थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०५ असार २६४८, मंगर ]
[ वि.सं ५ असार २०८१, मंगलवार ]
[ 18 Jun 2024, Tuesday ]

टिरिया टुँ आपन हे कमजोर ठन्ठो का ?

पहुरा | १७ मंसिर २०७९, शनिबार
टिरिया टुँ आपन हे कमजोर ठन्ठो का ?

टिरिया टुँ आपन हे कमजोर ठन्ठो का ?
टिरिया टुँ अत्रा छोट लुग्रा घालके कहाँ जाइटो ?
टिरिया टुँ घरक किल काम कराेँ
टिरिया इ नइ करोँ, उ नइ करोँ,
चारुओरिक अइसिन हल्ला सुनके,
टिरिया टुँ आपन हे डुब्बर ठन्ठो का ?

टिरिया टुँ एक लवण्डी, छाइ, व डाइ फे हुइटो
फेन काँहे डरैठो ?
टिरियाटोहार असक बलगर कोइ नइ हो,
फेन आपन हे कमजोर ठन्ठो का ?
टिरिया टुँशासक ओइनके कम्लहरीया, छेगह्रीन्या ओरगिन्या नइँ हुइटाे
टिरिया टुँ शसक्त गर्भि, सुखली, लहिया, रमदैया हुइटो ।

टउन फे,
टिरिया टुँ आपन हे कमजोर ठन्ठो का ?
टिरिया टुँ झमक, पासङ्गलामु, भृकुटी हुइटोँ
चुनौतीसे नजर मिलैहाे,
टिरिया टुँ जननी, शसक्त टिरियनक् आत्मशक्ति के आवाज हूइँटो,
टिरिया टुँ आपन हेँ कबु फेन कमजोर नइँ ठन्होँ,
तु एक्ठो शक्तिपिठ के स्रोत हुइँटो ।
टिरिया टुँ अपन हे कमजोर ठन्ठो का ? ।।

ऐश्वरीय विद्यानिकेटन, धनगढी कैलाली, कक्षाः १०

शब्द अर्थ : टिरिय (महिला) लवण्डी (केटी), छाइ (छोरी), छेगह्रीन्या (बाख्रा चराउने बालिका)

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