थारु पहिचान संरक्षण करेपरठः प्रदेश प्रमुख मियाँ
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १६ माघ । सुदूरपश्चिम प्रदेश प्रमुख नजिर मियाँ थारु भाषा, संस्कृति, परम्परा ओ सभ्यताके संरक्षण अत्यन्त आवश्यक रहल बटैले बटै ।
थारु आयोगके सातौँ वार्षिक प्रतिवेदन बुझ्टी उहाँ मौलिक संस्कृति संरक्षणमे आयोगसे खेलल भूमिकाके प्रशंसा करलै ।
आयोगके कार्यवाहक अध्यक्ष सुबोध सिंह थारुसे बिफेक रोज आयोजित कार्यक्रममे आर्थिक वर्ष २०८१÷०८२ मे आयोगसे सम्पादन करल काम–कारबाही समेटल वार्षिक प्रतिवेदन प्रदेश प्रमुख मियाँहे हस्तान्तरण करल हुइट ।
उ प्रतिवेदनमे थारु समुदायके हक, अधिकार, भाषा, संस्कृति ओ पहिचान संरक्षणके लाग आयोगसे करल गतिविधि समेटल बटै । उ अवसरमे प्रदेश प्रमुख मियाँ पौराणिक थारु कला, संस्कृति ओ सभ्यताके चर्चा करटी अब्बेक पुस्तासे अपन पहिचान बिरसटी गैलप्रति चिन्ता व्यक्त करलै ।
‘पौराणिक थारु संस्कृति, परम्परा ओ सभ्यता अब्बेक पुस्तासे बिस्रैटी गैल विल्गाइठ । यकर संरक्षण अति आवश्यक बा । येम्ने आयोगसे खेलल भूमिका प्रशंसनीय बा,’उहाँ कहलै ।
मुलुकमे सबसे ढेर थारु समुदायके नागरिक कैलालीमे बसोबास करटी रहल उल्लेख करटी प्रदेश प्रमुख मियाँ ओइनके हक ओ अधिकार सुनिश्चित कैना आयोगसे करटी रहल कामबारेफे चर्चा करलै । आयोगके अनुसार कैलाली जिल्लामे केल्ह थारु समुदायके जनसंख्या ३ लाख ३२ हजार ९९० रहल बा ।
कार्यक्रममे आयोगके कार्यवाहक अध्यक्ष सुबोध सिंह थारुसे प्रतिवेदनमे समेटल थारु समुदायके वर्तमान समस्या, चुनौती ओ सम्भावनाबारे प्रदेश प्रमुखहे जानकारी करैलै । उहाँ विद्यालय तहसे थारु भाषा अध्ययन करेपर्नामे जोड डेलै ।
‘अब्बेक पुस्तासे अपने पहिचान बिस्रैटी गैल विल्गाइठ । टबमारे आयोगमार्फत विद्यालयमे थारु भाषा अध्ययन करे परठ माग करटी रहल बटी,’ उहाँ कहलै, ‘कुछ स्थानीय तहसे थारु पाठ्यक्रम निर्माण करसेकल बटै । आब प्रदेश सरकारसेफे यम्ने ध्यान डेहे परठ ।’
सुदूरपश्चिम प्रदेश सभासे बडघर प्रथाहे कानुनी मान्यता डेना विषयमेफे आयोगसे चासो राखल उहाँ जानकारी डेलै । यैसिन व्यवस्था अन्य प्रदेशमेफे लागु हुईपर्ना उहाँक कहाई रहे ।
प्रतिवेदन हस्तान्तरण कार्यक्रममे आयोगके शाखा अधिकृत धर्मबहादुर थारु, थारु कल्याणकारिणी सभाके केन्द्रीय उपाध्यक्ष प्रभात कुमार चौधरी, केन्द्रीय सदस्य पुरनप्रसाद चौधरी, रामकुमारी चौधरी, जिल्ला सभापति वीरबहादुर चौधरीलगायतके उपस्थिति रहे ।


