थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०३ माघ २६४३, शनिच्चर ]
[ वि.सं ३ माघ २०७७, शनिबार ]
[ 16 Jan 2021, Saturday ]

‘ कविता ’

फुलकुमारीहुक्र

पहुरा | २५ पुष २०७७, शनिबार
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फुलकुमारीहुक्र

सत्य हो इ बाट
हमार पुर्खाओन
इ थारू हो कैख चिन्हैना चिज
एक्ठो भेग्वा फे रह
उ ब्याला पुर्खाओन रहर नाहि
बाढ्यटा रलहिन
मजुबुरि रलहिन
विवसटा रलहिन
आमम्हि कहबेर गरिबीपन रलहिन
भेग्वा लगाइ पर्ना
पुट्ठा डेखाइ पर्ना
कर्रा चुट्टर डेखाइ पर्ना
लाज डेखाइ पर्ना
मने आज
कौनो बाढ्यटा नै हो
कौनौ विवसटा नै हो
कौनौ मजबुरि नै हो
केक्रो डबाब नै हो
केक्रो करकाप फे नै हो
यिहाँ ट राटाराट चम्कना
सक्कुनक मुहम बज्कना
सरक भिट्टम टल्कना
सिसाम डेख पर्ना
लाज छ्वाप नि सेक्ना भेग्वा लगैना
कुछ सोभा नि डेना पुस्टा हिलैना
कर्या कर्या चुट्टर डेखैना
यिहाँ ट केवल रहर चलल बा
हो संघारी,
इहाँ केवल रहर चलल बा
इहाँ पस्चिउहा नङ्गा बयाल बहल बा
गीतके कुछ भाव नै हो
गीतके कुछ लय नै हो
शब्दमे कुछ अर्थ नै हो
माघी रे कहटि आपन अंगिया मसर्टि
फुलकुमारीहुक्र झ्वाँट फेक्रैल
बाँदर हस उल्रटि
नङ्गा नाच नच्ना रहर चलल बा
हो रहर चलल बा ।

दाङ

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