थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत २० फागुन २६४४, बिफे ]
[ वि.सं २० फाल्गुन २०७७, बिहीबार ]
[ 04 Mar 2021, Thursday ]
‘ अन्तर्वार्ता ’

भाषा साहित्यफे हमार संस्कृति हो

पहुरा | १० माघ २०७७, शनिबार
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भाषा साहित्यफे हमार संस्कृति हो

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’ सुर्खेतके वीरेन्द्रनगर नगरपालिका वडा नम्बर २ लौवस्तामे जन्मल स्रस्टा हुँइट । बाबा सुकलाल थारु ओ डाइ बेलौरी थारूके छोट्का छावक् रुपमे वि.स. २०३७ असार १२ गते जन्मलक साहित्यकार ‘पन्ना’ के ढुकढुकी (कविता संग्रह २०५७), किसानके जिन्दगी (खण्डकाव्य २०६१), भ्यावक घर (गीति एल्वम २०६४), ककन्डरान छोट्की (कथा सङ्ग्रह २०७०), थारु सख्या नाच गीत (लोककाव्य २०७०), एक गोरुक बट्कुही (संयुक्त हास्यव्यङ्ग्य संग्रह २०७५) प्रकाशित बटिन् । उहाँक् फुटकर कविता, गजल, लेख, रचना तमान पत्रपत्रिकामे प्रकाशित हुइटी बटिन् । उहाँ थारु भाषा तथा साहित्य संरक्षण मञ्च देउखर दाङसे वि.स. २०७० ओ जंग्रार साहित्यिक बखेरी साहित्यिक सम्मेलन २०७७ बर्दियासे सम्मानित होसेकल बटैं । आझ उहाँसे पहुरा दैनिकमे साहित्य सम्बन्धी समसामयिक विषयवस्तुमे पत्रकार सागर कुश्मीसे छोटमिठ बातचित यहाँ प्रस्तुत कैगैल बा ।

अप्नेक साहित्यमे कहियासे लग्ली ?

– कक्षा ९ म पह्र ब्याला सुर्खेतम गोचाली परिवारके आयोजनाम कविता ओ गीत प्रतियोगिता वि.स.२०५२ तिलपुर म हुइल रह । तब मै जान नाजान गीत लेख्नु चेलिनके विलौना । द्वितीय स्थान हासिल करल । ओठेसे कभु कभु डायरीम कविता लिखुँ । पाछ खासे चासो निरह तर विद्यार्थी जीवनम उच्च शिक्षा लेना क्रमम क्याम्पस पह्रबेर फेनसे लग्लक हुइटुँ । खास कैक तमान जिल्लासे सुर्खेत शिक्षा क्याम्पस ओ बहुमुखी क्याम्पसम पह्र अइलक थारु विद्यार्थीनके थारु विद्यार्थी युवा परिवार कना एकठो विद्यार्थी संगठन रह । ओ फोरम मार्फत समय समयम तमान कार्यक्रमके आयोजना कैजाए ओहव्याला संघरेनके रचना सुन्ना सुनैना क्रमम लिख्ना सुरुवात कैगिल । ओसहँख काठमाडौंसे प्रकाशित हुइना बिहान पत्रिका कृष्णराज सर्वहारी दाजुसे कुछ अंक मिलल । उहाँफे साहित्य लिख्नाम हौस्यैना काम कर्ठ । अस्टहँ साहित्यिक गतिविधि माहोलले साहित्य ओहँर लग्लक हो ।

अप्नेक खास कैक कौन कौन विधामे कलम चलैल बटी ? सबसे पाछेक् कृति कौन हो, कसिन प्रतिक्रिया पैली ?

– मै सुरु सुरुम साहित्यम लाग ब्याला कवितामसे हुइल । पाछ रसरस कथा, एकांकी निबन्ध विधाम कलम चलैटी आइल बाटुँ । हाल सबसे पाछक् कृति कहबेर एक गोरुक बट्कुही (हाँस्यव्यङ्ग्य सङ्ग्रह २०७५) हो । यी कृति पत्रकार तथा साहित्यकार डा. कृष्णराज सर्वहारी ओ म्वार संयुक्त रुपम प्रकाशित पोस्टा हो । एकर बारेम मजा प्रतिकृया आइल बा । यी कृतिम व्यङ्ग्यात्मक शैलीम सामाजिक, राजनीतिक, एवम् सांस्कृतिक विविध क्षेत्रम डेख परल विकृति, विसंगगतिप्रति घोंचपेच करल व्यङ्ग्यात्मक विधा हो । यी कृति पहु्रइया पाठक बहुत आनन्दित हुइलक बात सुनैठ ।

अप्नेक सुर्खेत जिल्लामे थारु भाषा साहित्यम कलम चलैना सशक्त व्यक्तित्व हुइटी । अपन संगसंग लावा युवा पुस्ता जन्मैल बटि कि नाइ ?

– आबक लाग मै किल बाटुँ कना निहो । छिटपुट रुपम ढेर स्रस्टा बाट, मने कृतिके रुपम प्रकाशित नैआइल हुइन् । लेखक कवि, साहित्यकार जन्मैना बात निहो । यी आपन रुचि क्षमता, इच्छा शक्तिसे भाषा साहित्यके सेवा कर्ना हो । काल्हिक दिनम कोइ अइही अस्रा करी । हम्र आशावादी हुइ परठ ।

अब्बेक् अवस्थामे समाज परिवर्तन ओ थारु भाषा साहित्य विकासके लाग कसिन साहित्य सिर्जना कर्लसे समाजम परिवर्तन करे सेक्जाइ ?

