थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
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‘ वैदेशिक रोजगारीमे गैल डाई लकडाउनमे फसके बिट्ली ’

चार लर्कनके महाविजोग

पहुरा | १७ आश्विन २०७७, शनिबार
चार लर्कनके महाविजोग

प्रेम चौधरी
धनगढी, १७ कुँवार ।
विदेशसे बक्सामे प्याक हुइल लहास यिहे कुवाँर १२ गते घर पुगलपाछे सुशीला, सुरज ओ करनके रोहाधाही मचल । मने, आठ वर्षिया लक्ष्मी भर अंगनामे अपने धुनमे खेल्नामे मस्त रहिट, बक्सामे प्याकिङ गीताके लहासहे अन्तिम भेटघाटके लाग आफन्तहुक्रे जम्मा हुइल रहिट । बक्स पकरले डाई हम्रहिन टुवर बनाके चलगिलो कहटी रुइटी रहल डिडी ओ डाडुनहे रोइट डेखके लक्ष्मी कहिट, ‘टुहिनके का हुइटा, टोहरे काहे रुइटो आज, उ हमार कोइफे नइहो, नरोउ ।’

धनगढी उपमहानगरपालिका वडा–९, गौरीकटानके ४६ वर्षिय गीताकुमारी पार्की दूध पिना नौ महिनक छाई लक्ष्मीहे सन्झली छाई सुशीलाके जिम्मा लगाके सन् २०१३ जुन ३० तारेखमे वैदेशिक रोजगारके लाग कुवेत उरली । उ बेला सुशीलाके उमेरफे जम्मा १० बरसके रहिन । आर्थिक समस्याके कारण डाई वैदेशिक रोजगारके लाग कुवेत गैलपाछे नौ महिनक बहिनिया, ६ बरसके छुटकी भैवा ओ ९ बरसके बरका भैवाहे पलना हुक्रैना जिम्मेवारी ठपल, सुशिलाहे ।

‘छोट–छोट भैवा बहिनियनहे छोरके डाई कुवेत गैलपाछे रातदिन नइसुटके, अपने भुखमे रहिकेफे भैया, बहिनियन बह्राके यहाँ पुगैनु,’ सुशीला कहली, ‘छुटकी बहिनिया लक्ष्मी दूध पिनाहा रहे, बजारमे मिल्न निप्पलके दूध खवाके, ओकर गुहमुत काँह्रके हुर्कैनु ।’ पह्रना समयमे डाई अपनेहुकन छोरके वैदेशिक रोजगारके लाग विदेश गैलपाछे भैया बहिनियन हुर्कैटी समय गुजरगिल, पह्रना मौकाफे नइपैनु उहाँ कहठी ।

लक्ष्मीहे हुकान डाई नौ महिनामे छोरके विदेश गैलपाछे सक्कु स्याहार सुसार, लिखैना, पहै्रना, लवैना खवैना सुशीला करल ओरसे डाइसे ढेर मैया डिडीहे लागल बाटिन, उहेमारे हुईसेकठ विदेशमे डाईक लहास आइलपाछेफे न लक्ष्मी अपन डाई हो, कहिके चिन्ही न टे अपनत्व महसुश करली ।
गीता पार्की भारतीय नागरिक रामप्रसादसे भोज करले रही । रामप्रसाद प्रायः जैसिन नेपालमे बैठके कबु ईटा भटठामे, कबु रोड बनैना मजदुरी, कहुँ ठेकदारी करके जीवन निर्वाह चलैटी आइल रहिट । पैसा कमैना मने सब पैसासे डारु पिडारे लागलपाछे अन्तिम विकल्प रोज्टी गीता छोट–छोट लर्का ओ परिवार छोरके घरेलु कामदारके रुपमे कुवेत गैल रही ।

सुशीला कहली, ‘बाबा अपन कमाइल पैसासे जाँरडारु, चुरोट विडी, खैनी खाए, उहीहे क्षयरोग लागल रहिट, स्वासप्रश्वासके विमारीफे रहे, डाईक विदेश गैल एक बरस नइपुग्टी भगवानके प्यारा होगिल ।’ डाइक लैहर घर धनगढी उपमहानगरपालिका वडा–९, गौरीकटान हुइस, मने बाबक ना थर ठेगाना, न घर पटा हो, ना टे ओकर नागरिकता हुइस, नटे विवाह दर्ता हम्रहिन कबु कुछफे नइबटाइल, उहाँ कहली ।

गीता पार्कीके अपने घर डुवार नइरहलपाछे धनगढी उपमहानगरपालिका–८, कैलाली बहुमुखी क्याम्पसके गेट लग्गे लक्ष्मी भण्डारीके घरेम कोठा भाडा लेले रहिट । वैदेशिक रोजगारमे गैलपाछे गीता लर्कनके लाग महिनामे आठ/दश हजार नेपाली पठाडिट जिहीसे लर्कनके खैना, बैठना खर्च चले ।

