थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १० सावन २६४५, अत्वार ]
[ वि.सं १० श्रावण २०७८, आईतवार ]
[ 25 Jul 2021, Sunday ]
‘ लघु खिस्सा ’

हरढौवा

पहुरा | २ श्रावण २०७८, शनिबार
हरढौवा

गुरूवान बुडु ढेर डिन पाछे गाउँ घुमे निकरल बाटै । जवान मनै सबकोई बैठौवामे खेट्वाम रहलेक कारण घरे छोट ओ ब्रुहाईल मनै किल रठै । मनो अब केकर ढेर खेट्वा बा ढेरमे एक हप्टा हो खेट्वाम सब पैसाक बलमे खेटी लग्ना मञ्जुरी लगाके हाली हाली काम निप्टैना हेर्ठै । सायट डुपहरके दुई ढाई बजल गुरूवान बुडु अपन आर(संघरिया) चेतुक घर पुग्ठै ओ राम रमैया लगैठै ।

चेतु फे राम राम घुमैटी बैठे कहठै घरेम ठोरिक चहल पहल ढेर रहठ । कहरू चिर्राईन टो कहरू मास मच्छी पकाई बेरिक मिठ बास आईठ । गुरूवान बुडु मनमे जन्ना ईच्छा जग्लिन आझ यी घर का विषेश बा कैहके मनो गुरूवान बुडु पुछ्नासे पहिले चेतु कैह डर्ठै आर आझ हमार हरढौवा हो । मौकासे आईल बटी खाना खाके जैबी ।

’गुरूवान बुडु’ अब्बैही हरढौवा ?

हजुर काल्ह खेट्वा लगाके ओराईल बस आझ लर्का हरढौवा मनाईटै । गुरूवान बुडु ओ चेतु बाटचिट करटी अपन पुरान हरढौवा मनैलेक सम्झठै ।

आझकल कैसिन समय आईगील हो आर कोई खेट्वैम बा कोई हरढौवा हमार जमानाम टो जबसम गाउँभरिक मनै लगाके नाई सेकैह टबसम कोई हरढौवा नाई खाए एक डोसरके सख्लेहरा जाईह सबकोई सेकैह टब गाउँ भरिक मनै बरे बरे सुवर मारके संगे हरढौवा मनाईह । अबका मनै डेखो सबकुछ पैसैक बुटे करे खोज्ठै । ऐसिक टो कोई डिन हमार थारू चाल चलने हेराई जाई ।

हमरे अपनही अपन पहिचान मेटाईटी हो । अस्टे हो जौन चिज जब रहठ टो ओकर कोई मोल नाई रहना जब हेराईठ टब ओकर महट्वक पटा चलठ । यी आझकलके शिक्षिट स्वार्ठी लर्का हमार थारू पहिचान कहोर लैजिही ना ?

जोशीपुर–५, सिमराना

साभारः फेसबुकसे

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