थारु राष्ट्रिय दैनिक
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‘ सम्पादकीय ’

प्रादेशिक अपांगता नीति हाली ल्यानी

पहुरा | ७ भाद्र २०८०, बिहीबार
प्रादेशिक अपांगता नीति हाली ल्यानी

अपांगता रहल व्यक्तिहुक्रे विगत छ वर्षसे अपांगता रहल व्यक्तिहुकनके लाग प्रादेशिक नीति नन्ना माग करलेसेफे सरकार अभिनसम पारित करे नइसेकल हो । अपाङगता रहल व्यक्तिहुकनके प्रादेशिक नीतिके मस्यौदा तयार हुइलेसेफे सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारसे अन्तिम रुप डेटी रलक आश्वान डेहेबेर फेरसे कहाँ जाके रुकठ पत्ता नइहो । हरेक क्षेत्रसे पाछे पारगिल अपाङगता रहल व्यक्तिहुकनहे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, प्रशासनिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रके पहुँचमे नानके समावेशी तथा सम्मानजनक जिना वातावरणके सृजना कैना चाही ।

प्रादेशिक अपाङगता नीतिमे १४ बुँदे मस्यौदासे टमान रणनीति समावेश करल बा । अपाङगता रहल व्यक्तिके मुुल निकायमे सहभागिता नइहुके अभिनफे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगारीसे वञ्चित हुइनाके साथे राजनीतिमे सहभागिता नइकरैना, यातायातमे छुटके व्यवस्था हुकेफे समेत कार्यान्वयन नइहुइना, अपाङगतममैत्री भौतिक संरचना नइहुइना, विकासके पूर्वाधार अपाङगतामैत्री नइहुइना, अपाङगता रहल व्यक्तिहुक्रे समाजमे सम्मानजनक जीवन जिए नइपैना लगायतके समस्या रहल बा ।

विगत छ वर्षसे मस्यौदा बुझाके अपाङगता रहल व्यक्तिहुक्रे अपने नीति पारित कैना माग करटी बटै । सरोकारवालाहुकनसंग सुदूरपश्चिम प्रदेशके सामाजिक विकास मन्त्रालयसे प्रदेशस्तरीय छलफल करटी अन्तिम चो सुझाव संकलन करले बा । समाजमे शाररिक, मानसिक लगायत करके १० मेरिक अपांगता रहल व्यक्ति बटै । राष्ट्रिय जनगणना २०७८ के अनुसार सुदूरपश्चिममे टमान मेरिक करके ७० हजार आठ जाने अपाङगता रहल व्यक्ति रहल उल्लेख बा । अपांगता रहल व्यक्तिसे प्रदेश सरकारके प्रमुख, मुख्यमन्त्री कार्यालय, सामाजिक विकास मन्त्रालयमे यथाशिघ्र नीति पारित करे पर्ना सुझाव रख्टी टमानफेरा ज्ञापनपत्रफे बुझागिल बा । यदि इच्छा शाक्ति बा कलेसे अपाङगता रहल व्यक्तिहुकनके आवाज सुनुवाई करटी प्रदेश सरकारसे प्रादेशिक अपाङगता नीति हाली पारित कैना चाही ।

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