थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०३ माघ २६४३, शनिच्चर ]
[ वि.सं ३ माघ २०७७, शनिबार ]
[ 16 Jan 2021, Saturday ]

डेहरि हेरके टिह्वार मनाइ

पहुरा | २९ पुष २०७७, बुधबार
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डेहरि हेरके टिह्वार मनाइ

नेपालीमे एकठो कहकुट बा, ’घाँटी हेरी हाड निल्नु’ इहि थारुमे सोझौला रुपसे उल्ठा कर्लेसे घेंचा हेरके हड्डि लिलि कहे सेक्जाइठ । याने कि अपन औकाट अन्सार व्यवहार करि ।

कौनो जबाना रहे, सर्वसाढारन थारुन्के घरेम सुरिक सिकार रिझक लग फेन माघ हस टिह्वार आइ परे । भारि पहुना अइलेसे फेन मुर्गा मर्ना अप्ठ्यार लागे । काजे कि उहे मुर्गा बेच्के घर व्यवहार चलाइ परे । ओहेसे फेन मुर्गा नै मारके नै हुइना पहुनन ’मुर्गन्नि पहुना’ कहि गैल हुइ । मने बोइलर क्रान्तिले आब सिकार सस्टा गैल । ओहेसे घेंचा हेरके हड्डि लिलि कना कहकुट आब पुरान हुइ लागल । काजेकि मनै रोज्डिन हस मुर्गिक घेंचा, मुँरि खाइ लग्लाँ ।

नेपाली कहकुटहे हम्रे सोझौला रुपसे उल्ठा कर्नासे फेन आब थारुपन हुइल कहकुट बनाइ पर्ना बिल्गाइठ । जस्टे कि ’घाँटी हेरी हाड निल्नु’ कहकुटहे ’डेहरि हेरके टिह्वार मनाइ’ मौलिक थारु कहकुट बनाइ सेक्जाइठ । भर्कन चब्डलमे डेहरि भरल बा कहे नै सेक्जाइठ । डेहरिक आन उभुक्लेसे धान कौन गतिमे झरटा, उहिले डेहरि भरल नै भरल भन्सहरिन अनुमान लगाइ सेक्ठाँ । पहिले रुप्या पैसक जबाना नै रहल बेला धानले व्यवहार कै जाए ।

अभिन फेन बाजिनसे धानेले सिढ्रा लेना थारुनके बान कहाँ छुटल बा जे । डेहरिक आन ठम्हलमे फेन धानेलेके सिढरा खउइउया परिवार भुँखे नै मुइ टे के मुँइ ?

थारुनके बहुटसे पुर्खा रिनमे डुबल कारन ’डेहरि हेरके टिह्वार मनाइ’ नैसेक्लक ओर्से फेन हो । भोज बियाह करेबेर अनावस्यक खर्च कैके बहुट जे रिनमे डुब्लाँ । वचत कर्ना थारु समुदायमे बाने नै रहे । खुसिक बाट आब गाउँ गाउँमे वचत समुह खुलटा । थारुनके बाहुल्य रहल धनगढीके नमस्ते बचत तथा ऋण सहकारी संस्था भर्खर साधारण सभा कैके १४ करोडसे ढिउर बचत कैनाके साथसाथे २४ करोडसे ढिउर रिन प्रवाह करल समाचार बा । थारुनके बाहुल्य रहल घोडीघोडा लघुवित्त सन्चालनमे बा । इ कुछ उडाहरनले थारु समुदायमे वचत कर्ना बानके विकास हुइटा कना डेखाइठ । इ वचत अभियानले फेन डेहरि हेरके टिह्वार मनाइक लग सचेत कराइटा ।

कमैना किल नाहि वचत कैना आम्दानी बह्रैना हो । आइ माघ टिह्वारमे सबजे एकठो प्रण करि । आबसे डेहरि हेरके टिह्वार मनाइल जाइ । ठोरबहुट नियमित वचत जरुर करल जाइ ।

माघ टिउहारमे थारु गाउँघरके वार्षिक समिक्षा फेन कै जाइठ । बरघरके मजा नैमजा बाटेम गाउँक गर्ढुरियन खुलके मनक बाट कहना छुट पैठाँ । पहुरा दैनिकके खुराक पाठकहुक्रन कसिन लागठ ? हमार बारेम फेन समिक्षा करक ना बिसै्रबि । अन्टमे, पहुराके सक्कु पाठक, विज्ञापनदाता, सुभेक्छुकन माघ टिह्वारके बहुट बहुट शुभकामना । सब्के माघ मजा होए ।

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