थारु राष्ट्रिय दैनिक
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प्रदेश १ ओ २ मे थारु भाषाहे सरकारी कामकाजी बनैना माग

पहुरा | २९ भाद्र २०७८, मंगलवार
प्रदेश १ ओ २ मे थारु भाषाहे सरकारी कामकाजी बनैना माग

पहुरा समाचारदाता
काठमाडौं, २९ भदौ ।
थारु समुदायके अगुवाहुक्रे प्रदेश १ ओ २ मे फे थारु भाषाहे सरकारी कामकाजके रुपमे सिफारिस कैना माग करले बटै ।

प्रदेश सरकारमे सरकारी कामकाजके भाषा प्रयोग कैना कहिके भाषा आयोगसे सरकारहे करल सिफारिस विभेदपूर्ण रहल कहटी प्रदेश १ ओ २ मे फे थारु भाषाहे सरकारी कामकाजके रुपमे सफारिस कैना माग करल हुइट । भाषा आयोगसे भदौ २१ गते सरकारहे प्रतिवेदन पेश करटी ११ ठो भाषाहे प्रदेशस्तरमे सरकारी कामकाजी भाषा प्रयोग कैना उपयुक्त हुइना कहटी सिफारिस करल रहे । सिफारिसमे सुदूरपश्चिम ओ लुम्बिनी प्रदेशमे थारु भाषा सिफारिसमे परलसेफे प्रदेश १ ओ प्रदेश २ मे समेत थारु भाषीहुक्रे ३ प्रतिशतसे ढेर रहल ओरसे सरकारी कामकाजी भाषामे प्रयोग कैना थारु अगुवाहुक्रे माग करलै ।

आयोगसे करल सिफारिसमे प्रदेश १ मे मैथिली ओ लिम्बु, प्रदेश २ मे मैथिली, भोजपुरी ओ बज्जिाका, बागमतिमे तामाङ ओ नेवार, गण्डकीमे मगर, गुरुङ ओ भोजपुरी, लुम्बिनीमे थारु ओ अवधि, कर्णालीमे मगर ओ सुदूरपश्चिममे डोट्याली ओ थारु रहल बटै । आयोगसे भदौ २१ गते सरकारहे सिफारिस सहितके प्रतिवेदन बुझाइल रहे ।

थारु कल्याणकारिणी सभा (थाकसं) मातहत गठित थारु मानक भाषा मस्यौदा समितिके आयोजनामे मंगर हुइल भर्चुवल छलफलमे थारु अगुवाहुक्रे उ माग करल हुइट हो । भाषा आयोग तथा सरकारसंग उ माग पूरा करैना संस्थागत पहल कैनाफे अगुवाहुक्रे सुझाव डेलै ।

कार्यक्रममे कार्यपत्र पेश करटी भाषाविज्ञ महेश चौधरी (सप्तरी) से भाषा आयोग सरकारी कामकाजी भासाके सिफारिस करेबेर विभेद करल बटैलै । पूर्वमे बोल्न थारु भाषाहे मैथिली भाषाके संज्ञा डेटी थारु भाषीउप्पर विभेद करल उहाँ टिप्पणी करलै । थारु भाषा उहाँक मूल भाषा हुइल ओ मैथिली भाषीहुक्रे पाछे केल उहाँ आइल उहाँके कहाई बा ।

थारु भाषा तराईके प्राचीन भाषा हुइल पाछेसे आइल भाषीहुक्रे थारु भाषासे प्रभावित रहल उहाँ बर्टैलै । मूल भाषाहे और भाषासे प्रभावित हुइल कहिके विश्लेषण कैना गलत हुइल कहटी उहाँ प्रदेश १ ओ प्रदेश २ मे थारु भाषीके संख्याके आधारमे सरकारी कामकाजी भाषा सिफारिस कैना अनिवार्य रहल बटैलै । राजनीतिक पूर्वाग्रह ओ विभेदपूर्ण व्यवहारके कारण थारु भाषा सिफारिसमे नइपरल उहाँ बटैलै ।

