थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १८ अगहन २६४३, बिफे ]
[ वि.सं १८ मंसिर २०७७, बिहीबार ]
[ 03 Dec 2020, Thursday ]

कठरिया थारुहुकनके लौवा वर्ष

पहुरा | ४ मंसिर २०७७, बिहीबार
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कठरिया थारुहुकनके लौवा वर्ष

हिन्दी भाषाके त्योैहार शब्दसे अपभ्रंश हुइटी नेपाली भाषामे तिहार हुई पुगल कना कहाई बा । नेपालमे तिहार मनैना आ–¬अपने तरिका बा । कोई यिहीहे विशेष महत्व डेके, कोई मध्यम ओ कोई कम महत्व डेके मनैठै । फेरसे ढेर नेपाली यिहीहे मन्ना करठै ।

थारु समुदायफे कार्तिक कृष्ण पक्षके औंसीमे डियाडेवारी (दिपावली) मनैठै । दहितथारुहुक्रे एवं पूर्विया कठरिया थारुहुक्रे डेवारीके अवसरमे अपन कुलदेवताहे ढिकरी चह्राके पूजा करठै । विशेष करके लौव धानके पीठासे ढिकरी बनाके पुजा कैना ओ लुटैना चलन बा । हिन्दू धर्मावलम्बीहुक्रे यमपञ्चकके चौठा दिनअर्थात कार्तिक शुक्लप्रतिपदाके दिन गोरु पुजा कैना करठै । मने थारु समुदायके मुख्य पेशा कृषि हुइल ओ कृषिकार्य विशेष करके गोरु भैसासे सम्पन्न हुइना ओरसे ओइनके लाग पहिले–पहिले गोरु भैस हरेक औंसीमे पुजा करिट । औंसीमे गोरु¬ भैसहुकनहे नइजोत्ना ओ मजासे पालनपोषण कैना चलन रहे । उहे चलनअनुरुप औंसीमे डेवारी कैनाके साथसाथे गोरु भैसके फे विशेष हेरचाह कैना करिट । मने अब्बेफे उ चलन हेरैटरप डेवारी केल सीमित बा ।

मने देशके एकदुई जिल्लामे केल बसोबास रहल पश्चिमा कठरियाहुकनके  चालचलन और थारुहुकनसे विशेषखालके बा । जिहीहे मल्होरिया कठरियाफे कहठै । मल्होरिया कठरियाहुक्रे दहित ओ पूर्विया कठरिया जस्टे औंसीके दिनमे डेवारीके साथ साथे अपन कुलदेवताहे ढिकरी चडाके पुजा करठै । यहाँसम ओइनके चलनदहित ओ पूर्बिया कठरिया थारुहुकनसंग मेल खाइठ । मने कार्तिक शुक्लापक्षके पहिल दिनसे ओइनके चलन फरक परठ । शुक्लप्रतिपदाके दिनप्रायःगोबर्धन पुजा हुइठ । यिहे दिनसे नेपाल सम्बत अनुसार लौव बर्ष शुरु हुइठ । कठरिया थारुहुकनके लौव बर्षफे यिहे दिनसे शुरु हुइठ । भाईटीका प्रायःकार्तिक शुक्लपक्षके दुसरा दिनअर्थात कार्तिक शुक्लपक्षके द्वित्तियातिथीमे पर्ना करठ । टबमारे भाईटीकाहे हिन्दीमे भैया दूजफे कना करठै । बि.स. अनुसार २०७७ सालमे भाईटीके पहिल दिन परल बा । पहिल दिन नेपाल सम्बतअनुसार लौव बर्ष ११४१ हो । पहिल दिन नेपाल सम्बत शुरु हुइना ओ प्रायःद्वित्तियाके दिन भाईटीका पर्ना हुइल ओरसे नेवार समुदायसे २ गते भाईटीका लगैना निर्णय करल ओ  सरकार २ गते द्वित्तियाके दिन फे बिदा डेना निर्णय करल ।

भाईटीका अर्थात द्वित्तियाके दिन देशके पूर्बी नेपालमे बसोबास कैना थारुहुकनके सामाचकेवाके शुरुवात मानजाइठ कलेसे पश्चिम नेपालमे  बसोबास कैना कठरियाहक्रे  ढिकरी (घुचिया लुटैना) कुलदेवता पुज्न करठै । तृतियाके दिनमे मुर्गा बली डेहुइया मुर्गाके ओ नइडेहुइया मिठाई पुजा करठै । और थारुहुक्रे जैसिक लौव बर्ष माघमे भलमन्साके छनौट करठै, ओसिक कठरिया थारुहुक्रे लौव बर्ष डेवारीमे भलमन्साके छनौट करठै । ओइने कार्तिक शुल्कचतुर्थी तिथिमे गाउँहे आवश्यक पर्ना अगुवा (भलमन्सा, महतो) चुन्न ओ मन्ना करठै । अगुवा चुन्ना ओ मन्न यी चलनहे मिलनीके नाउँसे सम्बोधन करठै । पञ्चमी तिथिमे ओइने भजहर (गाउँभरीके मनै गाउँ बाहेर एक ठाउँमे भेला हुके छलफल कैना ओ पकैना, खैना काम) भग्ना करठै । मने यी बेला बेला ओइनके यी चलन संकटमे परटी जैटी गैल बा । यी बेलाके जन्ना सुनुइया ध्यान डेहे नइसेक्लेसे भर ओइनके अपन यी मना चलनलोप हुइना करिब करिब निश्चित जस्टे बा । कठरिया थारु यिहे कार्तिक शुक्लपक्षमे मग्नी हुसेकलहुकनके बिहा मग्ना (विवाहके तिथिमिति तय कैना) चलन बा ।  

टबमारे कहे सेक्जाइठ, डिया ओ डिपके त्यौहार (तिहार) हे ढेर नेपालीहुक्रे कोई दिपावली, कोई दिवाली, कोई डेवारीके रुपमे चिन्ठै । कुछ काग, कुकुर, गैया, गोरु, भाईके पुजा करके मनैठै । सक्कुहुनके आ अपने तौरतरीका ओ आ अपने मेरके महत्व बा । मने नेवार ओ कठरिया समुदायमे झन यी लौव बर्षके रुपमे स्थापित बा । कार्तिक शुक्लप्रतिपदासे नेवारहुकनके केल लौव बर्ष शुरु नइहुइठ, कठरिया थारुहुकनके  फे लौव बर्ष शुरु हुइठ । ओइने यिहे डेवारीमे ठप मुर्गा वा मिठाई चह्राके कुलदेवताहे पुज्न, नयाँ नेतृत्व चयन कैना, भजहर भग्ना जस्टे महत्वपूर्ण कार्य कैना ओरसे ओरके समुदायमे यी डेवारी आउर भारी महत्व राख्ठ ।        

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