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सहारा घरमे पुनर्जीवन

पहुरा | ९ आश्विन २०७७, शुक्रबार
सहारा घरमे पुनर्जीवन

उन्नती चौधरी
धनगढी, ९ कुवाँर ।
समाजसे बौराहाके संज्ञा पाइल मानसिक समस्या रहलहुक्रे सहारा घरेमे आश्रय पाके अपन–अपने सुरमे मस्ट बटै । कोई गीत गाइटा, कोई पानीसंग खेलटा, कोई हिसाबकिताबमे व्यस्त, टे कुछ भाषणमे । बाहेरसे अयुइयनके लाग यी दृश्य डेख्के अजीव लागठ । यिहीहे सामान्य बनैना बलबहादुर विष्ट दिनरात सहारा घरेम खटके अभिभावकके भूमिका निर्वाह करटी बटै ।

‘सहारा घर’ कैलालीके बर्दगोरिया गाउँपालिकाके चुरे फेदीमे रहल धार्मिक पर्यटक वनके पूर्वी कोनुवामे अवस्थित बा । सडकमे भेटल मानसिक रोगीहे सहारा डेना उद्देश्यसे विष्ट पाँच वर्ष यहोर यी संस्था सञ्चालन करटी आइल बाटै ।

वरपर चार कठ्ठा फरछवार जमिनमे तारबारसे घेरल बा । चारकोठे पक्की घर बा । ओकर छेउमे टिनसे छाइल टहरा बा । यिहे दुनियाँ मानसिक स्वास्थ्य समस्या हुइल ढेर जनहनहे सहारा डेना घर हो । जहाँ अब्बे ८९ जाने आश्रय पैटी रहल बाटै । जेम्ने मन्से ६० जाने पुरुष, २५ महिला ओ चार बालबालिका बाटै । यहाँ बैठुइयाहुकनहे रुचि अनुसार नच्ना, खेल्न जैसिन गतिविधि सिखैनाफे करजाइठ ।

सडकमे भौटरटी फुहरमे सुटना ओ फेकल खाना विटोरके खैना अवस्थामे रहलहुकनहे सहारा घरके ओत डेहे पाइलमे सञ्चालक विष्ट सन्तुष्टि पाइल उहाँ कहठै, ‘सडक–मानवहके काल्हसम ओइनहे सक्कु जे बौराहा कहिट ओ छिःछिः दुरदुर करिट, आज ओइनके जिना शैली फेरल बा । यी मोर लाग आनन्दके बाट हो ।’

डिप्रेसनहे जिटके सहाराके हात

विष्ट पेशागत ओ रहरके काम कैना क्रममे टमान समयमे विविध क्षेत्रके अनुभव बिटोरलै । पत्रकारसे कलाकार, खेलाडी, स्वास्थ्यकर्मीसमके भूमिकामे काम करलेसेफे सन्तुष्टि पाई नइसेकल सुनैलै । ‘अब्बे बेसहाराहुकनके सेवामे समर्पित हुके भर बहुट आनन्दित महशुस हुइटी बा,’ उहाँ कहठै ।

बिचल्लीमे परल, मानसिक रोग्हया लगायतहे सहारा घर हात डेहल विष्ट कौनो बेला अपनहेफे मानसिक स्वास्थ्य समस्यामे परल रहिट । उहाँ डिप्रेसनके बिरामी हुइल रहिट । मने, समयमे परिवारके हेरचाह ओ माया पाके उहाँ उहीसे पार कैना सफल हुइलै । ‘परिवारके माया नइपैलेसेफे मैफे सडकमे निरल रटु सायद,’ उहाँ कहठै, ‘ओसिन अवस्थामे सबसे मजा उपचार माया–प्रेम हो ।’

डिप्रेसनहे जिटलपाछे उहाँ सक्कु रहरके काम छोरके स्वास्थ्य क्षेत्रमे केन्द्रित हुइलै । फार्मेसी पह्रल उहाँ कैलालीके बौनिया बजारमे क्लिनिक खोलके बैठलै । २०७० सालमे उहाँ सडक जीवन बिटैटी आइल एक मानसिक रोग्हया वृद्धहे डेख्नु, जेकर गोरभर खटरा रहे ओ घाउमे कीरा परल रहे । वृद्धाहे सडकसे क्लिनिकमे लैजाके उपचार करलपाछे उहे ठाउँमे पुगाके छोरडेनु । मने, उहाँहे उ रातभर निन्द नइलागल । सकारे उठके उ वृद्धहे खोजके घरेम रख्लै ।

