सुदूरपश्चिममे गौराके उल्लास

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १५ भदौ । सुदूरपश्चिममे गौरापर्वके रौनक छाइल बा । पञ्चमीसे गौरा भिजाके सुरु हुइल गौरा पर्वके अँटवार अथवा अठेवाली पर्व मनाइल बा । अठेवाली अथवा विरुडासे गौरीके पुजन करके आफन्तके मुरीके पुजन करके दिर्घायुके कामना कैना चलन रहल बा ।
सुदूरपश्चिमके गाउबस्तीसे शहरसम गौरामय हुइल बटै । पहाडसे तराई झरलहुकनके धनगढीमेफे भब्यताके साथ गौरा पर्व मनैले बटै ।
सुदूरपश्चिमके मौलिक पर्वमे रुपमे रहल गौरापर्वके अँटवार मुख्य दिन हो । अँटवार अठेवाली मनाइल बा । पञ्चमीके दिन भिजाइल अंकुरित हुइल विरुडासे अँटवार दिनभर गौरीके प्रतिमाके पुजा करजाइठ कलेसे गौरीके पुजा सेकलपाछे भोज महिलासे गोसिया, छावा छाई ओ आफन्तजनके मुरीके पुजन करके सुस्वास्थ्य एवम दिर्घायुके कामना करजाइठ ।
आजके दिन विरुडासे आफन्तके मुरीके पुजन करके आशिष मग्लेसे दीर्घायु हुइना विश्वास रहल ब्रतालु भागरथी विष्ट बटैली । ‘अँटवारके दिन गौरा पर्वके मुख्य दिन रहे । सबसे पहिले गौरी (पार्वती) ओ भगवान शिवके भोज करजाइठ । उ पाछे फल पटकाके आफन्तके मुरीके पूजन करके दीर्घायुके कामना करजाइठ,’ उहाँ कहली ।
धनगढीके शिवपुरी धाम, नैनादेबी ओ बनदेबी मन्दिरमे गौरा पर्व उल्लासके साथ मनाइठ । स्थानीयहुक्रे पञ्चेवाजा बजाके गौरीके प्रतिमाके परिक्रमा करठै कलेसे महिलाहुक्रे शिवपार्वतीके मंगल गाथा गाके पार्वती अवथा गौरीके पुजा कैना करठै ।
विफेक रोज व्रतालु महिलाहुक्रे घर÷घरमे ‘बिरुडा’ अथवा पाँच मेरिक अन्न, मास, केराउ, गहत, गोहुँ ओ गुराउस भिजैले रहिट । शुकके लग्गेक जलासय, कुण्ड वा कुवामे जाके सामुहिक रुपमे विरुडा धुइना कार्य सम्पन्न हुसेकल बा ।
शनिच्चर कना गौराके खालो अथवा आआपन पायक पर्ना मन्दिरमे गौरीके पुजन सम्पन्न हुइल बा । अँटवारके दिनफे स्थानीय भाषामे रहल सगुन तथा गौरी पुजनके फाग गैना चलन रहल बा । पुुरुषसे लगैना जनै जैसिन महिलाहुक्रे आजके दिन दुुबधागो लगैना करठै ।
गौरा पर्व महिलाहुकनके केल्ह पर्व हो । गौरा पर्वमे भोज हुइल महिला केल्ह ब्रत बैठे परठ । यी पर्वमे पुरुषहुक्रे ब्रत बैठे नैपरठ मने पुरुषहुक्रे गौरा पर्वके अवधरीभर देउडा, ढुस्को ओ धुमारी जैसिन खेल खेलके रहरङगी कैना करठै । ‘गौरा अइटीकी देउडा, ढुस्को धुमारीके सम्झना आजाइठ । पुरुषहुक्रे देउदा खेलके रहरङगी कैना करठै’ सुदूरपश्चिम सांकृतिक सम्बर्धन समितिके अध्यक्ष भोजराज भट्ट कहलै ।
भोज हुइल महिलाहुक्रे गौरा पर्वमे बैठना ब्रत अठेवालीके दिनसे सेकल बा । मने रहरङगीके लाग गौरा पर्व अभिन तीन दिनसे हप्ता दिनसम चली । तराईके जिल्लासेफे पहाडी जिल्लामे आउर गौराके रौनक ढेर हुइना करल बा ।
