थारु राष्ट्रिय दैनिक
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लवाङी महोत्सव ओराइल

पहुरा | १२ मंसिर २०७९, सोमबार
लवाङी महोत्सव ओराइल

पहुरा समाचारदाता
सुखड, १२ अगहन ।
विश्व रामसार सूचीमे सूचीकृत कैलालीके घोडाघोडी ताल क्षेत्रमे रहल घोडीघोडा मन्दिरमे थारु समुदायके लवाङी पूजा सोम्मार भव्य रुपमे सम्पन्न हुइल बा । सीता विवाह पञ्चमीके दिन पर्ना यी पूजा परापूर्वकालसे विशेष पर्वके रुपमे मनैटी आइल बा ।

विगत नम्मा समयसे यी पूजाहे पर्वके रुपमे भव्य रुपमे कैना घोडाघोडी तथा संस्कृति संरक्षण समाजसे व्यवस्थापनके कार्य करटी आइल बा । यी वर्ष समाजसे तीन दिनके सांस्कृतिक महोत्सवके आयोजना करके मन्दिर परिसरमे थारु संस्कृति झल्कैना टमान प्रस्तुति प्रदर्शन करल अध्यक्ष चन्द्रबहादुर चौधरी बटैलै ।

महोत्सवके कैलाली क्षेत्र नम्बर ३ के नवनिर्वाचित प्रतिनिधि सभा सदस्य गंगाराम चौधरी उदघाटन करल रहिट । तीन दिनसम चलल थारु सांस्कृतिक महोत्सवमे टमान क्षेत्रसे नानल थारु संस्कृति भल्कैना झाँकी, परम्परागत नाँच प्रदर्शन करल रहे ।

राष्ट्रिय तथा स्थानीय कलाकारके प्रस्तुतिसंगे थारु समुदायके भेषभूषा झल्कैना थारु समुदायके पुरान बडका नाँच, सखिया नाँच, लाठी नाँच, झुम्रा नाँच, कठरिया नाँच, दिन नचुवा नाँच, धमार, मांगरलगायतके प्रस्तुतिसे थारु समुदायके वास्तविक सांस्कृतिक झल्कल महोत्सव अवलोकनमे सहभागिहुक्रे बटैलै ।

लवाङी पूजामे कैलाली तथा कञ्चनपुरका थारु समुदाय तथा गैर थारु समुदायके सहभागिता रहल आयोजकके कहाई बा । घोडाघोडी नगर भल्मन्सा समाजके अध्यक्ष बुधराम चौधरी घोडाघोडी, भजनी, लम्की–चुहा, बर्दगोरिया, कैलारी, गौरीगंगालगायतके ९० भल्मन्सा पूजामे सहभागी रहल बटैलै ।

उहाँके अनुसार यी पर्वमे विशेष करके थारु समुदायसे नयाँ बाली भित्रासेकलपाछे उ अन्नबालीहे प्रसादके रूपमे अपन देवी देवताहे चहै्रना हुइल ओरसे लवाङी पूजाके महत्व बा ।

लवाङी पूजाके अघिल्का रात थारु गुरुवा धाक बस्न ओ पूजाके सकारे मन्दिरमे देउताहे छाँक (डारु), मुरगी २ ठो सुव्वर, मुर्गाके भोग डेना चलन रहल करैचा गाउँके भल्मन्सा रामबहादुर चौधरी बटैलै ।

मुख्य गुरुवासे पूजा करलपाछे सहभागी भल्मन्साहुक्रे भोग डेना ओकरपाछे केल और भक्तजनके पूजा तथा भोग डेना करजाइठ । पूजा कार्यक्रममे कैलालीके ८२ गाउँके थारु समुदायके प्रत्यक्ष सहभागिता रहटी आइल पूजा व्यवस्थापन समितिके सहसंयोजक शंकर डंगौरा बटैलै ।

लवाङी पूजाके दिन घोडाघोडीके मुख्य मन्दिरमे मुरगा, छेगरा, सुव्वरलगायतके सयौँ बलि डेहल बन । बलि डेना कार्यमे थारुलगायत गैर थारु समुदायकेफे सहभागिता रहे ।

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