थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०३ माघ २६४३, शनिच्चर ]
[ वि.सं ३ माघ २०७७, शनिबार ]
[ 16 Jan 2021, Saturday ]

माघ, माघी ओ थारु समुदाय

पहुरा | २६ पुष २०७७, आईतवार
  • 497
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    497
    Shares
माघ, माघी ओ थारु समुदाय

माघ लहैली सुरिक सिकार ख्रैली रे हाँ,
सखिए हो, माघक पिलि गुरी गुरी जार …।

यी गीत थारु गाउँबस्ती चारु ओर गुन्जटी रहल बा । यी थारुहुकनके मघौटा गीत हो । थारु समुदायमे विशेष करके माघ सम्वन्धी मघौटा, ढमार, डफ गीत गैना करजाइठ । काल्हके दिनमे गाउँघरमे मुखाग्र घन्कन यैसिन गीत आजकाल्ह सामाजिक सञ्जाल युट्युब, मञ्चमे टाटल बा । टबमारे यकर महत्व बढटी जैटी रहल अनुभूत करे सेक्जाई ।

कौनोफे जटरा समुदाय कटरा बल्गर, सुसंस्कृत, मौलिकपन, सभ्य, चम्पन, ओ सशक्त बा कना बाट उ जातिके लोक साहित्य, संस्कृति,चाडपर्व, कटरा बा कना एक सूचक मानजाइठ । थारु जातिके अपने भाषा, संस्कृति, कला, साहित्य, सामाजिक रहनसहन, भेषभुषा, मुल्य मान्यता, लवाइ खवाइ, नाचगान, पूजापाठ, देवीदेवता आदि रहल बटै । थारु समुदायमे मौसम ओ समयअन्सार चाडपर्व मनैना फरक फरक नाचगान कैना चलन बा । ओस्टेक थारुहुकनके मौलिक पहिचान बोकल महान राष्ट्रिय पर्व माघ पर्व हो । यी पर्वहे स्थान विशेष माघ, माघे सक्रान्ति, पूर्वमे तिला संक्राइन्त, रुपन्देही, चितवनओर खिचडी पर्व आदि नाउँसे चिनजाइठ । माघ पर्व कहिके दाङसे पश्चिम क्षेत्र पश्चिमा थारुहुक्रे मनैना माघ पर्व हो । हाल यी पर्व पूर्व मेचीसे पश्चिम महाकालीसम लौव वर्ष उन्मुक्ति दिवस एवम् सदभावके रुपमे मनैना साझा पर्व हो ।

वर्तमान समयमे थारु संवतके फे चर्चामे बा । लावा वर्षके रुपमे मनैना माघ पर्व यी वर्षके थारु संवत २६४४ कना उल्लेख करल बा । माघ १ गते देशमे टमान स्थान लगायत काठमाडौँके टुडिखेल, देश विदेशमेफे यी पर्वके उत्सवसे देश माघीमय बनल रहठ । माघसे सूर्य दक्षिणायनसे उत्तरायन हुइटी दिन छोट ओ रात नम्मा हुइना मौसममेफे परिवर्तन हुइना गरमफे बह्रटी जैना करठ । माघ वा माघी पर्व का हो टे ? कना सवालमे अब्बे थारुहुकनके बौद्धिक वर्गमे बहसके विषय बनल बा । सामाजिक सञ्जाल, मिडिया एवम् टमान कार्यक्रममे समेत माघ पर्व कि माघी पर्व कना तर्कविर्तक चलल विल्गाइठ । खासमे थारुहुक्रे माघ पर्व मनैठै । माघी दिवानी पर्व फे कना करल पाजाइठ । खस भाषीहुक्रे थारुहुकनके यी पर्वहे माघी पर्व हो कना करठै । जस्टे बरघर शव्दहे बडघर लिखना भाषाप्रतिके अतिक्रमण हुइटी रहल चिन्तन उठ्नु स्वभाविक हो । भाषाके नियम जटिलसे सरलओर उन्मुख हुइठ । समयके परिवर्तनसंगे परिवर्तन हुइनामे थारु साहित्यकर्मी, भाषाविद अल्माई नइपरठ । कमिकमजोरी सुधारे परठ । वास्तवमे माघ पर्व थारुहुकनके मौलिक नाम हो कलेसे माघके दुसरा दिनहे माघी दिवानी कहठै । टबमारे यी विषयमे ढेर बहस कैना जरुरी नइहो ।

