थारु राष्ट्रिय दैनिक
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[ वि.सं १४ भाद्र २०८२, शनिबार ]
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थारु समुदायमे परम्परागत मच्छी बझैना बरेर्वा हेरैटी

पहुरा | १२ भाद्र २०८२, बिहीबार
थारु समुदायमे परम्परागत मच्छी बझैना बरेर्वा हेरैटी

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १२ भदौ ।
थारु समुदायमे परम्परागत मच्छी बझैना बरेर्वा टेक्ना चलन हेराई लागल बा ।

थारु समुदायसे मच्छी मारेक मेरमेरिक तरिका अपनैटी आइल बटै । जेम्ने बरेर्वा लगाके जाल, हेल्का, टापी, चिउँढी, ढँह्रियाके प्रयोगसे, बन्सी लगाके मच्छी मर्ना विधि अपना जैटी रहल बा ।

गैरथारु समुदायमे मच्छी मारेक जालके प्रयोग करल भर डेखजाइठ मने थारु समुदायमे परम्परागतसे बरेर्वा लगाके मच्छी मर्ना, जाल, हेल्का, टापी, चिउँढी, ढँह्रियाके प्रयोगसहित बन्सीफे लगैना कैटी आइल बटै ।

मच्छी मारेक लाग जाल, हेल्का, टापी, चिउँढी, ढँह्रियाके, सेरिया, घाघी, पहाउके प्रयोग अभिन यथावत रहल मने बरेर्वा टेक्ना चलन भर हेराई लागल धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर १७, पथरीके स्थानीय रामऔतार चौधरी बटैलैं ।

उहाँ कहलंै, पहिले ढेर घरेक मनैन बरेर्वा टेकिट मने अब्बे भर बरेर्वा टेके छोरले बटैं । पहिले कुलुृवा, कुलियामे पानी ओ मच्छीफे प्रशस्त मिलिट अब्बे पहिलेक हस पानीफे नैरना ओ मच्छीफे कम रठै ।

रामऔतार परम्परागत तरिकासे मच्छी बझैना विधिके प्रयोग कैटी प्रत्येक बरस धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर १७, पथरीस्थित शिवगंगा लडियाक ढिक्वामे रहल घेच्कटली कुलुवामे मच्छी बझाइक लाग बरेर्वा टेक्टी आइल बटैठैं ।

बरेर्वा बनाइक लाग बहुट पानी, चरुवा (मेरुवा), टट्री, खोंघिया, ढोंग्रा, खुटा, मुन्ना, लसरी, झाला, जुइना, माटिक चेपा, घारा, बैगोरा (बरेर्वा ब्लगर बनैना पाछे लगाइल टेका खुटा) सामान आवश्यक परठ ।

धनगढी उपमहानगरपालिका–१७, पथरीस्थित शिवगंगा लडियक ढिक्वामे रहल घेच्कटली कुलुवामे लगागिल बरेर्वा ।

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