जोहारी वकिलः थारु समाज ओ अधिकारके सवाल
सामाजिक सन्जाल आज्कल सुचनाके बरवार माध्यम बनल बा । इहे क्रममे २०८२ पुस ६ गते वकिल जोहारीलाल चौधरीके असमायिक निधनके खबर सामाजिक सन्जालसे मिलल् । इ खबरले मन मुर्झा गइल । काजे कि उहाँसे हम्रे संग्संग्हिक रहि । महिसे केवल एक बरसले भारि उहाँक् निधनले अपन जिन्गिके पन्ना फेन उल्टा बिल्टाके बिठ्कोर्नस मन लागल । मने इ आलेखमे अपन नाहि वकिल जोहारीके जिन्गिक फाइल खोल्नास मन लागल बा । मने उहाँसे मोर संगत कम हुइल कारन इ लेख भिट्टर गहिंर बुरनासे छिछ्लिएमे रना डर बा ।
उ डिन सामाजिक सन्जालके कभरमे वकिल जोहारीलालके निधनले दुःखी हुइल बहुट जाने डुचार लाइन लिख्के पोस्ट कर्ला । सामाजिक सन्जाल घम्झुल्का हो, एकघरि पहिले मनै ओराइलमे दुःखी हुइल बाट लिखि, डोसर स्टाटस होटलेम मिझनी सोखल फोटु डारि । गोह्वक् आँस गिराइ हस एक घरि दुःखी हुइना ओ केक्रो निधनसे कुछ शिक्षा लेना, कुछ प्रण कर्ना अलग अलग बाट हो । हम्रहिनसे सदाके लग विदा लेके गइल जोहारीसे का शिक्षा लेहे सेक्ठि कना प्रसंगमे इ लिख्नौटि नेंगल बा ।
जोहारी विसेसांक
जौन डिन वकिल जोहारीलालके असमायिक निधनके खबर आइल । उहाँक बारे थाकस कैलालीके पहिलक कावा अध्यक्ष माधव चौधरी ओ मैगर संघरिया दिलबहादुर चौधरीसे फोनेम बाट कर्नु । दिलजीहे उहाँक् बारे लिख्ना अर्जि कर्लु । उहाँ जोहारीक् बारे हलि हलि लिख्लाँ, मने मन निचोरके लिख्लाँ । उहि लावा डग्गर अनलाइनमे प्रकाशित कैगैल । (इहे बिसेसांकमे फेन उ लेख समोट गइल बा) मने अट्रेमे मोर मन नै भरल । पहुरा दैनिकके कानुनी सल्लाहकार रहल उहाँक बारेम कुछ बिसेस निकारक चाहि कना मनसुवा सम्पादक प्रेम दहितहे कहलुँ । फलस्वरुप इ लिख्नौटि फेन जन्मना मौका पाइल ।
जोहारी आउर वकिलसे बिसेस रहिट । समाजसेवा कुट कुटके भरल रहिन । थारुपनके नारा उहाँक् भित्रि मनसे निक्रिन । आउर वकिललोग पैसेक लग किल डौरठाँ, मने उहाँ अपन समाजसे जोरल अलग वकिल रहिट ।
मोर चिनजान
वकिलसापसे मोर पहिल चिनजान २०४५ सालओर महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पस नेपालगन्जमे हुइल हस लागठ । पाछे बेस संस्थासे कमैयन्के बारे स्थलगत अध्ययनके सिलसिलामे कैलारीमे परगा डारेबेर २०४७÷२०४८ सालओर उहाँक घर हालके जानकी गाउँपालिका दुर्गौली गाउँ पुगल रहुँ ।
चार दशक पहिले हुइल भेट अब्बे हुइल हस लागठ । थारु समाजहे कइसिक आगे उठाइ सेकजाइ, थाकस काजे सुटल रहठ, इहि कैसिक जगाइ सेकजाइ कना सबहस भेटमे उहाँ चिन्ता जटाइट ।
थारु भासाके वकालत
