थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १३ कुँवार २६४६, बिफे ]
[ वि.सं १३ आश्विन २०७९, बिहीबार ]
[ 29 Sep 2022, Thursday ]
‘ कविता ’

अन्टिम चो

पहुरा | २८ श्रावण २०७९, शनिबार
अन्टिम चो

ठकल नाई हुँ मै
ठकम नाई कबु
जरूरट नाई हो अब
पुछ्न फे नाई पुछम
सरकार!
रेशम हे छोर्बो कब?
साट साल पुगटा
निर्डोष छावा
बेबस बाबा
डुखी डाईक आँस
लर्का पालेक लग
हाँठ मुह जोरे पर्ना
पस्नासे ढेर
आँसु बहैटी
प्राण प्याराक आसमे
जवानीम मुर्झुरैटी
लचार सिन्डुरके लग
अन्टिम चो लिखटु
अब टिकापुरके लग।।

रेशम हे बन्ड कर्लो
हाँठे गोरम टाला मर्लो
का फाईडा ऊ काईडा?
हुकार सिड्ढान्ट लैके
एक डस सयसे हजार
हजारसे लाख पुगटै
लगैबो कत्रा हठकरी
बल्गर जन्जीर
कान खोलके सुनो
लजर उठाके हेरो
टुहुन लजर पुगट सम
हर परगा परगामे डेख्बो
कैडी रेशमके भीर
कैड करलो शरिर
आट्मा आट्मियटा बाहर
फाँसीम लट्काउ
सुलीम चर्हाउ
चाहे
जेलके डेवालेम चुनाउ
जनटानके आट्मामे
टिकापुरके इटिहासमे
किसन्वाक महल
गरिबुवाक झोपरी
यूवानके जोशमे
बुजुर्गनके होशमे
डाईक डुलार
बहिन्याक प्यारमे
टिकापुरके मुटूम
बैठल बा रेशम
कबु नाई मरी
नचिल्लाई नछट्पटाई
जेलके टाटुल जुरके लग
अन्टिम चो लिखटु
अब टिकापुरके लग।।

लागठ ढिरे ढिरे अब
राजबन्डीनके बलिडान
जनटानमे रंग छोरटा
पिडिट पिछरल
शोसिट जनटा सब
उन्मुक्टी खोजुईयान
एक डोसर संग जोरटा
टुहुन शासन डेख्ली
डमन अहंकार डेख्ली
पहिचान ओ शान
हिटलरसे ढेर क्रुरूर
अहंकारी डमनकारी
सुनो
रेशम ओ टुहुन
केमहु कोई मेल नाई हो
अयोग्य आटो सब
चप्पलके ढुरके लग
अन्टीम चो लिखटु
अब टिकापुरके लग।।

हर साल ठेटराईल
खाटी खिडोर्ठी
ओरौनीम आँखी बिडोर्ठी
एक कहठ डश बरस
जनयूड्ढ लरके अईनु
डोसर कहठ सत्रा बरस
जेलेम जिईके अईनु
ओईनके मिठ बोल चुनाउमे
अपनही अपराढी बटैठै
आके गाउँ गाउँमे
कुर्सी मिलठ रेशम अपराढी
कुर्सी जैटीके
हमरे लरब कठै
बिना कारण जेल
कैड करल बेकसुरके लग
अन्टिम चो लिखटु
अब टिकापुरके लग।।

  • असिराम डंगौरा

जोशीपुर-५, सिमराना, कैलाली (हाल- गुजरात, भारत)

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