थारु राष्ट्रिय दैनिक
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‘ अन्तर्वार्ता ’

‘राजनीतिक नाइ अपनहे सांस्कृतिक नेता कहे रुचैठु’

पहुरा | १७ फाल्गुन २०७७, सोमबार
‘राजनीतिक नाइ अपनहे सांस्कृतिक नेता कहे रुचैठु’

७ भदौ २०७२ के टीकापुर घटनामे आरोपित रेशम चौधरी आजीवन कारावासमे बाटैं । २ चैत २०७४ मे गृहमन्त्री रामबहादुर थापा बादल अनशनमे रहल चौधरीहे जुस खवाके अनशन टुरैलैं, वीर अस्पतालके बेडमे । १९ पुस २०७५ मे संसद् भवनमे चौधरीहे तत्कालीन सभामुख कृष्णबहादुर महरा सांसदके शपथ ग्रहण करैलैं । उ बेला उहाँ आब छुट्ना एकडम चर्चा रहे । १ माघ ०७६ मे नेकपा अध्यक्ष प्रचण्ड माघ पर्वहे सम्बोधन करटी कले रहैं, ‘रेशम चौधरीहे छुटाजाइ ।’ थरुहट थारुवानके राष्ट्रिय सम्मेलनमे फेन उहाँक बारे ढेर चर्चा हुइल । उहाँ निरन्तर, आश्वासन टे पैटै मने, रिहाइके चाँजोपाँजो भर मिले सेकल नैहो । प्रस्तुत बा, उहाँसंग उर्मिला गम्वा थारुसे राजनीतिकसे साहित्यिक ओ सांगीतिक विषयमे केन्द्रित रहिके करल बाटचिटः

कैसिन बा अप्नेहे रेशमजी ?

– कैसिम रहम बचल बाटु । डेख्टिबाटी काहुन । काल कोठरीके चार दिवारभित्तर ।

थारुहुकनके बर्का टिहुवार माघ भर्खर ओराइल बा । कत्रा हुइल मनाइ नैपाइल ? सम्झना आइठ किनाई ?

– नापुछो कत्रा याद आइठ कना बाट । सायद उ टे मै शब्दमे फेन व्यक्त करे नैसेकम । छ वर्ष हुइल मनाइ नैपाइल । हरेक माघमे मोर अपन तरिकाके मनैना चलन सब याद आइठ । कबुकाल रातभर धुम्रु गाइल फेन याद ओस्टे बा ।

थारु भाषाके चलचित्र कमैया थारु इतिहास बोकल चलचित्र हो । यकर “कन्सेप्ट” कैसिक आइल ?

– जब २०५० सालमे मै एसएलसी डेके बैठल रहुँ । रिजल्ट नैआइटसमके खाली समयमे मै कमैया उपन्यास लिख्ले रहुँ । ओहे उपन्यासके आधारमे पाछे २०५८ सालमे मै कमैया फिल्म बनैनु ।

थारु भाषामे फिल्म काहे ? जबकि अप्ने टे नेपाली गीत संगीतओर फेन ओत्रे लागल रही ।

– कमैया थारु जातिउप्पर सत्य घटनामे आधारित फिल्म हो । यकर कथा फेन मै १०१ वर्षिय थारु वृद्ध बुजु्रकसंग सुनले रहुँ । पाछे थारु कैसिक ओ काहे कमैया बन्लैं, यकर बारेमे विस्तृत अध्ययन सुरु करनु ।

मै जानल मोर इतिहास मै किल नाइ, सबहे सुनाइ परठ ओ थारु पहिलेसे कमैया ओ गरिब नैहुइट, उ टे बनाइल हो कहिके सब जनमानसमे पुगैना रहे । सोझ थारुहे पहाडसे आके ओहे थारु गाउँमे बैठ्के, मित जोडके कैसिक सम्बन्ध विस्तार करल ओ कैसिक एक निमुवा खाइक लाग नोनके ढेल्का माँगके कैसिक श्रीसम्पति कब्जा करल कना बाट टे यथार्थ हो नि । यी फिल्म मार्फत मै सबके ठन पुगैले बाटुँ ।

कमैया फिल्मके प्रतिक्रिया कैसिन पैली ?

– टमानजे यकर मजा समीक्षा करले बाटैं । २०५८ सालसे अभिनसम निरन्तर चलल थारुहुकनके पछिल्का ऐतिहासिक फिल्म कमैया हुइल बा । यी काल्ह, आज ओ काल्हके दिन फेन ओत्रे चर्चित रही । नेपालमे बनल भाषाभाषी फिल्ममध्ये संसारभरके फिल्म फेष्टिभलमे भाग लेहे पाइल फिल्म कमैया हुइ ।

माघ अइटी किल ‘माघ लहैली सुरिक सिकार खैली’ गीतके झंकार नैसुनटसम माघ आइल नैहो कि कना हुइठ । उ गीत हो अप्नेक फिल्म ‘कमैया’के । यकर लोकप्रियताके बारेमे बटा डि ना ?

