थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १९ अगहन २६४५, अत्वार ]
[ वि.सं १९ मंसिर २०७८, आईतवार ]
[ 05 Dec 2021, Sunday ]

बारबर्दियामे साहित्यिक महोत्सवः अन्य पालिकाहे सिख

पहुरा | ७ मंसिर २०७८, मंगलवार
बारबर्दियामे साहित्यिक महोत्सवः अन्य पालिकाहे सिख

एकात्मक ओ केन्द्रीय शासन प्रणालीसे देशके दुरजराजमे, भौगोलिक, आर्थिक ओ सामाजिक रुपमे सीमान्तकृत समुदायहे समानुपातिक वितरण डेहे नैसेकठ कना यथार्थहे आत्मसाथ करटि गाउँ–गाउँमे सिंहदरवार पुगे, स्थानीय सरकार जनमुखी सेवा ओ सुविधा प्रदान करे कना अभिप्रायःसे देशमे संघीय व्यवस्था स्थापित कैगिल । एक छोट साहित्यिक डबली सञ्चालन करना फेन कमलादी धाइपरना बाध्यता नाआए कहिके स्थानीय सरकारके अवधारणाहे स्वीकार करल हो ।

नेपालके संविधान २०७२ जारी हुइलपाछेक संघीय, प्रदेश ओ स्थानीय तहके निर्वाचनपाछे सरकार गठन हुके सुशासन डेना उद्देश्यके साथ काम हुइ लागल पाँच वर्ष पुगटा । देशमे संघीय शासन अभ्यासमे रलेसेफेन केन्द्रीय सत्ताके रजगजमे खास कमी आइल नैहो । मने प्रदेश तथा स्थानीय सरकारसे कुछफेन कैले नैहो कना फेन न्यायोचित नैहुइ ।

७ सय ५३ पालिकामध्ये कुछ पालिका उदाहरणीय बा, जे स्थानीय स्वायत्त शासनके स्वाद जनताहे डेना भरमग्दुर कोशिशरत बा । उमध्ये एक पालिका बर्दियाके बारबर्दिया नगरपालिका फेन हो, जे शिक्षामे स्थानीय पाठ्यक्रम बनाके लागु करनासे लेके सिकलसेल जाँचमे प्राथमिकता डेहल । दश वर्षे जनयुद्धमे बर्दिया जिल्लामे शहीद हुइल, बेपत्ता पारल तथा घाहिल योद्धाहुकनके जीवनगाथा तयार कैके प्रकाशन करना कार्य करले बा । साहित्यिक उत्सवहे निरन्तरता डेके सर्जकहुकनहे प्रोत्साहित फेन करटि बा । यी लेखमे कार्तिक १५ मे बारबर्दियामे सम्पन्न राष्ट्रिय स्तरके साहित्यिक कार्यक्रमके चर्चा करल बा ।

यी वर्षके डेवारिक रमाइलो शरदीय मासपारके बारबर्दिया नगरपालिकासे आयोजना करल साहित्य तथा संगीत उत्सवहे प्रगतिशील थारू साहित्य ओ संस्कृतिके फाँटमे पचासौं वर्ष नेतृत्व करल थारू भाषा तथा उत्थान मञ्च (गोचाली परिवार)से समन्वय ओ व्यवस्थापन करले रहे । भेटरान अतिथिहुकनके उपस्थिति ओ साहित्य बाचनसे साहित्यिक महफिलहे मनोरम बनाइल । थारू आयोगके अध्यक्ष माननीय विष्णुप्रसाद चौधरीके प्रमुख आतिथ्यमे हुइल उत्सवमे नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानके पूर्व सचिव तथा वरिष्ठ कथाकार सनत रेग्मी ओ प्राज्ञसभा सदस्य हरिप्रसाद तिमिल्सिनाके उपस्थिति अपनमे अर्थपूर्ण रहल । ओम्ने कविताहे अनिश्चितताके डगरके यात्राके रुपमे अथ्र्यइना मुर्धन्य कवि मनुमन्जिलके कविता बाचनसे उत्सवहे सुरम्य बनाइल । छन्दकवि जीवराज पाण्डे ओ विद्रोही कवि हेमप्रकाश ओ मन्जिलके प्रस्तुतिसे माहोलमे आगी लगैले रहे । प्रदीप रोदन, हुकुम धडकन ओ संगीता थापाके गजलसे स्रोताहुकनके दिलमे पराकम्पन नन्ले रहे ।

उत्सवमे दुईजाने स्रष्टा कवि एवं संस्कृतिकर्मी सुशील चौधरी ओ छविलाल कोपिलाहे विशेष सम्मान करल रहे । उत्सवमे नेपाल आइडलके उपविजेता प्रविन बेडवाल ओ थारू लोकगायक दर्पण कुशुम्या फेन दर्शकहे सांगीतिक लयमे झुमैना सफल रहिट । अइसिन लागे, स्वर्गके एक टुक्रा बारबर्दियाके सदरमुकाम सुन्दर ऐतिहासिक नगरी जयनगरमे झरके साहित्यिक ओ सांगीतिक सरगममे झुमल बा । स्थानीय कलाकारहुकनके झाँकी ओ विविध प्रस्तुतिसे बारबर्दियाके साँस्कृतिक विविधताके बान्की पुलकित हुइल रहे । स्थानीय गजलकारद्वय अमृत ढकाल ओ हरिप्रकाश भण्डारीके प्रस्तुति ओ सहजीकरण कौशलसे उत्सवके उपादेयता ओ रस्सास्वादन करना स्रोताहुक्रे पैटि रहैं । नगरप्रमुख दुर्गाबहादुर थारू ‘कविर’ ओ उपप्रमुख अञ्जु दहित तथा समग्र नगरके प्रतिनिधिहुकनके अतिथि सत्कार ओ सम्मानमे डेखाइल हार्दिकता ओ तदारुकता लोभलग्टिक डेखाए । संयोजनकारी भूमिकामे रहल गोचाली परिवारके अध्यक्ष सुदीन थारूके सक्रियता सराहनायोग्य रहे । धर लम्मा समयपाछे उत्कृष्ट उत्सवमे रहे पाके स्रष्टाहुक्रे गद्गद् रहैं ।