विष्ट ओकर कुछ दिनपाछे कैलालीके लम्की सडकसे मानसिक सन्तुलन गुमाइल एक युवकहेफे घरेम नन्लै । बैतडी जिल्लाके पुचौडी नगरपालिका– ८ के ३५ वर्षिय महेश कुँवर घरायसी तनावके कारण मानसिक सन्तुलन गुमाइलपाछे सडकमे भौतरटी कुछ दिनके यात्रापाछे लम्की पुगल रहिट ।

समय बित्टी जाके उहाँ घरेम आश्रय डेके रखुइयाके संख्या बह्रटी गैल । ओकरपाछे छिमेकीसे नइमजा टीका–टिप्पणी सुनल ठेनसे घरेम ठाउँ साकिर हुइलपाछे अलग ठाउँ खोज्न बाध्य हुइल उहाँ बटैठै ।

विष्ट २०७२ सालमे सहारा घर नामके संस्था दर्ता करलै । ओकरपाछे टमान सहयोगी ओ दाताहुकनके सहयोगमे २०७४ अगहनमे टहरा निर्माण करके मानसिक रोगीहुकनहे धारे लग्लै  । बिरामीहे उचित सुविधासहित रख्नाके साथे उपचारफे करजाइठ । ओइनके उपचारमे विष्टहे हेल्थ असिस्टेन्ट (एचए) ओ नर्सिङ पह्रल गोसिनीया लक्ष्मी पौडेल सघैठी ।

‘सहारा घरेम बैठना हरेक व्यक्तिके अपने विगत ओ अलग कथा बा, मने कतिपय अपन नाउँबारे बेखबर बाटै । सहारा घरेम आइलपाछे सक्कु जे बैठना छानासंगे नाउँफे पैले बाटै । ओइनके स्वभाव, हाउभाउ आदि हेरके नाउ रख्न करल बा । शान्त स्वभाव रहुइयाहे शान्ति, संस्थामे आइलपाछे हाली ठिक हुइलहे आशाराम, मुस्कुइयाहे मुस्कान जैसिन नाउँसे सम्बोधन करजाइठ ।
समाजसे बौराहा कहिके परिचय गुमनाम बनाडेहल व्यक्तिहे संस्थासे मायाके विरुवा डेके प्रेमपूर्वक नाउँ डेहल विष्ट बटैठै ।

उहाँक अनुसार, उद्धारके काम शुरू करल यहोर सहारा घरके हेरचाह ओ माया पाके ८८ जाने ठिक हुके पहिलेक जस्टे सामान्य अवस्थामे लौटके परिवारसंग पुनर्मिलन हुइल बा । जेम्नेसे कुछ व्यक्ति संस्थामे सेवारत बाटै ।

पुनर्जीवनपाछे संस्थामे सेवा डेटी

मानसिक तनावके कारण सडक–मानव बन्टी सहारा घरेम पुगलपाछे महेश कुँवर पूर्णरूपमे ठिक हुसेकल बाटै । लौवा जीवन पाइलपाछे अब्बे संस्थामे अपने जस्टे समस्यामे परलहुकनके सेवामे जुटटी रहल उहाँ बटैठै ।

सहारा घरके व्यवस्थापकीय इञ्चार्ज कुँवर कहठै, ‘मै माया ओ स्नेह पाके ठिक हुइल बाटु । अब्बे मोर जस्टे मानसिक सन्तुलन गुमाके सहाराविहीन रहुइयाके स्याहारसुसार करे पाके बहुट आनन्द लागठ ।’ अपन लाग सहारा घरके सञ्चालक विष्ट भगवान् रहल उहाँ बटैठै ।