माघ पर्वके भारी सामाजिक महत्व बा । यी पर्वसे थारु जातिमे रमाइलो ओ रमझम केल डेके नइजाई, बरु यी पर्व थारु जातिमे आपसी मेलमिलाप, सदभाव, मानमर्यादा, सेवा सत्कार, आदर सम्मान, नैतिक पाठ सिकाके जैना करठ । खास करके माघ पर्व पुसके २७ गतेसे माघके पहिल अठुवारसम टमान रुपमे मनैना करजाइठ । जौन माघ १ गतेहे प्रमुख रुपमे लेजाइठ । तिथिअन्सार यी दिन मकर सक्रान्ति परठ । यी दिन कौनोफे बली चढैना वा काटमार करे नइपरल कना सामाजिक मान्यता हुइल ओरसे थारुहुक्रे पुसके २७ गते मच्छरी मरना, २८ गते पिठा पिस्न ओ अन्तिम दिन जिता मारके (सुँगुर वा सुव्वर कट्न) और सामग्रीके ठिकठाक पारसेकल रहठै ।

विशेषतः यी पर्व मनाइक लाग कम्तिमे एक महिनासे तयारी कैना प्रचलन रहटी आइलफे हाल वर्तमान समयमे यम्ने परिवर्तन हुइल विल्गाइठ । संस्कृति वैज्ञानिक सापेक्षतामे आघे परठ । काल्हके माटीक घरके ठाउँमे ढलान घर, गुँदरी, पिर्काके स्थानमे कुर्सी, काठीक चुल्हाके ठाउँमे ग्यास, आदि परिवर्तन हुइल जस्टे माघ पर्व तयारी ओ मनैना बाटमे कुछ परिवर्तन आइल बा । पहिले जस्टे जाँड डारु, काठीके व्यवस्था, वनुवा पटिया टुरके नानके डोनिया टेपरी गाँस्न, लाहीके तेल पेरना, कुलुवामे मच्छरी मर्ना आदि बाटमे अब्बे आके विस्तारे परिवर्तन हुइल विल्गाइठ । यैसिन हुइनामे वर्तमान समयमे थारु समुदायफे टमान पेशा व्यवसाय, रोजगार आदिमे संलग्न हुइनाफे हो ।

चाडपर्वहे समय सान्दर्भिक बनैटी लैजैना लावा पुस्ताके दायित्व ओ कर्तव्य हो । आजके थारु युवा पिंढीमे भाषा साहित्य, कला, संस्कृति, रहनसहनप्रति चासो ओ चिन्तन करल नइपाजाइठ । युवा पुस्ताहे थारु चाडपर्व, संस्कृति बारे बाट बुझाई नइसेक्ना, युवा पिंढी अपन संस्कृतिप्रति वेवास्ता कैना, राज्यफे थारुहुकनके संस्कृतिप्रति उदासिन हुइनासे माघ पर्व लगायत थारुहुकनके हरेक संस्कृति संरक्षणमे गम्भीर चुनौती ठपडेहल बा । यहोर राज्यके ध्यान जैना जरुरी बा ।

लावा पुस्ता ओ पुराना पूर्खाहुकनके आ–अपन मूल्य मान्यता रहठ । मने चाडपर्वके मौलिकपनहे छोरे नइपरठ जौन बाट हमार अस्तित्व, प्रतिष्ठा ओ पहिचानसंगे गाँसल रहठ ।

माघके सुरुवातीमे पुसके अन्तिम दिन जिता मर्ना (सुव्वर मरना) उ दिन माघक टिप्पा चखुइया निहुमे अनदिके झोल ओ सुव्वरके शिकार खैना ओ साँझ बरघरके घरमे जम्मा हुके ढुमरु गीत गैना, डफ बाजा बजाके ढमार गैना चलन बा । रातभर मघौटा, झुमरा, छोक्रा नाँचसे गाउँमे रौनकता डेहठ । सकारे मरगी बोलल पहिल प्रहरसंगे माघ १ गते लावा वर्ष सुरु हुइल मानजाइठ । सकारे घरेम छोट बर मनै सक्कु जाने तामाके पैसा लेके लडियक दोभानमे बाजागाजासहित लहाई जैना करठै । लग्गेक कुवा, घाट, लहैना ओ लहासेकलपाछे एक ठो लोहोटा, केुछ सिक्का पैसा, फूल, अक्षता ओ जल धारके लडिया घाटमे पुजापाठ करके अपने चाउरके उज्जर टिका लगाके डाजुभैयाहे लगाके ढोग स्यावा लागके घर लौटना करटै ।