थारु आयोगके सदस्य भोलाराम चौधरी प्रदेश १ ओ प्रदेश २ मे थारु भाषाउप्पर अन्याय हुइल बटैलै । राजनीतिक पूर्वाग्राह ओ थारुउप्पर कैना गलत सोच शैलीके कारण प्रशस्त आधार रहटी रहटी भाषा सिफारिसमे नइपरल उहाँ बटैलै । प्रदेश १ ओ प्रदेश २ मे थारु भाषाहे सिफारिसके लाग राजनीतिक तथा सामाजिक रुपमे दवावके खाँचो रहल उहाँ औल्यइलै । थारुहुक्रे भाषिसेफे मूल भाषा ‘थारु भाषा’के वकालतमे लगे पर्ना उहाँ सुझाव डेलै ।

ठाउँ ओ जिल्लाअनुसार टमान नाम डेलेसेफे थारु भाषा एक ठो मूल भाषा हो कना सन्देश डेना आवश्यक रहल कहटी उहाँ राना, कठरिया, चितवनीया, डंगौरा, पूर्वीया, मोरङिया, कोचिला भाषी कहटी थारुनहे फुटैना षडयन्त्रमे सरकार लागलफे बटैलै । जे जहाँ रहलसेफे, जे जा बोल्लेसेफे थारु भाषा बोल्न करल ओरसे एक ठो थारु भाषाके वकालत सक्कु जे कैना आवश्यक रहल उहाँके कहाई बा ।

थारु आयोगके दुसर सदस्य सुवोधसिंह थारुसे जनगणना ओ तथ्याङ्कमे थारुहुक्रे सचेत हुई पर्ना बटैलै । थारुके टमान थर ओ उपथर रहल ओरसे उ अनुसार थर लिखेबेर थारु ओ गैरथारु कहिके छुट्यइना समस्या रहल कहटी उहाँ आगामी जनगणनामे अपन थरके पाछे अनिवार्य रुपमे थारु लिख्ना सुझाव डेलै । बडायक, महतो, चौधरी, राजवंशी, कुश्मी, डेमनडौरा, कठरिया, सोनाहा, गौतम आदि फरक फरक थर लिखेबेर थारुके वास्तविक तथ्याङ्क आई नइसेकल उहाँके सुझाव बा ।

थारु मानक भाषा मस्र्यौदा समितिके संयोजक कुछतनारायण चौधरी २०६८ के जनगणनामे थारु समुदायके तथ्याङ्क छुट रहल ओरसे आगामी जनगणना २०७८ शुरु हुई जैटी रहल ओरसे ओम्ने अनिवार्य रुपसे नामके पाछे थारु लिख्न सुझाव डेलै । तथ्याङ्कके विषय अधिकारसंग जोरल ओरसे सही ओ वास्तविक तथ्याङ्कके लाग नामके पाछे थारु लिखैना जरुरी रहल उहाँ बटैलै । प्रदेश १ ओ प्रदेश २ मे थारुके जनसंख्यासे कम जनसंख्या देखाके तथ्याङ्क विभागसे त्रुटी करलफे उहाँ टिप्पणी करलै ।

कार्यक्रममे थारु विज्ञहुक्रे रामबहादुर चौधरी (कैलाली), भुलाई चौधरी (सप्तरी), रामसागर चौधरी (सुनसरी), श्रवण चौधरी (थरुहट मोर्चा), बुद्धसेन चौधरी, नन्दलाल चौधरी (सप्तरी), लाहुराम चौधरी (कैलाली) लगायतसे थारु भाषाके विकास ओ उत्थानमे थारुहुकनके सक्रियताके प्रसंशा करटी आगामी जनगणनामे सक्कु जे सहभागी हुइना ओ नामके पाछे अनिवार्य ‘थारु’ लिख्न सुझाव डेलै ।

थारु मानक भाषा मस्यौदा समितिके संयोजक कुछतनारायण चौधरीके सभापतित्वमे हुइल कार्यक्रममे स्वागत सहसंयोजक बुद्धसेन चौधरी करलै कलेसे कार्यक्रमके सञ्चालन सचिव लक्की चौधरी करलै । भर्चुवल कार्यक्रमके लाग जुम स्पेस अनिलदत्त चौधरी (वर्दिया) करलै कलेसे होष्ट सञ्चालन जंग्रार साहित्यिक बखेरीके अध्यक्ष सोम डेमनडौरा थारु करलै ।

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