मे पोष्ट कैके क्याप्शन लिख्ना“आजके दिन, आजके फोटो शूट वा थारू हुइनामे गर्व बा ।

आब, अपनेक दिमागमे प्रश्न उठे सेकी परम्परागत पोशाकके साथ फोटुमे क्लिक कैना फे संस्कृतिके संरक्षण हो ओ यी फे खराब नइहो । हो, यी फे संस्कृति ओ परम्पराके संरक्षणके तथ्य हो ओ मै यी फे नइकहम कि परम्परागत पोशाकसहित फोटु पोस्ट कैना खराब हो मने मनै संस्कृति ओ परम्पराके ज्ञान बिना पोष्ट करटी रहठै । ओइने केवल रमाईलो के लाग कुछ फोटु क्लिक करठै ओ ओइनहे संस्कृतिबारे जानकारी बिना सामाजिक संजाल (फेसबुक)मे पोस्ट करठै ।

ओइने नइजन्ठै संस्कृतिके अर्थ का हो । महीहे पत्ता बा की नइहो,संस्कृति वास्तवमे काकहे खोजल हो । मै समाजके फे एक हिस्सा हुँ । अपनेफे लागे सेकठकि मै लिखल बाट किल लिख्ठु ओ नक्कल करटु । नाही, मै कजाल करटु ओ मोर परम्परा ओ संस्कृति अपनही सुरक्षित करटु । ओ अपनेहेफे करे परठ । यदि मै गलत बटु कलेसे, मै स्पष्ट रूपमे माफी चाहटु मने यी मोर केल विचार हो ।

जनाअवजको टिप्पणीहरू