– माघ हम्रे थारुहुकनके एक स्वतन्त्रता दिवस कहिके फेन मनैठी । यी दिन हरेक थारु कमैयाहुक्रे स्वतन्त्र रठैं । कौन ठकुर्वाके घरमे आब अइना वर्ष दिन काम करना कहिके जिम्दर्वा छाने पैना दिन फेन हो । ओ एक बाट बरघर फेन अपने राजी खुसीसे छन्ठैं । यी दिन सबजाने जाँड, सुरिक सिकार, मुसिक चट्नी, घोँघी, ढिक्री, तरुल खैटी गीत गैटी रमैना दिन हो । ओ यिहे दिन ‘माघक पिली गुरी गुरी जाँर’ कहिके गीत आइलपाछे और यकर महत्व औरे बनल । टबेमारे फेन हुइ अभिनसम यकर लोकप्रियता खस्कल नैहो । यी सुनके खुसी फेन लागठ ।

अप्ने साहित्य ओ पत्रकारिताओर कहियासे लग्गी ?

– कक्षा ३ मे रहुटे राजाके जन्मोत्सव मनाइबेर टीकापुरके मञ्चमे पहिलचो कविता वाचन करके साहित्यिक जीवनके प्रारम्भ करनु । कक्षा ८ मे पुगलपाछे अध्यनरत वीरेन्द्र विद्या मन्दिरमे थारु संघरियाहुकन जम्मा करके जोगनी थारु साहित्यिक परिवार नामक् संस्था खोलके ओहे संस्थाके महासचिव हुके ‘जोगनी’ नामक पत्रिका प्रकाशन करके प्रधान सम्पादक हुके कार्य करनु ।

कौनो फेन पत्रिका प्रकाशनके लाग उबेला जिल्ला सदरमुकाम धनगढी पुगे परे । टीकापुरसे भारतके तिकुनिया गौरीफन्टा हुके धनगढी जाइ परे । ओइसिन कठिन घडीमे फेन हम्रे जोगनी थारु साहित्यिक पत्रिका प्रकाशन करके छोरली । जोगनी पत्रिका प्रकाशन करेबेर मै १४ बरके रहुँ । सायद ओत्रा छोट उमिरमे साहित्यिक पत्रिकाके सम्पादक करना पहिल मै पर्ठुइबु । ओस्टेक अभिनसम नौ ठो पुस्तक निकरनु कारागार भित्तरसे ।

सांगीतिक क्षेत्रमे अप्नेक प्रवेश कैसिक हुइली ?

– २०५० सालमे ‘डाइ बाबा भुलनै खोरियक जाँरम हो…’ कना मोर पहिल गीत रेडियो नेपालमे रेकर्ड हुइल हो । २०५१ सालमे थारु भाषाके गीति एल्बम ‘भुवर विहान’ निकरनु । जेम्ने हर ज्वाँट उठल कमैया जैसिन अधिकांश गीत कमैयाके दुुःख दर्द ढेर समोटल बा ।

मै जानट बुझटसे कमैयासम्बन्धी गीत, कथा, उपन्यास लिख्टी आइल बाटुँ । मोर अभिनसम पाँच दर्जन से ढेर गीति एल्बम श्रोता दर्शकसम आइल बा ।

अप्नेक लेखन, गीतसंगीतमे कमैयाके प्रसंग ढेर आइठ । काहे ?

– मै टे अपन भोगाईहे उतारल ओ सुनाइल हुँ । के बोल्डी निमुखाहुकनके बाट । बोलुइया बोली, लिखुइया लिखी । महनि दुनु आइल, मै दुनु करनु । टबेमारे आज चार दिवारी झ्यालखानामे बैठल बाटु । टबफेन लिखे छोरले नैहुँ मोर कलम निरन्तर चलटा । कमैया हमारे थारु समाजके प्रतिनिधि हुइट । अपन जानल, अपने समाजके आवाजहे बुलन्द बनाइ परठ कना लागके उहाँहुकनके बोली मुखरित करना प्रयास करल हो ।

सांस्कृतिक चिजहे जोगाइ परठ कहिके वकालत करठी । ओ पछिल्का चो राजनीतिमे फेन आइली । अप्ने अपनहे का कहे रुचैठी ?

– मै राजनीतिक नेता से फेन अपनहे सांस्कृतिक नेता कहे रुचैठु । मोर अपन सपना बा । थारुहुकनके चिजहे कैसिक संरक्षण ओ जोगैना कना बारे । महिन मोर संस्कृतिसंग ढेर लगाव बा ।

कारागारभित्तर अब्बे केमे व्यस्त बाटी ?

– अब्बे मै पुस्तक लेखनमे व्यस्त बाटुँ । टीकापुर घटनामे आधारित सत्यघटना पात्र ‘चम्पी’ उपन्यास पाठक माझ हली आइटा । यिहिनहे फिल्ममे फेन रुपान्तरण करना योजना बा ।

साभारः फुलरिया

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