थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०३ माघ २६४३, शनिच्चर ]
[ वि.सं ३ माघ २०७७, शनिबार ]
[ 16 Jan 2021, Saturday ]

थारु समुदायमे आझुसे माघी टिहुवार सुरु

पहुरा | २९ पुष २०७७, बुधबार
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थारु समुदायमे आझुसे माघी टिहुवार सुरु

पहुरा समाचारदाता
धनगढी,२९ पुस ।
थारु समुदायमे आझुसे माघी टिहुवार सुरु हुइल बा । यी समुदायसे लावा बरसके रुपमे मजाजैना माघी टिहुवार पुस २९ गतेसे सुरुवाट हुइल हो । माघी टिहुवार अइना एक दिन आघे पुस अन्तिम रोज सुव्वर मारके खैना रहरङगी कैना, रातभर माघी सम्वन्धी मघौटा, ढमार, डफ गीत गैना करजाइठ ओ सकारे ३÷४ बजेओर पवित्र लडियामे लहाई जैना चलाउ रहल थारु कल्याणकारिणी सभाके केन्द्रीय सदस्य प्रभातकुमार चौधरी बटैलै ।

लावा वर्षके रुपमे मनैना माघी टिहुवारसंग यी वर्षके थारु संवत २६४४ सुरुवाट हुइना बा । माघी टिहुवारके भारी सामाजिक महत्व रहठ जौन टिहुवारसे थारु जातिमे रमाइलो ओ रमझम केल डेके नइजाई, बरु यी पर्व थारु जातिमे आपसी मेलमिलाप, सदभाव, मानमर्यादा, सेवा सत्कार, आदर सम्मान, नैतिक पाठ सिकाके जैना करठ ।

खास करके माघ पर्व पुसके अन्तिम दिनसे माघके पहिल अठुवारसम टमान रुपमे मनैना करजाइठ । जौन माघ १ गतेहे प्रमुख रुपमे लेजाइठ । तिथिअन्सार यी दिन मकर सक्रान्ति परठ । यी दिन कौनोफे बली चढैना वा काटमार करे नइपरल कना सामाजिक मान्यता हुइल ओरसे थारुहुक्रे पुसके २७ गते मच्छरी मरना, २८ गते पिठा पिस्न ओ अन्तिम दिन जिता मारके (सुँगुर वा सुव्वर कट्न) और सामग्रीके ठिकठाक पारसेकल रहठै ।


विशेषतः यी पर्व मनाइक लाग कम्तिमे एक महिनासे तयारी कैना प्रचलन रहटी आइलफे हाल वर्तमान समयमे यम्ने परिवर्तन हुइल विल्गाइठ । संस्कृति वैज्ञानिक सापेक्षतामे आघे परठ । काल्हके माटीक घरके ठाउँमे ढलान घर, गुँदरी, पिर्काके स्थानमे कुर्सी, काठीक चुल्हाके ठाउँमे ग्यास, आदि परिवर्तन हुइल जस्टे माघ पर्व तयारी ओ मनैना बाटमे कुछ परिवर्तन आइल बा । पहिले जस्टे जाँड डारु, काठीके व्यवस्था, वनुवा पटिया टुरके नानके डोनिया टेपरी गाँस्न, लाहीके तेल पेरना, कुलुवामे मच्छरी मर्ना आदि बाटमे अब्बे आके विस्तारे परिवर्तन हुइल विल्गाइठ । यैसिन हुइनामे वर्तमान समयमे थारु समुदायफे टमान पेशा व्यवसाय, रोजगार आदिमे संलग्न हुइनाफे हो ।

चाडपर्वहे समय सान्दर्भिक बनैटी लैजैना लावा पुस्ताके दायित्व ओ कर्तव्य हो । आजके थारु युवा पिंढीमे भाषा साहित्य, कला, संस्कृति, रहनसहनप्रति चासो ओ चिन्तन करल नइपाजाइठ । युवा पुस्ताहे थारु चाडपर्व, संस्कृति बारे बाट बुझाई नइसेक्ना, युवा पिंढी अपन संस्कृतिप्रति वेवास्ता कैना, राज्यफे थारुहुकनके संस्कृतिप्रति उदासिन हुइनासे माघ पर्व लगायत थारुहुकनके हरेक संस्कृति संरक्षणमे गम्भीर चुनौती ठपडेहल बा । यहोर राज्यके ध्यान जैना जरुरी बा ।