जोहारी वकिल जिन्गिभर थारु भासाके वकालत कर्ला । थारु लेखक संघ नेपालके संस्थापक सदस्य, कानुनी सल्लाहकार, पहुरा दैनिकसे लेके बहुट संघसंस्थाके कानुनी सल्लाहकार रहिट । मने कोनो संस्थाहे उहाँहे पारिश्रमिक डेके सेवा लेहल कना महि नै लागठ ।
थारु भासामे पह्राइ लिखाइ हुइक चाहि कना उहाँक मनसुवा रहिन । मने पुस १८ गतेक् उहाँक रोटी भातके नेंउटा हेरेबेर नेपाली भासामे बिल्गाइल । यदि उहाँक सपना पुरा कर्ना हो कलेसे लिखाइ, बोलाइमे ढेरसे ढेर अपने मातृभासा बेल्से पर्ना जरुरि बा ।
सद्भाव बह्रे
धनगढी बजारके सद्भावना टोलमे बैठिट उहाँ, जौन टोल कुछ डिन यहोर उहाँक् निधनले सुनसान बा । मने ढिरे ढिरे उहाँ कन्फोर मचाइ जरुर डिजे बजे लागि । माघ लग्गे बा, डिजे घन्कना डिन डुर नैहो । मने जिहिसे नियमित मोर्निङ वाक करिट, उ डिजे (दिलबहादुर–जोहारी) आब कबु नै बजि । जोहारीहे मैंया करुइया सद्भावना टोलवासी हरदम एकापसमे सद्भाव राखिट ।
थारु समाज पछ्रल बा टे जे फेन कहठ, मने पछ्रल समाजहे टेक्नी लगुइया, अधिकारके लग लरुइया बहुट कम मनै बटाँ । उहे टेक्नी लगुइया मध्ये उहाँ एक रहिट । उहाँक परिवारके सदस्यलोग फेन आब उहाँक सहयोगी भावना, समाजसेवामे चिल्वास राखक चाहि । जिहिसे उहाँक आत्मा सम्मान पाइन् ।
समयके ख्याल
धनगढी पुगेबेर मै विशुद्ध पहुनि किल खाइ नै जैठुँ । कुछ न कुछ अध्ययन, कार्यक्रममे सहभागिताके सिलसिलामे मोर पौलि ओहोर खर्कल रहठ । थारु लेखक संघ नेपालके केन्द्रिय अध्यक्षके नाताले उहाँ दर्ता हुइल संस्थाके वार्षिकोत्सवमे सबहस बरस पुग्ठु । धनगढी गइलबेला वकिलसापसे औपचारिक कार्यक्रममे होए या अनौपचारिक जरुर मुलाकात होए । उहाँ समयके बहुट ख्याल कर्नाहा रहिट । बलाइल समयमे पुग्ना उहाँक बान रहिन ।
समयके सम्मान करक चाहि कना उहाँसे सब्जे सिख्खा लेहक चाहि । विडम्वना कालभैरव उहाँहे पो असमयमे बलाके लैगैल ।
थाकस ओ जोहारी
वकिल जोहारी बिटल डिन जोहारी, थारू नागरिक समाजके दिलबहादुर चौधरी, अपनसहिट फोटु डारके फेसबुकमे पुरान संझनाबारे थारुवान डटकमके सम्पादक मदन चौधरी लिख्ले बटाँ, ‘धनगढी निवासी अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरीको असमायिक निधनले दुखित बनाएको छ । उहाँ थरुहट मुद्दाका लागि मात्र होइन, धनगढीका थारूहरूको कानुनी सल्लाहकार पनि हुनुहुन्थ्यो । बैकुन्ठ बास होस् । डिजे अर्थात् दिलबहादुर– जोहारीलाल गु्रपसँग मर्निङ वाक र चिया गफ गरियो । यसअघि नै यो गु्रपसँग प्रभावित भएको म धनगढी पुगेर साक्षत्कार गर्ने अवसर खेर फालिन । उहाँहरूको रेगुलर बहसमा आजको मुख्य विषय रह्यो थाकस । थाकसको विकासमा युवाहरूहरूको सहभागिता अनिवार्य भइसकेको निचोड निकालियो । तर, के थारू युवाहरू थाकसको नेतृत्व गर्न तयार छन त ? वा उनीहरूलाई नेतृत्व सुम्पिन अहिलेका पदाधिकारीहरू तयार छन् ? बहस गरौं ।’