‘बाबा कमाके एक सुको नइडेहल, डाई विदेशसे मासिक आठ/दश हजार केल पठाए, बाँकी पैसा कहाँ जमा करल, किही डेहल कुछ नइबटाइल,’ सुशीला कहली, ‘डाई कबु–कबु भिडियो कल करे टे पुछु, बाँकी पैसा कहाँ जमा करठे, टब डाई कहे कहु नइ छाई सक्कु पैसा संगे लेके अइम टब जग्गा किनके घर बनाडेम ।’

मृतक गीताकुमारी पार्की

सदाभर औरेक घरेम डेरा लेके बैठल सुशीलाहे ठोरिक हौसाला बह्रे, उहाँ सोचित हमारफे घर रही, दुःखके दिन दुर हुई, मने डाईक डेखाइल सपना, सपनामे सीमित हुइलिन उहाँक । पैसाके सट्टा उल्टे डाईक् लहास बक्सामे प्याक हुके आइलपाछे भगवान अपनेहुकन उप्पर बहुट भारी बज्रापत प्रहार, करल सुशीला बटैली । उहाँ कहली, ‘नटे डाई बाबा, नइटे घरे दुवार, नटे डाईक कमाइल पैसा, कैसिक जिन्गी कटना हो । कैसिक घरभाडा टिरम, कैसिक भैया बहिनियाहे पह्रैम खवैम, हम्रे टे अलपत्र, टुवर होगिली ।

कोभिड–१९ के कारण विश्व प्रभावित हुइलबेला गीता पार्की नेपाल आइक लाग तीन महिनासे नेपाली राजदुताबास कुवेतमे बैठल रही । उहेसे भिडियो कल करेबेर सक्कु लर्कनके लाग कपरा, सरसामानके किनके धाराल ओ यिहे डशियामे घर अइना कहिके छुटकी छाईक लाग किनल गुडियाफे डेखैटी बाट करल सुशीला बटैली । गीताहे स्वासप्रस्वासके समस्या रहे, नेपाल आके चेकजाँच, ओ घर बनाके फेर वैदेशिक रोजगारके लाग लौटन कहिट । स्वास्थ्यमे समस्या आइलपाछे कुवेटके मुवारक अस्पातलमे भर्ना हुइल उहाँक निमोनिया, स्वास्प्रस्वास ओ मुटुमे समस्या हुके भदौ ८ गते, (सन् २०२० अगस्ट २४ तारेख) अस्पतालमे ज्यान गैल नेपाली राजदुतावास कुवेटसे पठाइल पत्रमे जनाइल बा । मने, सुशीलाहे भदौ ३१ गते साँझके डाईक् ओराइल राजदुतावाससे खबर पुगल रहे । गीताके कोरोना परिक्षण करेबेर निगेटिभ रिपोट आइल रहे । नेपाली राजदुतावास कुवेतमे गीताके तीन ठो (व्याग) लगेज बाटिन, ओम्ने ढेर प्रमाण ओ सामान रहल ओरसे सुरक्षित अपनेहुकनठेन पुगाडेना छाई सुशीला माग करले बाटी ।

पैतृक सम्पतिके नाउँमे डाईक नागरिकता केल

रामप्रसादके अपन कमाइल पैसासे जारडारु पिनामे ठिक हुइन, उहाँ भारतीय नागरिक रहल, मने प्रायः नेपालमे बैठिट, उहाँक ठेन नटे नेपाली नागरिकता रहिन, नटे भारतके आधार कार्ड । अपने टे ओरागिनै, लर्कनके लाग कुछ नइछोरलै । गीता पार्की वैदेशिक रोजगारीमे रहल बेला खर्चके लाग ठोर–ठोर चे पैसा पठैली मने बाँकी पैसा कहाँ जमा करली, कुछ नइबटैली, लहासके संगे सम्पतिके नाउँमे नागरिकता, राहदानी, अस्पतालमे उपचार कराइल कागजात केल आइल ।

शिक्षादिक्षा ओ नागरिकताके सवाल

गीता पार्की वैदेशिक रोजगारमे रहेबेर घर खर्चके लाग मसिक आठ÷दश हजार नेपाली रुप्या पठाइ जिहीसे खैना, कोठा भाडा डेना ओ बचल पैसासे लक्ष्मी ओ करनके पह्राई खर्चमे लागे । १३ वर्षिय करन पार्की धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर–७ के शिव आधारभूत विद्यालयके कक्षा ७ मे बह्रटी बाटै, आठ बरसके लक्ष्मीफे उहे विद्यालयमे कक्षा ४ मे पह्रठी कलेसे सुरज पार्कीफे उहे विद्यालयमे पह्रटी पह्रटी आर्थिक समस्याके कारण कक्षा ७ ठेनसे विद्यालय छोरलै । आब कमुइया कोईफे नइरहलफे ओइनके पह्राई आघे कैसिक बढी कि ओत्रेमे सीमित हुजाई कना हुइल बा ।

ओस्टेक गीता पार्कीके ६ ठो सन्तान रहिन, सबसे बरकी छाई रेखा भारतके पलियामे भोज करले बाटी हुकान न भारतीय नागरिकता, न आधार कार्ड, न टे कहुँक नागरिकता, मन्झली छाई पार्वतीफे भारतके सीतापुरमे भोज कैले बाटी, हुकानफे उहे हाल बा ।

