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नीति तथा कानून बनाईबेर नागरिक सहभागितामे जोड

पहुरा | ९ मंसिर २०७७, मंगलवार
नीति तथा कानून बनाईबेर नागरिक सहभागितामे जोड

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, ९ कार्तिक ।
प्रदेश नीति तथा कानून निर्माणमे नागरिक सहभागितासंगे व्यापक छलफल करे पर्ना नागरिक अगुवाहुक्रे सुझाव डेले बाटै ।

इन्सेक सुदूरपश्चिम प्रदेश कार्यालयसे सोम्मारके रोज आयोजना करल एक कार्यक्रममे नागरिक अगुवाहुक्रे उ सुझाव डेहल रहिट ।

सुदूरपश्चिम प्रदेशके शिक्षाविद डा. हेमराज पन्त प्रदेश नीति तथा कानून निर्माणमे नागरिक सहभागिता’ विषयक कार्यपत्र प्रस्तुत करटी जेकर लाग नीति तथा कानून बन्टा ओइनके विना सहभागिता, विना छलफल कराइके नानल कानून अपनत्व महशुस नइहुई सेक्ना बटैलै । उहाँ कहलै, ‘जेकर लाग कानून बनाजाइटा ओइनके सहभागिता, छलफल विन नानल कानून ओइनके अधिकार सुनिश्चित हुई नइसेकी ।’

कार्यक्रममे वकडा पहुना रहल प्रदेश मामिला तथा विद्यायन समितिके सभापति नेपालु चौधरी सुदूरपश्चिम प्रदेशमे सुशासनके प्रत्याभुति कैना सम्बन्धमे व्यवस्था कैना बनल विधेयक २०७५ कर्मचारीके मुरी दुखाई बनल बटैलै । उ विद्येयक २५ प्रतिशतफे कार्यान्वयन नइहुइल बटैलै ।

उहाँ कहलै, ‘प्रदेश सरकार अभिन ४२ ठो कानून बनाइल मने आघे दिनमे जनता सामु पुगके छलफल नइकरलेसे आब बन्ना कानून विद्येयक बनाईबेर व्यापक छलफल कैना प्रयत्न कैजाई ।’

समितिमे सुशासन ओ रेडियो, एफएम व्यवस्था कैना बनल विद्येयकमे नम्मा छलफल हुके प्रदेश सभासे सर्वसम्मतिसे पारित हुइल उहाँ बटैलै । ‘नीति तथा कानून निर्माण प्रक्रियामे कर्मचारीके ढेर दबदबा बा’, समितिके सभापति कहलै, ‘ओइनके जा चाहठै,उहे करके छोरठै ।’

प्रदेश सभा सदस्य पूर्णा जोशी जनताके लाग बनैना कानूनके ड्राफट दुल्ही जस्टे नइनुकुवाके नागरिक समाज ओ सरोकारवाला विच गहन छलफल कैना आवश्यक रहल बटैली । उहाँ सुदूरपश्चिममे लैंगिक हिंसाके घटना बह्रल ओरसे न्यूनिकरणके लाग प्राथमिकता डेके कानून बनैना बटैली ।

प्रदेशसभा सदस्य टेक बहादुर रैका लोक सेवा आयोग विद्येयक बनाईबेर नियतवस सामानुपतिक समावेशी शब्द हटाई खोजल मने विरोधपाछे शंसोधन करके उ शब्द ठपल बटैलै ।

प्रदेश सरकारसे कानून बनाईबेर नागरिक समाजके प्रतिनिधि, सरोकारवालासे छलफल विना ढेर कानून पारित करल उहाँक आरोप बा ।

अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरी बनल कानून कार्यान्वयन नइहुके सरकारके कामप्रति जनताके उदासिनता बह्रल बटैलै । उहाँ कहलै, ‘अब्बे इन्टेशनके आधारमे कानून बनटा जिहीसे छोटहे ऐन, भारीहे चेन हुइल बा ।

अधिवक्ता प्रयागदत्त भट्ट प्रदेश सरकारसे बनाइल ऐन कानूनके प्रचार हुई नइसेकल बटैलै । उहाँ कहलै, ‘कतिपय कानून उप्परसे अइना मने विना छलफल कपीपेस्ट हुइटी पारित हुइना करल बा ।’

याक नेपालके सर्जु प्रसाद चौधरी प्रदेश सरकारसे नानल खाद्य अधिकार ऐन कार्यान्वयन नइहुके किसान मर्कामे परल बटैलै । प्रजातान्त्रिक पद्धतिमे अभिनफे पुराने सिद्धान्त अन्सार चल्टी रहल ओरसे लक्षितवर्गसम योजना पुगे नइसेकल उहाँ कहलै ।

उहाँ कहलै, ‘किसानके लाग अनुदान नन्ना मने मौकाके फाइदा औरजे उठाइटै, अब्बेक ऐन विभेदीकरण बा, जिहीसे आमनागरिक प्रजातन्त्रके अनुभूति करे नइपैले हुइट ।’

अधिवक्ता तुलाराम गिरी पूर्व ओ पश्चिमके संस्कृति रहन सहन फरक रहल ओरसे कानून बनैनासे आघे व्यापक छलफल कैना सुझाव डेलै । उहाँ कहलै, ‘पहिले मुलुकी ऐनके अभ्यास करजाइटेहे अब्बे लागु हुकेफे ओकर कार्यान्वयन नइहुइल हो, २० बरष पुग्लेसे केल भोज कैना कहल बा, मने शैली फरक हुइलेसेफे बालविवाह बह्रल बा ।’

पत्रकार कर्ण शाह कानूनके ड्राफट नानेबेर ओ पारित करेबेर नागरिक समाजसे छलफल आवश्यक रहल बटैलै । उहाँ कहलै, ‘सुदूरपश्चिम प्रदेशमे बनल कतिपय कानून विना जानकारी, विना छलफल पारित हुइल बा, जौन कानून दिगोपन नइरही ।’

ओम जोशी थारु समुदायमे सिकलसेल एनिमियाक समस्या रहल मने सरकारके ओहोर ध्यान नइगैल बटैलै ।

उहाँ कहलै, ‘सुदूरपश्चिम प्रदेश मुक्तकमैया, हलिया लगायतके अभिन समस्या परली बा, यहाँ ढेर कानून बनल मने आबसे आवश्यकताके आधारमे कानून बनैनाफे जरुरी बा ।’

कार्यक्रममे नेपाल पत्रकार महासंघ सुदूरपश्चिम अध्यक्ष अर्जुन शाह, अधिवक्ता हिमालय विक्रम विष्ट, राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग सुदूरपश्चिम प्रदेश कार्यालयके अधिकृत प्रकृति सिंह लगायत नीति कानून बनाईबेर नागरिक सहभागिता सुनिश्चितता कैना प्रदेश सरकारहे सुझाव डेहल रहिट । कार्यक्रममे सहजीकरण इन्सेक सुदूरपश्चिम प्रदेश संयोजक खडकराज जोशी करले रहिट ।

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