– हेरि सागरजी, साहित्य कलक समाजके ऐना हो । साहित्यम देश, काल, वातावरण अनुसार समाजके यर्थाथ कर्ना हो । सामाजिक, सांस्कृतिक रुपान्तरणके बात लानदेना हो । समाजम रलक विकृति, विसंगगति, दुःखपिर, भोगाइ देखा देना हो । समाज परिवर्तनम त साहित्य अवश्य प्रभाव पारठ । समाजम जागरुकता, सचेतना अन्ना काम साहित्य करठ तर(बाँकी ३ पेजमे) समाज परिवर्तन कर्ना, समाज विकास कर्ना त राजनीतिक पाटोके हुइ । साहित्य त विचार, दर्शन, दृष्टिकोण, सन्देश छोरडेना काम करठ ।

साहित्य लेखनके दौरानमे बिस्राइ नैसेक्ना कौनौ यादगार क्षण बा ?

– साहित्य सिर्जनाके क्रम अविष्मरणीय क्षण ढेर बा । उ मध्ये वि.स. २०७० सालके घटना हो । थारु पत्रिका बिहानम म्वार लिखल डुबाइल डिल्ली कना कथा प्रकाशित हुइल रह । ठ्याक्क उ कथाके विषयवस्तु, पात्र, घटना मिल्लक कारण महिसे विवाद कर्ना मनसायले म्वार घर आखन किताब किन अइल । ट्वार कथा लिख्देहल टोही समस्या आइसेकी हमार व्यवसायम असर परि कलक कारण एक जन म्वारठे अइल तर पात्र ओ परिबेश काल्पनिक रह । उ मनैंयँक जिवनम मेल खैलिस पाछ माफ माङ्ख गिल ।

सुर्खेतमे थारु साहित्यके अवस्था कसिन बा ? लखागिन थारु साहित्य श्रृङ्खला कहाँ पुगल ?

– आब सुर्खेतम थारु साहित्यके अवस्था कहबेर मै कलम चलैटी बाटँु । कभु रफ्टार बह्र स्याकट कभु कम हुइठ । यी त स्वाभाविक प्रक्रिया हो । आझकाल कलम चलुइया युवा पुस्ताके कमि बा । साहित्यकार सोम डेमनडौराके सक्रियताम लखागिन साहित्य श्रृङ्खला २०७६ माघसे सुरुवात कर्ली । भर्खर दुइठो भाग चलैली त कोरोनाके कारण स्थगित हुइल । हालसम चल निसेक्ल हो । आब फेनसे सुरुवात कर्ना योजना बा ।

अप्नेक नम्मा समयसे थारु साहित्यमे कलम चलैटी बटी ? अप्नेक विचारमे साहित्य कलक का हो ?

– हेरि सागरजी, साहित्य कलक समाजके ऐना हो, सर्जकके सिर्जना हो । साहित्यम देश ओ समाजके दुख सुख, उत्पीडन, पिडा, समस्या, व्यथा, अनुभूति, भोगाइ यावत पक्षके यर्थाथ चित्रण करठ । साहित्यमसे असिन पक्ष देखैना, समाजके यर्थाथ ओ वास्तविकता पाठकके सामु लानदेना हो । साहित्यले भाषा संरक्षण सर्वद्धनम महत्वपूर्ण भूमिका ख्यालठ ।

समग्र थारु साहित्यके भविष्य कसिन डेख्ठी ?

– समग्र थारु साहित्यके अवस्था सन्तोषजनक बा । हम्र आशावादी हुइ परठ । जत्रा हुइ पर्ना हो ओत्रा निहुइल हो । निराशा हुइ पर्नाफे अवस्था निहो । लौव लौव स्रस्टा जन्मटि बाट । समुदायफे आपन भाषा संस्कृतिह मैयाँ कैदेहे परल । पहर्ना मनै पहर्ख, लिख्ना मनै लिख्ख, लगानी कर्ना मनै लगानी कैख, यिहीसे उपर उठाइ परल ।

अभिनसम सुर्खेत थारु भाषक पत्रिका कौनौफे प्रकाशित नैहो ? यी बारेम अप्नेक प्रयास का हुइल बा ?

– सुर्खेतम थारु पत्रिका प्रकाशन काम वि.स. २०५७ सालम डौना बेबरी कना थारु विद्यार्थी युवा परिवार कना विद्यार्थी संगठनके संघरेन सुरु कर्ल । पाछ नियमित हुइ निस्याकल । पाछ म्वार सम्पादनम २ अंक थाकस, सुर्खेत प्रकाशन करल । दुखक् बात निरन्तरता निहुस्याकल ।

जैटीजैटी पहुरा दैनिक पत्रिकामार्फत कुछ कहे पर्ना बा कि ?

– सबसे पैल्ह त पहुरा थारु दैनिक पत्रिका म्वार बात, विचार, आघ अन्ना अवसर डेलकम धन्यवाद कह चाहटुँ । अइना दिनम यी पहुरा पत्रिका निरन्तर नियमित रुपम प्रकाशित ह्वाए म्वार शुभकामना बा । समग्र थारु विद्यार्थी, बुद्धिजीवि, व्यवसायी, सम्कुजहन थारु भाषा साहित्य, कला, संस्कृतिह मैयाँ कैदी, आपन आपन ठाउँसे सकारात्मक रचनात्मक सहयोग कैदी । भाषा साहित्यफे हमार संस्कृति हो । यिही बचैना काम सबजन करपर्ना जरुरी बा । जय गुर्बाबा ।

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