थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १८ अगहन २६४३, बिफे ]
[ वि.सं १८ मंसिर २०७७, बिहीबार ]
[ 03 Dec 2020, Thursday ]

थारुनके व्यवसायमे विविधिकरन खै ?

पहुरा | ४ मंसिर २०७७, बिहीबार
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थारुनके व्यवसायमे विविधिकरन खै ?

भर्खर डेवारी ओराइल बा । मेरमेरिक राहरंगी टे पर्ले बा, डेवारीहे झलरमलर ओज्रार ओ फुलक् टिउहारके रुपमे फेन चिन्ह जाइठ । घरक् भिट्टर, बाहर ओज्रार हुइक लग मन फेन ओज्रार हुइ परठ । मन ओज्रार हुइक लग घरक अवस्ठा बल्गर हुइ परठ ।

घरक अवस्ठा सँवारक लग थारुनके व्यवसाय हेर्बो टे अभिन फेन उहे टेंह्रवा हरक चिंरैया ‘जिन्दाबाद’ बा । ‘पाह्रा पन्डित कौनै काम, कोडरा मारो धाने धान’ ऐसिन टे हमार कहकुटे बा । मने का धान, गोहुँ, मकै इहे परम्परागत खेति किसानि किल कैके थारुन्के आर्थिक उन्नति सम्भव बा ? परम्परागत खेति किसानि कैके सामान्य जिउ टे पाले सेक्जाइ, मने आर्थिक उन्नति नै हुइ ।

टीकापुर नगरपालिका–१, वनगाउँके किसान सीताराम चौधरी विगत चार बरससे व्यावसायिक फूला खेती कैके लाखौं आम्दानी कैना सफल हुइल बाटै । चौधरी आघेक बरस ढिउर जमिनमे फूलाखेती करल रहिट । इ बरस कोरोना प्रभावके कारन फूला नाइ बिकि कि कना आशंकासे उहाँ आठ कट्ठामे किल फूला लगैलै । मने, कोरोनाके कारन फूलाके व्यापारमे खासे असर नाइ परलिन । उहाँ चाहल दाममे फूला बेच्टि बटाँ । ओहोर धान किसानके हाल हेरि, बिचौलियन जट्रा दाम टोक्टि बटाँ, घुइयक भाउमे धान बेच्ना बाध्य बटाँ ।

                आब फूला डेवारिम किल नाहि सारिसाह बिक्ना चिजके रुपमे आइल बा । फूला मनैनके जरमसे, भोजबियाह, मृत्यु संस्कारसम टमान संस्कारमे काम लग्ना चिज हो । सब किसान भाइ आब धान, गोहुँ, मकै छोरके फूलम किल लाग जाइ कना नैहो, मने खेटिमे फेन विविधिकरन जरुरि बा कहे खोजल हो । धानसंगे मच्छि फे पालके कुछ किसान भइयन आम्दानी कर्टि बाटै, मनो हमार ध्यान ओहोर नाइ हो ।

फूला खेतीम लागल सीताराम चौधरी कोरोना कम हुइ टे हल्याण्ड कना देश जैना फेन चिट्ठि पैले बटाँ । मने आम थारु किसान भाइनके हाल हेरि, अपने देश टे डुर, विदेश भ्रमनके अवसर केवल सपना बटिन । ‘कुवक मेघि, कुवम’ जिन्गि बिटेहस बहुट किसान भइयनके जिन्गि छोटेम भेंरहवा, छेग्रह्वा, बरा हुइलेसे हरटेक्का झलारि, फे बुह्रापामे गयरवा, भैंसरवामे जिन्गि बिट्टि बटिन । चलाख जातिक मनैं हमारहस सोझ थारुन् चह्रैटि बटाँ । हमे्र अभिन गोरु, भैंस चह्रैटि बटि । आइ, थारु भइयो लोग अपन पेशा, व्यावसायमे विविधिकरन करि । टब किल उन्नति हुइ ।  

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