थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत २३ अगहन २६४६, शुक्कर ]
[ वि.सं २३ मंसिर २०७९, शुक्रबार ]
[ 09 Dec 2022, Friday ]
‘ विभेदके तिखा अनुभूतिपाछे विस्फोट ’

माननीय रेशमहे बन्दी बनाके रख्ना कौनो औचित्य नइहो

पहुरा | ३ आश्विन २०७७, शनिबार
माननीय रेशमहे बन्दी बनाके रख्ना कौनो औचित्य नइहो

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, ३ कुवाँर ।
जनता विभेदके तिखा अनुभूति करलपाछे आन्दोलन ओ विस्फोट हुइल एक कार्यक्रमके सहभागीहुक्रे बटैले बा ।

थरुहट/थारुवन राष्ट्रिय मोर्चाके आयोजनामे हुइटी रहल ‘नेपालके संविधान २०७२ ओ आदिबासी थारुहुकनके सवाल विषयक भर्चुअल बहस कार्यक्रमके दुसरा दिनके वक्ता माननीय प्रदीप गिरी जनता विभेदके तिखा अनुभूति करलपाछे भारी आन्दोलन हुइल बटैलै । राज्य सत्ताके सही ढंगसे बाँडफाँड नइहुके थारु समुदाय बाध्यात्मक आन्दोलन करल उहाँ बटैलै । माननीय रेशम चौधरी निर्वाचनमे भारी मात नाननके विजय हुइलेसेफे आमनवीय ढंगसे थुनामे रख्ना, बन्दी बनैनाके कौनो औचित्य नइरहल उहाँ कहलै ।

थारु समुदायहे न्याय, हकअधिकारसे बन्चित कराइल, टीकापुर घटनामे निर्दोष थारुनहे जबरजस्ती मुद्दा लगाइल माननीय प्रदीप गिरी कहलै । उहाँ कहलै–‘जौन देशमे १५/२० हजार मनै मारके, उहीसे ढेर संख्यामे वेपत्ता बनुइया नेता, ओकर प्रेरकहुक्रे, प्रस्तावकहुक्रे बरम्बार सत्तामे पुगल बाटै मने थारुनहे केल कहे विभेद ?’

जालझेल करके थारु समुदाय कम्जोर बाटै, थरुहट÷थारुवान कम्जोर बा कहटी ओइनसंग भेदभाव कैना, ओ और नेता यी देशके एक नम्बरके नागरिक हुइट, थारुनहे जा करलेसे हुइठ कना मानसिकता आब हटैना जरुरी रहल उहाँ कहलै ।

संविधान लेखनके बेला जनतासामु नइजाके हतार–हतारमे संविधानके घोषणा करेबेर सीमान्तकृत समुदायके हक अधिकार सुनिश्चित नइहुइल ओरसे संविधाननहे कुछ हदसम संशोधन करके करके जाई पर्ना उहाँ सुझाव डेलै ।

माननीय हरिराम चौधरी सरकार अपने घोषणा करल मौलिक हकहे फे पालन करे नइसेकल बटैलै । अब्बेक संविधानहे सैद्धान्तिक रुपमे सहमत करलेसेफे समावेशी मुद्दाहे विगारके धारल, निर्वाचन प्रणाली, भौगोलिक क्षेत्र, नागरिकताके विषयमे संविधानमे कुछ समस्या रहल उहाँ कहलै ।

माननीय चौधरी कहलै–‘वर्तमान संविधानमे थारुहुकनके अधिकार जैसिक समेटे पर्ना रहे ओसिक समेटल नइहो, तत्कालिन नेकपा माओबादी २०५२ सालसे जनयुद्ध सुरु करल जिहीसे लौव परिस्थिति सृजना हुइल, एक ठो लौव संविधानके आवश्यकता परल, उहे संविधानमे सीमान्तकृत वर्ग, पाछे परल समुदायके हक समेटे नइसेकल ।’

संविधानके कतिपय बाट मजा रहटी–रहटीफे पाछे पारल समुदायके हकअधिकार सम्बोधन करे नइसेक्ना ट्ीकापुर घटना ओकर ज्वालन्ट उदाहरणके रुपमे हेरेसेक्ना उहाँ कहलै ।

टीकापुर घटना राजनितिक घटना हुइलेसेफे यिहीहे व्यक्तिगत, अपराधिक घटनाके रुपमे केन्द्रीत करखोजल माननीय सांसद हरिराम कहलै । टीकापुर घटनाके थारु निर्दोष रहल ओ ओइन केल नाही राज्यक्षसे समस्त थारुनहे बन्दी बनाइलमे दुःख व्यक्त करलै । संविधानहे संशोधन करके पाछे पारल विक्षिप्त रुपमे संविधान अस्विकार वर्ग समुदायके स्वीकार करे सेक्ना बनैनाके कौनो विकल्प नइरहल उहाँ उहाँ कहलै ।

थारु आन्दोलन राष्ट्रियताके लाग परिक्षा रहल वरिष्ठ पत्रकार चन्द्र किशोर बटैलै । ‘संक्रिर्ण राष्ट्रवादसे असहिष्णुताहे प्रस्त्याई करठ, सीमान्तकृत वर्ग बन्चितिकरणमे परल समुदायमे उकुश मुकुश हुइलपाछे टीकापुर घटना हुइल,’ उहाँ कहलै,–‘टीकापुरमे उ घटना हुईबेर राज्य अपन विरुद्धके रुपमे लेहल, जेकर प्रतिसोधमे थारुनहे दमन करल, निर्दोष थारुनमे बन्दी बनाइल, ओकर भावनात्मक दुखाई थारु समुदायमे आजफे ताजा बा, टीकापुरके घाउ सदा बल्झटी रही ।’

भर्चुअल बहस कार्यक्रममे सुरेन्द्र चौधरी वर्तमान संविधानमे सैद्धान्तिक सहमति रहलेसेफे हकअधिकारसे बन्चित समुदायमे अधिकार सुनिश्चित करेक लाग संशोधन करके जैनाके विकल्प नइरहल बटैलै । कार्यक्रम थरुहट÷थारुवान राष्ट्रिय महिला मोर्चाके संयोजक प्रेमा चौधरीके अध्यक्षतामे हुइल रहे ।

भिडियाेके लाग यहाँ क्लीक करी ।

जनाअवजको टिप्पणीहरू