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‘ कोरोना सिखाइल लावा काम ’

लोकल मुर्गी पालनमे रमैटी अंग्रेजी मास्टर रामकुमार

पहुरा | २८ भाद्र २०७७, आईतवार
लोकल मुर्गी पालनमे रमैटी अंग्रेजी मास्टर रामकुमार

राम दहित
धनगढी, २७ भदौ ।
कोभिड–१९ महामारीसे डेस डुनिया अक्रान्त बनल बा । चीनके वुहानसे फैलल् भाइरससे सक्कु डेस डुनियाके आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक लगायत क्षेत्र टहसन हुइ पुगल बा । इहीसे नेपाल फेन अछुट नाइ रहे पाइल हो ।

कोरोनाके कारण डेस डुनियामे लकडाउन हुइल । नेपालनमे फेन गैल चैत ११ गतेसे लकडाउन हुइटी ठाउँ ठाउँ निषेधाज्ञा जारी हुइल बा । इहीसे सक्कु क्षेत्र उद्योग धन्दा कलकारखानासे लेके शैक्षिक क्षेत्र फेन बन्द होके चौपट हुइ पुगल बा । यिहे अवधीमे डेस विदेशमे कामके सिलसिलामे गैल युवाहुक्रे डेस फिरलै । तीन चार महिना लम्मा लकडाउनसे सक्कु जाने आपन घरमे बेरोजगार होके बैठलै । यहाँसमकी ढिउर युवाहुक्रे रहल रोजगार फेन कोरोनाके कारण गुमाके वेरोजगार बैठल बाटै ।

इहे चार/पाँच महिनाके अवधिमे कोरोनाके कारण कोइ काम विहिन होके फुर्सडी बनल बाटै कलेसे कोइ बेफुर्सडी । इहे बिच कोरोनासे संघर्ष करटी कोइ टमान मेरिक लावा कामके सुरुवाट फेन करसेकल बाटै ।

ओम्हेसे एक उदाहरणीय हुइटै कैलारी गाउँपालिका वडा नम्बर ५ छुटकी पलियाके रामकुमार चौधरी । पेशासे उहाँ माध्यमिक स्कूलके अंग्रेजी मास्टर हुइटै । श्री राष्ट्रिय माध्यमिक विद्यालय भुँइयाफाँटाके अंग्रेजी मास्टर रहल उहाँ अब्बे लोकल मुर्गी पालन कैके लौव कामे सुरुवाट करले बाटै । कुमाउ यूनिभर्सिटी नैतीतालसे अंग्रेजीमे स्नाकोत्तर करल उहाँ अब्बे मुर्गी पालन व्यवसाय ओर रमैटी रहल बाटै । कोरानासे सबकोइ फुुर्सडी बनल बावै । मने इ बीचमे उहाँहे भर कामसे सँपार नाइ हुइटीन् ।

स्कूल सञ्चालन रहल बेला साँझसाकार ट्यूसन ओ स्कूल क्लासके लाग चक डस्टर पक्रे पर्ना उहाँ अब्बे भर डिनराट मुर्गीनहे डानापानी, हेरचाह लगायत खोर व्यवस्थापनमे लागल रठै । व्यक्तिगत लगानीमे उहाँ अपने घर लग्गे बार्षिक ३५ हजार रुप्या भारा टिरके ७ बरसके लाग ७ कट्ठा जमिन लिजमे लेके महालक्ष्मी कृषि फार्म दर्ता कैके व्यवसायीक रुपमे लोक मुर्गी पालन सुरु करल हुइट । परम्परागत रुपमे पुखौंसे करटी आइल खेटी किसानीहे व्यवसायीक रुप डेटी मुर्गी पालन ओर लागल बटैठै उहाँ । मुर्गी पानलमे सहयोग करटी रहल बाटिन् उहाँहे डाडुभौजी ।

‘हमार पुर्खा पहिलेहेसे खेटी किसानी, सुवरमाकर, छेगरीभेँरी, मुर्गी चिंग्नी पालिट,’ चौधरी कहलै–‘परम्परागत रुपसे करटी आइल खेती किसानीहे व्यवसायीक रुप किल डेहल हो ।’

व्यवसायीक मुर्गी पालनहे सुरुवाटी चरणमे सिकाईके रुपमे लेहल चौधरी गैल फागुन महिनामे १ हजार चिंग्नी खोरमे डारल रहिट । उहाँहे प्राविधिक ज्ञान नाइ होके ओम्नेसे करिब २ सय जत्रा चिंग्नी मुगैलिन् । बचल चिंग्नी अब्बे बार्हके डेर्हसे २ केजीसम होराखल बाटिन् । कलेसे उहाँ घर बैठे प्रति किलो ५ सय २५ से साढे ५ सय रुप्यामे बिकरी वितरन फेन करे लागल बटैलै । सार्हे ३ लाखमे सुरु करल व्यवसाय उहाँ पहिल लटमे किरब पाँच लाख बराबरके करोबार हुइल बटैलै ।

प्राविधिक ज्ञान नाइ रलेसे फेन चौधरी मुर्गी पानलहे सिकाइके रुपमे लेटी व्यवसायीक बनैना बटैलै । कोरोनाके कारण फेन उहाँ मुर्गी पालनबारे आपनहे ढिउर कुछ सिख्ना मौका पाइल बटैलै ।

‘खास कैके मै सिकाईके रुपमे फेन व्यवसायीक मुर्गी पालन सुरुवाट करल हइटुँ,’ चौधरी कहलै– ‘कौनो प्राविधिक ज्ञान नाइ होके पहिल लटमे कमीकमजोरीके साथे ढिउर सिकाई फेन हुइल ।’

पहिल लटमे खोर व्यवस्थापन लगायत टमान ओर खर्च हुइल बटैटी उहाँ डुसरा लटसे फाइदा हुइना विश्वास व्यक्त करलै । ‘सुरुवाटी चरणमे खोर व्यवस्थापन लगायत टमानमे खर्च हुइल,’ उहाँ कहलै– ‘आब डुसरा लटसे फाइदा हुइना आसा लेहल बाटुँ ।’

कुछ दिन पाछे मुर्गी पालनसंगे उहाँ आब छेगरी पालन व्यवसायहे फेन सुरुवाट कैना बटैलै । शिक्षण पेशासंगे व्यवसायीक मुर्गी पानल कैके उहाँ अब्बे कोरोना कहरसे रोजगारी गुमाइल वेराजगार युवाहुक्रनके लाग प्रेरणाके स्रोत बने सेक्ठै ।

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