थारु राष्ट्रिय दैनिक
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‘ पोस्टा चर्चा ’

‘टुटल झोंपरी’ भिट्टर कमैयनके पिरा

पहुरा | १८ बैशाख २०७९, आईतवार
‘टुटल झोंपरी’ भिट्टर कमैयनके पिरा

२०७० सालके अगहन महिनम् कञ्चनपुरके अशोक चौधरीक् ‘मनके आवाज’ गजल संग्रहके लाग भूमिका लिखके एक अँठ्वार फेन हुइल नैरहे । ओहे बेला धनगढी कैलालीक् भैया रामचरण चौधरी ‘अजराइल’ अपन गजल संग्रहके लाग भूमिका अपन गजलके पाण्डुलिपि हाँठेम् पक्रोइलँ । सँपार नैहुइलेसेफें नाही कहे नैसेक्लुँ । मने हुँकार गजल संग्रहके बारेम् कुछ पैहले थारु भासाके गजलमे कलम डौराइल कुछ गजलकार लोगनहे सम्झक् चाहटुँ ।

थारु गजल संग्रहके इतिहास हेर्ना हो कलेसे–

१. कैलालीक् जोखन रत्गैंयाके ‘चोराइल मन’ (२०५७)

२. दांगडेउखरके भुवन भाइके ‘आछट’ (२०६१ बैशाख)

३. कैलालीक् लक्की चौधरीके ‘सहिदान’ (२०६१ जेठ)

४. दांगडेउखरके छविलाल कोपिलाके ‘भौगर’ (२०६१ भादो)

५. कैलालीक् छपिलाल चौधरीके छिट्रल अक्षर (२०६२)

६. कैलालीक् लक्की चौधरीके ‘अन्तरभाव’ (२०६३)

७. दांगडेउखरके छविलाल कोपिलाके ‘कैले फुल्छ ऊ ?’ बाल गजल संग्रह (२०६३)

८. कैलालीक् लाहुराम चौधरी जहरके ‘फुलरिया’ (२०६६)

९. कैलालीक् सागर कुश्मी संगतके ‘हस्ताक्षर’ (२०६८)

१०. कैलालीक् सागर कुश्मी संगतके ‘फुटल पोक्री’ (२०६८)

११. कैलालीक् खुशीराम चौधरीके ‘विक्षिप्त मुटु’ (२०६८)

१२. कैलालीक् मोतीराम चौधरी रत्नके ‘मनके बोझा’ (२०७०)

१३. कंचनपुरके अशोक चौधरीके ‘मनके आवाज’ (२०७०)

१४. कैलालीक् रामचरण चौधरी अजराइलके ‘मोर टुटल झोंपरी’ (२०७०) आइल बा ।

अइसिके थारु भासामे थारु गजल कृतिके बारेम् पटा चलठ् । दिनदिने लोकप्रिय बन्टी गैल गजल विधा आब अइना दिनमे अब्बेक् युवा लोग इहिहे कैसिक मल्गर बनाइ सेक्जाइ कना बातमे चिन्तित हुइ पर्ना बा । इहे क्रममे गजलकार रामचरण जी अपन मनके बात अइसिके व्यक्त कैठाँ ।

कबु दिन कबु रात बिटैठुँ मै यी मोर टुटल झोंपरीमे ।
कबु घाम कबु छाँही सहठुँ मै यी मोर टुटल झोंपरी ।

बार्ह बरस पहिलेसे मुक्त हुइल मुक्त कमैयनके हालट जस्के टस बटिन । ओहे समस्या डेख्के अपन गजलके सेरमे अइसिक लिख्ठैं ।

जट्रा डुख रलेसेफें आँस पोंछके जियल बटुँ ।
जैसिन रलेसेफें मै यहाँ नेंगल बटुँ ।

ट्याम अन्सार गजलकार लोगनके लजर ओ मन नै लागल कलेसे का गजलकार ? आझ ओहे लाइनमे गजलकार जी फेन ठर्हयाइल बटाँ ।

जट्रा चुनाव संविधान सभा हुइलेसेफें चुनल कहाँ बा ।
अभिन सम लावा डेस नेपाल कहल कहाँ बा ।