कवि मन्जिले ‘मेरो एउटा दुश्मन छ’ शीर्षकके लोकप्रिय कवितामे अपनहे फोहर जत्रा घृणा करना दुश्मनहे फूला जस्टे मन परैना उद्घोष कैलैं । कवि मन्जिल खुल्टि गैलैं, ओ उप्लटि गैलैं, पहराके साँकिर डगरमे कवितामार्पmत् । आज चाकल फैलहर डगर विकासके प्रतीक मानल भाष्यउप्पर पहराके साँकिर डगरमे कवितामार्पmत् कडा प्रतिवाद करलैं उहाँ । पहराके साँकिर डगर फेन सम्बन्धके कडी हुइ सेकठ, सम्बन्ध जीवन बदले सेकठ कटि स्रोताहुकनहे ठोपरी पजैना बाध्य परलैं ।

गोरखाके युवाकवि प्रदीप रोदन गजलमार्फत् लाचारी सत्ता, लवस्तरो नयाँ युवा पुस्ता ओ पितृसत्ताउप्पर धुवाधार बमवारी करलैं । उहाँ मरल बाबाउप्पर गजलमे कलैं, थाहा नभएको त बाबुको अनुहार न हो, हातको सुनको औठी विर्सेको छैन।

हुकम ‘धडकन’ धडकन हिलैना मेरिक लयमे गजल गैलैं । गजलकार सुनिता थापा आधा आकाशके पुरा जिम्मा लेलि । पंक्तिकार फेन बारबर्डिवन्के खोजी शीर्षकके कविता वाचन करे भ्याइल । कवितामे थारू मिथकअनुसार गोरु चराइ गैल बाह्रजाने गयर्वाहुक्रे वनघुस्री लग्गे बारोबर्दिया कना ठाउँसे हेराइल युगौ हुइल, कहुँ बारबर्दियाके मेयर ‘कविर’ एक बर्दिवा टे नैहुइट्, जो जयनगरमे नेंगटि बटैं, अपन हेराइल औरे संघरिया खोज्टि कना संकेत करे खोजल बा ।

साहित्य ओ संगीत महोत्सवके महफिलके रस्सास्वादन करल पाहुना ओ स्रष्टाहुक्रे मुक्तकण्ठसे आयोजकके प्रशंसा करलैं । मुख्य पाहुना थारू आयोगके अध्यक्ष विष्णुप्रसाद चौ्रधरी पालिकाके सिर्जनशील कामके लाग धन्यवाद डेलैं । वरिष्ठ कथाकार सनत रेग्मी अइसिन आशलग्टिक काम औरे पालिका फेन सिकेपरना बटैलैं । प्राज्ञ हरिप्रसाद तिमिल्सिना उत्सव अपनहे उर्जाप्रदान करल ओ यकर महत्वबारे प्रतिष्ठानलगायत ठाउँमे प्रचारप्रसार करना प्रतिवद्धता जनैलैं । आमान्त्रित स्रष्टाहुकनहे मायाके चिनो डेके आयोजक सम्मान करले रहे ।
बारबर्दियाके नगरप्रमुख कबिर पक्के कवीर दासके यी कालजयी दोहा पह्रले हुइँहिः

माया मरी न मन मरा, मर कर गए शरीर
आशा, तृष्णा ना मरी, कह गए दास कबीर

टबेमारे सब स्रष्टाहुकनहे धन्यवाद डेटि आगामी वर्ष और भव्य ओ कस्किल साहित्यिक ओ सांगीतिक उत्सवके लाग न्यौटा डेलैं, उहाँ ।

हुइना टे बारबर्दिया नगरपालिका यिहिनसे पहिले फेन गोचाली परिवारमार्फत् साँस्कृतिक महोत्सव, सांस्कृतिक प्रतियोगिता, लोकगाथा वाचन ओ सङ्कलन कार्य कैसेकल बा । यी चोके महोत्सव भर और ऐतिहासिक रहल । देशभरके स्रष्टाहसकनहे न्यौटके करल साहित्य तथा संगीत उत्सवके ओज भुलाइ नैसेक्ना रहल । विधिविधान, नीति निर्माण ओ सिंहदरबार काठमाडौंमे रमैटिरहल आरोप लागल बेलामे संघीयताके मर्मबमोजिम स्थानीय सरकार साहित्यिक ओ सांगीतिक उन्नयनके लाग डेखाइल जागरुकता उदाहरणीय रहे । बारबर्दिया नगरपालिकाजस्टे अन्य ७ सय ५३ पालिको फेन स्थानीय तहमे साहित्यिक ओ सांगीतिक विकासके लाग प्रतिष्ठान खोले सेके ओ लोकसाहित्यके श्रीवृद्धिके लाग जाँगर देखाइ सेक्लेसे भाषा, साहित्यके उन्नयनमे भारी योगदान हुइना रहे कि ?

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