लावा पुस्ता ओ पुराना पूर्खाहुकनके आ–अपन मूल्य मान्यता रहठ । मने चाडपर्वके मौलिकपनहे छोरे नइपरठ जौन बाट हमार अस्तित्व, प्रतिष्ठा ओ पहिचानसंगे गाँसल रहठ । माघके सुरुवातीमे पुसके अन्तिम दिन जिता मर्ना (सुव्वर मरना) उ दिन माघक टिप्पा चखुइया निहुमे अनदिके झोल ओ सुव्वरके शिकार खैना ओ साँझ बरघरके घरमे जम्मा हुके ढुमरु गीत गैना, डफ बाजा बजाके ढमार गैना चलन बा । रातभर मघौटा, झुमरा, छोक्रा नाँचसे गाउँमे रौनकता डेहठ । सकारे मरगी बोलल पहिल प्रहरसंगे माघ १ गते लावा वर्ष सुरु हुइल मानजाइठ । सकारे घरेम छोट बर मनै सक्कु जाने तामाके पैसा लेके लडियक दोभानमे बाजागाजासहित लहाई जैना करठै । लग्गेक कुवा, घाट, लहैना ओ लहासेकलपाछे एक ठो लोहोटा, केुछ सिक्का पैसा, फूल, अक्षता ओ जल धारके लडिया घाटमे पुजापाठ करके अपने चाउरके उज्जर टिका लगाके डाजुभैयाहे लगाके ढोग स्यावा लागके घर लौटना करटै ।


घरेम निस्राउके सरसामे तयार पारल रहठ । निस्राउ कहलेक ३ ठो ढकियाके अलग अलग नोन, मास, चाउर रहठ । घरेक डाजुभैया दुनु हातसे उन्जारा भरके ३ चो निकालके छुट्याइठ ओ पाछे अपन डिदी बहिनीहुकनहे उपहार स्वरुप डेना चलन बा । यी डाडुभैया ओ डिडी बहिनी बिचके आत्मीयतासे सम्बन्ध प्रगाढ जीवन्त बनइठ । माघ १ गते सकारे घरेम ढोग स्यावा लग्ना ओ टमान परिकार अनदिके झोल, ढिक्री, शिकार मच्छरी, रोटी, तिलके लडडु, तरुल, सखरखण्ड, अनदिके उसनल भात, खिचडी आदि खैना गाउँके भारी मान्यजनसंग ढोग करटी आशीर्वाद लेना करठै ।

माघके दुसरा दिन माघी दिवानीमे डाडुभैया डिडीबहिनीहे निस्राउ पुगाई जैना, घरमे गधुरिया छन्ना, घरेम केकररो भोज कैना, साहुमहाजन किहीसे व्यवहार कैना, घर अलगैना की नइअलगैना, घरेक लेनदेन, अइना वर्षके योजना बनैना जैसिन टमान समसामयिक विषयमो छलफल करके टुङो लगाजाइठ । तल्कालीन समयमे वर्षभर कैना यैसिन बाटके सुरुमे व्यवस्थापन कैना थारुनके यी चलन अब्बे फे ओत्रही सान्दर्भिक बा । कौनोफे कार्य अपर्झट निर्णय कैनासे पहिले योजना बनैना बुद्धिमानी कार्य हो ।


विशेषतः माघके टेसर डिनसे सातौँ डिनसम गाउँघरके सामूहिक कामकाज साझा विषयमे छिनोफानो लगैना करजाइठ । गाउँके बरघर छान्ना, कुलोपैनी बनैना, बेठ बेगारी, देउथान भुइह्यार, गुरुवा छान्ना छोरना कि नैछोरना जैसिन विषयवस्तुमे गाउँके बखेरीसे टुङो लगैना थारुहुक्रे सदियोसे प्रजातान्त्रिक अभ्यास करटी आइल पुष्टि हुइठ । हाल वर्तमान संघीय व्यवस्थामे समेत यैसिन लोभ लग्टीक समाज सुधार करना परम्परागत बरघर प्रणालीसे कानुनी मान्यता नैपाइबेर यी प्रचलन प्राय लोप हुइटीरहल बा ।

युवा पुस्ता औरे जातिके प्रभावसे चाडवाड संस्कृति मनैना जैसिन बाट औपचाकितामे सीमित कैना, थारुनके महान टिहुवारमे समेत राज्यसे गम्भीर नैहुइना,थारु कर्मचारीनहे बिडा नैडेहेल ओरसे टिहुवार मनैना फेन समस्या हुइटी रहल बा ।
यैसिके माघ टिहुवारके महत्व थारु समुदायमे ज्याडा रहल बा । यी टीहुवार सांस्कृतिक दृष्टिकोणसे समेत ओत्रही महत्वपुर्ण बा । आपन–आपन उमेर समूहके झुण्ड बनाके नाचगान कैना, सक्कुहनहे एक सुत्रमे बहन्ना, सामाजिक सद्भाव, सहिष्णुता, समझदारीके विकास करैनाके संगे सक्षम नेतृत्व छान्नाा, आपन गाउँघरके पूर्वाधारके योजना बनैना जैसिन महत्वपूर्ण कार्यसे यी टिहुवारके गरिमाके महत्व कम नैहुइल पुष्टि हुइठ ।

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