थारु बस्तमीमे माघक् उल्लास
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, ३० पुस । पुस महिनाके अन्तिम दिनसे पश्चिम नेपालके थारु बस्तीमे माघक् उल्लास छाँइल बा । दाङसे कञ्चनपुरसमके थारु बस्तीमे विशेष रौनक छाइल हो ।
ओइसिक टे आमनेपालीहुक्रे माघ १ गते माघे तथा मकर संक्रान्तिके रुपमे आ–अप्ने रिती संस्कृति अन्सार मनैलेसे फेन थारु समुदायमे लौव अध्याय अर्थात लावा सालके सुरुवात हुइना टिहुवारके रुपमे हर्षोल्लासके साथ मनैटी आगिल बा ।
कामके शिलशिलामे घरसे दुर–दुर रहल डाडुभैया टिहुवार मनाइक लाग गाउँघरमे जम्मा हुइल बटै । चेलीबेटीहुक्रे लैहर घर पुगल बटै । गाउँक् नेतृत्वकर्ता अर्थात बरघर, भल्मन्सा, देशबन्धिया, गुरुवा, भर्रालगायत माघ महिना मन्से चयन हुइना हुइलओरसे नेतृत्व चयनके बहस सुरु हुइटी रहल बा । अत्रहि किल नाई होके थारुवस्तीमे माघौटा नाच, सखिया नाच, झुमरा नाच, लाठी नाच, ढमारलगायत लोक गीत संगे डफ ओ मन्ड्राके आवाज फेन गाउँघर गुन्जे लागल बा ।
तीन दिनसम मनैना टिहुवारके सुरुवात पुसके अन्तिम दिन अर्थात आज पुस ३० गते (बुध) के रोजसे सुरु हुइल बा । माघ १ गते लग्गेक् लडिया, टलुवा, पोखरीमे लहैना ओ आ–आपन नातपातहुकनहे भेटघाट कर्र्ना, आपन उमेरसे बरवार मनैनसे अर्शिवाद लेना ओ छोट मनैन्हे अर्शिवाद डेना प्रचलन रहल बा । यी दिन फेन आपन घरमे रहल ढिकरी लगायतके पाकवान खैना ओ खवाइना चलन रहल फेन थारु बुढापाकाहुकनके कहाई बा ।
मकर संक्रान्तिके दिन लहैलेसे बरसभरिक करल पाप वा नैमजा काम, कुकर्म, वैमनष्यता धो जिना ओ पूण्य प्राप्त हुइना धार्मिक जनविश्वास रहल बा । यी दिन पशुपक्षी बध नैकरेक पर्ना धार्मिक मान्यता बा । यी दिनहे थारु समुदायमे लावा बरसके रुपमे मानजाइठ् ।
माघे सङ्क्रान्तिके दिन विशेष कैके थारू समुदायमे सक्करही उठके लग्गेक लडिया अथवा टल्वामे जाके लहाखोरके घरमे अलग्गे छुट्याके राखल चाउर, नोन, तेल ओ बेसारलगायत खाद्यान्न छुना चलन रहल बा कलेसे छुट्याइल उ चिजमे थप परिकार थपके घरके छाइ बेटीयनहे डेना परम्परा रहटी आइल बा, जिहीहे ‘निसराउ’ कहिजाइठ् । ओकर पाछे आपनसे बरवारहुक्रनसे ढोगसलाम लग्टी आर्शीवाद लेना चलन रहल बा ।
माघ टिहुवारके टेसर दिन (माघ २ गते) हे खिच्रहवा कहिजाइठ । यी दिनसे माघी देवानी तथा खोजनी बोजनी सुरु हुइना थारु बुद्धिजीवीहुक्रे बटैठै ।
थारु नागरिक समाज कैलाली संयोजक दिलबहादुर चौधरीके अनुसार माघ टिहुवार पुस ओराइल दिनसे सुरु हुइना हुइलओरसे माघ २ गतेहे टिहुवारके टेसर दिन मानेक पर्ना बटैठै । जौन दिनसे थारु गाउँ–गाउँमे लावा नेतृत्वकर्ता एंव भल्मन्सा, बरघर, देशबन्धिया, अघरिया, भर्रालगायत चयन कर्ना या अनुमोदन करजाइठ । असिक नेतृत्व छान्न कामहे ‘माघी देवानी’ कहिजाइठ् । असिन प्रचलन दाङसे पश्चिउ कञ्चनपुरसम रहल बा ।
एकठो परिवारके सक्कु सदस्यहुक्रे एकजुट होके अइना दिन पारिवारिक गतिविधि कसिक आघे बह्रैनावारे फेन छलफल करजाइठ् । इहीहे ‘खोजनीबोजनी’ फेन कहिजाइठ् ।
‘खोजनीबोजनीमे आघेक बरस परिवारमे करल गतिविधि, आर्थिक हरहिसाबबारे फेन छलफल करजाइठ्’, संयोजक चौधरी कहलै–‘छलफलसे अगामी दिनके लाग परिवारके योजना तर्जुमा फेन करजाइठ् ।’