घरेम निस्राउके सरसामे तयार पारल रहठ । निस्राउ कहलेक ३ ठो ढकियाके अलग अलग नोन, मास, चाउर रहठ । घरेक डाजुभैया दुनु हातसे उन्जारा भरके ३ चो निकालके छुट्याइठ ओ पाछे अपन डिदी बहिनीहुकनहे उपहार स्वरुप डेना चलन बा । यी डाडुभैया ओ डिडी बहिनी बिचके आत्मीयतासे सम्बन्ध प्रगाढ जीवन्त बनइठ । माघ १ गते सकारे घरेम ढोग स्यावा लग्ना ओ टमान परिकार अनदिके झोल, ढिक्री, शिकार मच्छरी, रोटी, तिलके लड्डु, तरुल, सखरखण्ड, अनदिके उसनल भात, खिचडी आदि खैना गाउँके भारी मान्यजनसंग ढोग करटी आशीर्वाद लेना करठै ।

माघके दुसरा दिन माघी दिवानीमे डाडुभैया डिडीबहिनीहे निस्राउ पुगाई जैना, घरमे गधुरिया छन्ना, घरेम केकररो भोज कैना, साहुमहाजन किहीसे व्यवहार कैना, घर अलगैना की नइअलगैना, घरेक लेनदेन, अइना वर्षके योजना बनैना जैसिन टमान समसामयिक विषयमो छलफल करके टुङ्गो लगाजाइठ । तल्कालीन समयमे वर्षभर कैना यैसिन बाटके सुरुमे व्यवस्थापन कैना थारुनके यी चलन अब्बे फे ओत्रही सान्दर्भिक बा । कौनोफे कार्य अपर्झट निर्णय कैनासे पहिले योजना बनैना बुद्धिमानी कार्य हो ।

विशेषतः माघके टेसर डिनसे सातौँ डिनसम गाउँघरके सामूहिक कामकाज साझा विषयमे छिनोफानो लगैना करजाइठ । गाउँके बरघर छान्ना, कुलोपैनी बनैना, बेठ बेगारी, देउथान भुइह्यार, गुरुवा छान्ना छोरना कि नैछोरना जैसिन विषयवस्तुमे गाउँके बखेरीसे टुङ्गो लगैना थारुहुक्रे सदियोसे प्रजातान्त्रिक अभ्यास करटी आइल पुष्टि हुइठ । हाल वर्तमान संघीय व्यवस्थामे समेत यैसिन लोभ लग्टीक समाज सुधार करना परम्परागत बरघर प्रणालीसे कानुनी मान्यता नैपाइबेर यी प्रचलन प्राय लोप हुइटीरहल बा । युवा पुस्ता औरे जातिके प्रभावसे चाडवाड संस्कृति मनैना जैसिन बाट औपचाकितामे सीमित कैना, थारुनके महान टिहुवारमे समेत राज्यसे गम्भीर नैहुइना,थारु कर्मचारीनहे बिडा नैडेहेल ओरसे टीहुवार मनैना फेन समस्या हुइटीरहल बा । प्रदेश नं ५ से थारु कर्मचारीहे दुई डिन बिडा डेहलमे सकारात्मक रुपमे लेहे परट । कर्णाली प्रदेशसे फे अल्पसंख्यक रुपमे रहल सुर्खेतके थारुनप्रति न्यायिक व्यवहार कैना जरुरी बा ।

यैसिके माघ टीहुवारके महत्व थारु समुदायमे ज्याडा रहल बा । यी टीहुवार सांस्कृतिक दृष्टिकोणसे समेत ओत्रही महत्वपुर्ण बा । आपन–आपन उमेर समूहके झुण्ड बनाके नाचगान कैना, सक्कुहनहे एक सुत्रमे बहन्ना, सामाजिक सद्भाव, सहिष्णुता, समझदारीके विकास करैनाके संगे सक्षम नेतृत्व छान्नाा, आपन गाउँघरके पूर्वाधारके योजना बनैना जैसिन महत्वपूर्ण कार्यसे यी टीहुवारके गरिमाके महत्व कम नैहुइल पुष्टि हुइठ ।

  • 497
    Shares

जनाअवजको टिप्पणीहरू