थारु राष्ट्रिय दैनिक
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[ थारु सम्बत १५ भादौ २६४९, अत्वार ]
[ वि.सं १५ भाद्र २०८२, आईतवार ]
[ 31 Aug 2025, Sunday ]

चैतन्य पाठशालासे गौरा पर्व मनागिल

पहुरा | १५ भाद्र २०८२, आईतवार
चैतन्य पाठशालासे गौरा पर्व मनागिल

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १५ भदौ ।
सुदूरपश्चिमेलीहुकनके मौलिक संस्कृति ओ परम्परागत जीवनशैलीहे भावी पुस्तामे हस्तान्तरण कैना उद्देश्यसहित चैतन्य पाठशालासे यी वर्षके गौरा पर्व विशेष उत्साहके साथ मनैले बा ।

विद्यालयमे अध्यापनरत शिक्षिकाहुक्रे संस्कृति ओ मौलिक पहिचानप्रतिके सम्मान स्वरूप विद्यालय प्राङ्गणमे विविध कार्यक्रमसहित गौरा पर्वहे मनैले बटै । ‘संस्कृति ओ प्रकृति शैक्षिक दर्शन, वेद, विज्ञान, शिक्षा ओ संस्कार’ कना मूल मन्त्रहे आत्मसात् करटी विद्यालयसे यी बार फे कला, संस्कृति ओ परम्परागत मूल्यहुकनके संरक्षणमे अपन अडानहे प्रस्ट पारल हो ।
कार्यक्रमके सुरुवात शिक्षिकाहुक्रे परम्परागत पहिरन ओ गहना लगाके गौरादेवीके सामूहिक पूजा अर्चनाफे करल रहे । उ पाछे गौरा गीत ओ देउडा नृत्य प्रस्तुत करटी शिक्षिकाहुक्रे मौलिकता ओ सामूहिकताके उत्कृष्ट उदाहरण पेस करले बटै ।

गौरा पर्व सुदूरपश्चिम ओ मध्यपश्चिमके प्रमुख सांस्कृतिक चाडके रूपमे हरेक वर्ष भदौ महिनामे मनाजाइठ । विशेष करके महिलाहुक्रे गौरा देवीके आराधना करटी बिरुडा (पाँच मेरिक अन्न) भिजैना परम्परासे लेके देउडा खेलसमके सांस्कृतिक अभ्यास यी पर्वसंग जोरल बटै । यी पर्वसे नारी सशक्तीकरण, पारिवारिक एकता ओ सामुदायिक सहकार्यहे प्रवद्र्धन कैना करले बा ।
चैतन्य पाठशालाके यी प्रयाससे गौरा पर्वहे केवल चाड केल नैहुके समाजहे जोरना, आस्था ओ विश्वासहे बल्गर बनैना संस्कारके रूपमे लेहे पर्ना धारणा दर्साइल बा । विद्यालयसे स्थानीय संस्कृति ओ शिक्षाबिचके सम्बन्धहे जोरटी विद्यार्थी तथा समुदायमे मौलिक मूल्य बोध जगैना अभियानहे निरन्तरता डेना प्रतिबद्धता जनाइल बा ।

यैसिक विद्यालयमे गौरा पर्वके उल्लासपूर्ण मनाइल दृश्यसे संस्कृति ओ शिक्षा एक डुसरके परिपूरक हुइना कना सन्देश डेहल बा । गौरा पर्वमार्फत चैतन्य पाठशालासे अपन विद्यार्थीहुकनहे मौलिकता, आस्था ओ परम्परागत ज्ञानमे आधारित समाज निर्माणतर्फ प्रेरित करे चाहल विल्गाइठ ।

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