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वैकल्पिक विधिमे सक्कु विद्यार्थीहे समेट्ना कर्रा

पहुरा | १७ कार्तिक २०७७, सोमबार
वैकल्पिक विधिमे सक्कु विद्यार्थीहे समेट्ना कर्रा

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १७ कार्तिक ।
कोरोना संक्रमणके जोखिमकाबीच विद्यालय सुरु करल शिक्षण सिकाइके वैकल्पिक विधिमे सक्कु विद्यार्थीनहे समेट्ना समस्या हुइल बा ।

विद्यालय पुगके कक्षा कोठामे पढ्ना बानी परल विद्यार्थी टोकल वैकल्पिक विधिके पहुँचमे पुगे नाइ सेक्नाके साथे आवश्यक वातावरण फेन मिले नाइ सेकके सिकाइ विधिमे सक्कु विद्यार्थीनहे समेट्ना समस्या डेखल हो ।

अधिकांश विद्यालय अनलाइन कक्षामार्फत शिक्षण सिकाइ करटी रहलमे कतिपय विद्यालय सामुदायिक शिक्षण सिकाइ (टोल शिक्षा) मार्फत पठनपाठन करटी रहल बावै ।

कुछ विद्यालय सीमित संख्यामे विद्यार्थीनहे विद्यालयमे बोलाके स्वास्थ्य सुरक्षाके मापदण्ड अपनाके शिक्षण सिकाइ करटी रहल बावै । सरकारसे जारी करल सिकाइ सहजीकरण निर्देशिकामे सिकाइके पाँचठो वैकल्पिक विधि टोकल बा । वैकल्पिक विधिके पहुँचमे पुगे नाइ सेकल विद्यार्थीनके पढाइ सञ्चालन हुइ नाइ सेकलपाछे सम्बन्धित अभिभावक चिन्तित डेखल बाटै ।

धनगढीके एक बोर्डिङ स्कूलमे आपन छावाछाइहे अध्ययन करैटी आइल स्थानीय योगेन्द्र चन्दसे विद्यालयसे सुरु करल अनलाइन कक्षाके लाग आपन ओत्र पहुँच नाइ रहल ओ वातावरण फेन नाइ मिल्ना ओरसे छावाछाइक पढाइ रोकल बटैलै । विद्यालय जाके पढ्ना वातावरण बनलपाछे किल छावाछाइहे सामुदायिक विद्यालयमे पढैना योजना उहाँ बटैले बाटै ।

उहाँ कहलै, ‘पढक लाग सक्कु विद्यालयके शिक्षण सिकाइ अक्केखालके हो, बोर्डिङमे नै छावाछाइहे पढाइ परल कना कुछ नाइहो ।’ धनगढी उपमहानगरपालिका कार्यालय शिक्षा शाखाके अधिकृत महादेव जोशी सरकारसे जारी करल विद्यार्थी सिकाइ सहजीकरण निर्देशिका २०७७ बमोजिम वैकल्पिक विधिके प्रयोग कैके विद्यालयमे पठनपाठन हुइटी रहलेसे फेन सक्कु विद्यार्थी यी विधिमे नाइ समेटल बटैलै ।

झण्डे ६० प्रतिशत छात्रछात्रा किल वैकल्पिक विधिमे सहभागी हुइल अनुमान करल कहटी जोशी कहलै, ‘वैकल्पिक विधिमे सहभागी हुइ नाइ सेकल छात्रछात्राके पढाइ भर सञ्चालन हुइ सेकल नाइहो ।’ वैकल्पिक विधिमार्फत पठनपाठन हुइटी रहल बेला सिकाइ ओत्र प्रभावकारी नाइ हुइल गुनासो फेन कतिपय अभिभावक करे लागल बाटै । यद्यपि लम्मा समयसे विद्यालय जाइ नाइ पाइल छात्रछात्रा भर आ–आपन घरसे वैकल्पिक विधि अपनाके पढे पाकेभर खुशी डेखल बाटै ।

कोरोनाके जोखिमके कारण उहाँहुक्रनमे मनोवैज्ञानिक त्रास फेन ओत्रे बा । कोरोना संक्रमणके जोखिमके कारण विद्यालयके विद्यार्थीके पठनपाठन लम्मा समयसे अवरुद्ध होके सरकारी सामुदायिक विद्यालयमे कार्यरत शिक्षकसे निजी क्षेत्रके विद्यालयके शिक्षकमे कोरोनाको प्रभाव ढिउर परल बा । निजी क्षेत्रके विद्यालयमे कार्यरत अधिकांश शिक्षक तलब पारिश्रमिक पाइ सेकके प्रभावित हुइल हुइट ।

स्थानीय शिक्षक जनक पाण्डेय कोरोना संक्रमणके जोखिमसे लम्मा समयसे विद्यालय बन्द होके निजी क्षेत्रके विद्यालय धरासायी बनल बटैलै । अब्बेक अवस्थामे वैकल्पिक विधि अपनाके शिक्षण सिकाइ सुरु करलेसे फेन साविकमे पढ्टी आइल विद्यार्थीमध्ये ४० प्रतिशत किल वैकल्पिक विधिमे सहभागी हुइ पाइल उहाँ बटैलै ।

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