एक्काइसौं शताब्दीमे थारु युवा लोगन हेर्ना हो कलेसे अपन संस्कृतिहे छोरे लागल बटाँ । कला, पहिचान, भासा, धर्म बिस्राइ लागल बटाँ । अस्टे अस्टे बातहे मनन् कैके गजलकार अब्बक् युवा लोगनहे सचेत कराइ खोज्ले बटाँ ।

संगेक् संघरियन मोर कहाँ कहाँ गैलैं खै ।
संगे खेल्ना मोर संघरियन का का हुइलैं खै ।

जवान लर्का जवान लर्कीनहे नैडेख्ना टे बाते नैहो । बैस चर्हल लर्का सुग्घुर सुग्घुर बठिन्यन चिटैना स्वभाविक हो । मने गजलकार जी अपन मैयाँ पिरेमके बातहे अइसिक खेलैठाँ ।

यी साँझमे डारु नै मै आँस किल पिटि बटुँ ।
बिस्राके फें ना सोंच्हो मै अभिन जिटि बटुँ ।

गजलकार अपन कृतिमे वर्तमान समसामयिक राजनीतिक् परिवेश, समाजमे रहल विकृति, विसंगतिहे जरसे हटाइ पर्ना अर्जि फेन कर्ले बटाँ । बन्द, हरताल, मैंयाँ, पिरेम्, ढोखा, जिन्गीक सफलता ओ असफलताके बारेमे फें यी संग्रहमे व्यक्त करले बटाँ ।

कैसिन भाग्य बा छाँइल झोंपरीफें टुटगिल मोरिक ।
अन्ढारमे जुगजुग बरल डियाफें बुटगिल मोरिक ।

गजलके अपन छुट्टे नियम बटिस कना बात गजलकार लोगन स्वयम् पटा रना चाही । गजलके मुटु कलक काफिया हो । अट्रा पटा रटिरटि फेंन गजलकार काहे उ नियमसे बाहेर जाइ खोजलाँ टे गजलकारे जानिंट । काफिया बेल्सना ओ गजल सिर्जैनामे अभिन ढेर मेहनट करे पर्ना बा । अइना दिनमे गजलकार रामचरण जी यी पक्षमे होसयार हुइही कना अस्रा बा । यहाँ ढेर जैसिन गजल नियमसे बाहेर जाके फजल बने खोजल बा । रामचरण जीहे गजलके बारेमे ढेरढेर अध्ययन करे पर्ना बटिन । गजलहे मल्गर ओ फरगर बनाइक् लाग ओकर सिद्धान्त भिट्टर रैह्के गजल सिर्जना करे पर्ना जरुरी रहठ । गजलकार रामचरणके यी पहिल कृति हुइलेक ओरसे हुइ सायद एमने कुछ कमजोरी फेन बा । मने एमने मेहनट फेंन ढेर कैगैल बा । शब्द, लय ओ भावहे पन्वाँडार मिलाके बेल्से जन्लेसे अभिन आउर डमडार गजल बनेसेकी । यी बातहे गललकार जीहे बहुट ध्यान डेहे पर्ना बा ।

ओरौनीमे अपन लगनशिलता ओ निरन्तर मेहनटके साथ यी गजल संग्रह ‘मोर टुटल झोंपरी’ सक्कु पाठक लोगनके रंगीन ताज महल बने । पाठक ओ समिक्षक लोगनके सल्लाह, सुझाव ओ हौसलाहे मनन कैके गजलकार रामचरण जी अपन पैला आघे लैजाइ सेकहिं कलेसे पक्काफेंन उहाँक् भविष्य टोरैंयाहस् चम्कहिन । यी कृतिके भुमिका लिख्ना क्रममे मोर लिखे पर्ना बात छुटे गैल हुइ । पाठक समिक्षक, विद्धान लोग छुटल चिजहे उजागर कैडिहि कना अस्रा कर्टि गजलकार रामचरणके साहित्यिक डगर आउर फरछ्वार हुइटि जाए । डोसर कृतिक् पोक्री हलहिल्ले हाँठेम् परे । डेलुवा भरभर शुभकामना ।

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