अइसिक डिजे गु्रपमे उठल बाटहे पत्रकार मदनके उठाइल मुद्दा जेनजी आन्दोलनके प्रसंगमे एकदम समसामयिक बा । थाकसमे ठँरिया (युवा) लोग नै आइटसम थारु अधिकारके बाट जोन रुपमे उठे पर्ना हो, नै सेकि । जोहारीके भित्री चाहना पुरा हुइ नै सेकि ।
जोहारी बिटल डिन थाकस महामन्त्री मिनराज चौधरी फेसबुकमे लिख्ले बटाँ, ‘सार्हु अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरीके कानुनी सेवा तर्फके विज्ञता, अनुभव, सामाजिक सेवामे समर्पित सालिन भद्र जीवन शैली हमार समाजके लाग हरदम प्रेरणा बनल बा ।’
कोनो मनै बिट्ठाँ कलेसे कुछ डिन सम्झबो ओ बिस्रा डर्बो । ओइनके प्रेरणाहे जिवन्तता डेहक लग समाजके टरफसे फेन कुछ करे परठ । जे जिन्गिभर समाज समाज कहटि डौरटा, समाजके भलो चिटाइटा, ओकर योगदान उ बिट्ले पर फेन नाइ बिस्राइक चाहि । जोहारीहे हरदम सम्झक लग उहाँक् नाउँमे पुरस्कार स्थापना होए, अक्षय कोष खडा होए । थारु अधिकारके वकालत करुइयनहे परटेक बरस उहाँक् पुन्य तिथिमे उ पुरस्कार डे जाए । यम्ने परिवारके सहयोगके साठ साठे थाकसके फेन होस्टेमे हैसे रहे कना मोर अर्जि हो ।
थाकस महामन्त्री मिनराज चौधरीजि, फेसबुकमे डुचार लाइन लिख्के अपन जिम्मेवारि पुरा हुइल ना ठानि, थाकस केन्द्रसे जोहारीके सम्झनाहे जिवन्त राखक् लग कुछ पहल करि । आबक लग थाकस कैलाली यकर अग्वाइ करे । पहिलक काबा अध्यक्ष माधव चौधरी इ मामलामे ढेर चिल्वास डिंट । मै धनगढी ओल्हैनासे पहिले अक्षय कोष बनल सुखद समाचार सुने मिले, उहाँ गइल बेला कोषके अग्वनसे भलाकुशारी होए, इहे मनसुवा बा ।
जैटि जैटिः
इ लिख्नौटि निम्जाके जैटि जैटि उहाँसे करल वादा जरुर पुरा कर्ना मन बा । धनगढी गइल बेला जोहारी वकिलसाप महि ढेर फेरा अपन घर चाय पियक बलैलाँ । मने डोसर बेर अइम कहटि निप्चटि गइलुँ । समयके लेखा आज उहाँ सदाके लग निपुच गइलाँ ।
ओ, वकिलसाप अपनेक रस्टि बस्टि रहल ठाउँ जौन रोज मै अइम्, चायक पहिला गिलास अपनेक डुवारिक उठैम । सुगरके बेरामि जरुर उहाँ चिनि डारल चाय नै पियठुइबि । करिया चाइ, उ फेन बिना चिनिक चियर्स कैके पिना अपनेनसे वादा रहल । अपनेसे हलि भेट हुइना डरले चिनि डारल चाय नै पिना अज्कलेसे अभ्यास करटुँ । जय गुर्वावा ।