कैलालीके लम्कीचुहा नगरपालिका–१ थकालीपुरके सुनिता (शान्ति) फे मानसिक सन्तुलन गुमाके सडकके जीवनमे विटैटी आइल रहिट । बौनिया प्रहरीसे सहारा घरेम पुगाइलपाछे ठिक हुइल उहाँ संस्थामे भन्सरियाके काम हेरठी ।

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दुई छावा ओ दुई छाईक डाई उहाँहे करिब १२ वर्ष आघेसे मानसिक रोग सटैले रहे । ठिक हुके संस्था मार्फत ढेरहे सेवामे मल्हम लगाई पाके रमैटी रहल उहाँ कहठी, ‘यहाँसे मोर लैहर घर लग्गे परठ मने, जैना मन नइलागठ ।’

यी दुईसहित संस्थाभिटरके ६ जाने व्यक्ति ठिक हुके यिहे टमान भूमिकामे सेवा डेटी रहल बाटै । जेम्नेसे दुई जाने भन्सरियामे, एक जाने सुरक्षागार्ड ओ और व्यवस्थापनके काम हेरठै । ओस्टेक, बाहेरसे ६ जाने स्वयंसेवक आके खट्न बटै । यहाँ बैठुइयाहे योगाफे सिखैना करजाइठ ।

सहारा घरेम कठिन स्वास्थ्य अवस्थाके बिरामीफे आपुग्ठै । अपनहे उद्धार ओ सहयोगके काम शुरु करल यहोरके सात वर्षमे १२ जानेक मृत्यु हुइल सञ्चालक विष्ट बटैठै । ‘सहारा घर’ रहल ठाउँमे जैना डगरके मजा सुविधा नइहो । ओस्टेक, एम्बुलेन्स सेवा नइहुके गम्भीर बिरामीहे अस्पताल पुगैना कठिन हुइना करल उहाँक कहाई बा ।

क्षमतासे ढेर हुके गाह्रो

सहारा घरके बारेमे प्रचारप्रसार बह्रलसंगे यहाँ बेसहाराहुक्रे नानेक धारडेना क्रमफे बह्रल बा । जेकर कारण यहाँके भौतिक संरचनाके क्षमतासे थेग्न गाह्रो हुइल सञ्चालक विष्ट बठैठै ।

‘बेसहाराहुक्रे ठप्टी करेबेर खास करके सुत्न खटिया ओ ओढ्न–बिछ्ैनाके अभाव रहल बा । सुत्केरी, बालबालिका, अशक्त वृद्धवृद्धाहे खरियामे ओ बाँकीहे भुइँयामे सुटाई परल बा । व्यक्ति ओ समुदायसे केल नाही, सडकके बेसहाराहुकनहे सरकारी निकायसेफे यिहे नानके जिम्मा लगैना करल बा । जेकर कारण संस्थाहे व्यवस्थापन कैना गाह्रो हुइल बा ।

‘सरकारी निकायसे यहाँसम नानडेठै, मने व्यवस्थापन कैसिन बा कहिके कबु नइहेरठै,’ उहाँ कहठै, ‘बेसहाराहुक्रे ठपल के ठपल करके खास करके सुत्न खटिया ओ बिसौनाके अभाव हुइल बा ।
गर्मी मौसममे जैसिकटैसि सुटलेसेफे आब जारयाममे कैसिक व्यवस्थापन कैना कहिके उहाँहे चिन्ता सटैले बा । सहारा दिन खाना खवाके केल नइहुइना, उचित सुविधा डेके आधारभूत आवश्यकता पूरा करे पर्नामे उहाँ सजग बाटै ।

अब्बे सहारा घर सहयोगी दाताहुकनसे जलमदिन, भोजके वर्षगाँठ, श्राद्धके अवसरमे प्राप्त हुइना सहयोगसे चल्न करल बा । मने, सहयोगसे केल चल्न गाह्रो परल बा, व्यवस्थापनके काम सरकारसे करे पर्ना उहाँ बटैठै ।

‘दानके भरमे संस्था चलाई नइसेक्जाई । यदि सरकारसे जिम्मा लेलेसे भर मै जीवनभर निःशुल्क सेवा कैना तयार बाटु,’ विष्ट कहठै ।

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