सुशीलाके उमेरफे १८ बरस पुगल बाटिन, उहाँक नागरिकता बनैना उमेर पुरा हुइल बा, नागरिकता बनुवइक लाग डाईक नागरिकता केल आधार बा, कलेसे और भैया बहिनिय छोट–छोट बाटै ।

विमा रकम पैनामे अन्यौलता

गीताकुमारी पार्की सन् २०१३ जुन महिनाके ३० तरेख श्रम स्वीकृति लेके घरेलु कामदारके रुपमे वैदेशिक रोजगारके लाग कुवेत गैल रहिट । श्रम स्वीकृतिसंग नेपाल लाइफ इन्स्योरेन्स लिमिटेडमे पाँच लाखके जोखिम विमाफे हुइल रहे । जेकर म्याद सन् २०१३ सेप्टेम्बर १५ तारेखसे सन् २०१५ सेप्टेम्बर १५ तारेखसम दुई बरषके रहल बा ।

वैदेशिक रोजगारीके क्रममे शारीरिक क्षति हुइलेसे बीमा रकम दाबी करले सेक्ना कहल बा । गीता पार्की वैदेशिक रोजगारके लाग विदेश गैलबेला भीसाके म्याद ओराइलपाछे भीसामे म्याद ठपके सन् २०२३ जुन ३० सम विल्गाइल बा, श्रम स्वीकृतिभर दुई/दुई बरसमे लेहे पर्ना प्रावधान रहल श्रम कार्यालय धनगढीके प्रमुख जनक उकेडा जनैलै । पहिल चो जाईबेर श्रम स्वीकृति हुइल बा । गीताके वैदेशिक रोजगारीमे रहल बेला भीसके म्याद ठपसंगे और श्रम स्वीकृतिके कागजात हुइहीन कलेसे बीमा रकम हकदाबी करसेक्जाई ।

गीताके लहास दहसंस्कार ओ काजकिरियामे शारदाके महत्वपूर्ण सहयोग

यिहे कुवाँर १२ गते गीताक् लहास नेपाल आइलपाछे दहसंस्कारसे लेके काजकिरियामे धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर ९ निवासी शारदा ताम्राकार महत्वपूर्ण सहयोग करले बाटी । गीता पार्कीसे मौसी भतिज्यके नाता पर्ना सुशीलाके अपन घर नइरहलपाछे शारदा अपने घरसे सक्कु बन्दोबस्ती मिलाके दहसंस्कार कैनामे सहयोग करले बाटी ।

धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर ९ के वडा सदस्य समेत रहल शारदा दहसंस्कार केल नाही काजकिरियाके लाग सक्कु खर्च व्यहोरटी रहल बटैली । गीताके दुई छावा सुरज ओ करन डाईक किरियामे बैठल बाटै ।

‘कुबेतसे डाई विटल खबर आइलपाछे सुशीलाहे बहुट अप्ठ्यारो परल रहे, कोठा भाडा लेके बैठना उहाँक कोईफे आफन्त नइरहल ओरसे मानवताके नातासे सहयोग करल हो,’ शारदा कहली, ‘मै टे दहसंस्कार करेक लाग सहयोग कैडेनु, परम्परानुसार काजक्रियाफे जारी बा, ओम्नेफे सहयोग कैडेहाटु, सदा टे सहयोग करे नइसेक्जाई, यी टुवर हुइल लर्का कहाँ जाके बैठही । उहाँ कहली, ‘पहिले डाई रहिन, टे घरबेटी बैठे डेहे, आब कोई नइहुइन, पैसा कहाँ पाके टिरही, उधारमे घरबेटी कबसम बैठे डिहिन ।’

सुशीला कहठी, ‘डाईबाबा छोरके गैलपाछे न घर हो, न जग्गा, ओस्टे अलपत्र हुगिली हम्रै, कहु ऐलानीप्रति खाली जग्गामे मुरी नुकैना छोटमोट छोपरी हुइलेसेफे दिनभर मजदुरी करके भैया बहिनियनहे खवा पह्राके जीवन गुजारा करलेटु ।’

गीता पार्कीके लहास धनगढीसम नानेक लाग ट्रेस प्रालि धनगढी अन्तर्गत सामी परियोजनाके सुरक्षित अप्रवासन सूचना केन्द्र वैदेशिक रोजगार प्रवद्र्धन बोर्ड श्रम कार्यालय कार्यालयसंग सम्पर्क समन्वय करके नानल रहे । लहास आइलपाछे विछिप्त बनल सुशीला लगायतहे ट्रेस नेपालके मनोसामाजिक परामर्शकर्ता पदमा चन्द सेवा डेहल रहिट । सुरक्षित वैदेशिक रोजगारका लागि आप्रवासी स्रोत केन्द्र धनगढीके पराशर्मकर्ता लक्ष्मी चौधरी टुवर बनल उ लर्कनहे भावनात्मक रुपमे पीड परल बटैली ।

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