थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका

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[ थारु सम्बत १५ कार्तिक २६५०, शनिच्चर ]
[ वि.सं १५ कार्तिक २०८३, शनिबार ]
[ 31 Oct 2026, Saturday ]
‘ सम्पादकीय ’

थारुनके धर्म का ?

पहुरा | २० फाल्गुन २०७७, बिहीबार
थारुनके धर्म का ?

धनगढी उपमहानगरपालिका, न्यायिक समिति सोम्मार नगरके भलमन्सा, धार्मिक अगुवनसंगे प्रचलित कानुनी व्यवस्थाके बारेमे अन्तरक्रिया करले बा । न्यायिक समितिहे सम्पादन कैनामे सहयोग पुगे कहिके ओइनसे अन्तरक्रिया करगिल हो । मने गाउँक भलमन्सा, बरघर, गुरुवनसे हमार चालचलन, संस्कृति कहोर जाइटा, हमार धर्म का हो ? इ बारे कोनो छलफल चलाइल नैसुन्जाइठ ।

२०७८ सालके जनगरना लेना क्रम कुछ महिनम् सुरु हुइटि बा । मने थारुनके धर्म का लिखैना यकर बारेम कोनो छलफल हुइ नै सेक्ठो । आदिवासी जनजाति उत्थान राष्ट्रिय प्रतिष्ठान जनजातिन्के परिभासा डेहेबेर जनजातिन हिन्दुइतर कले बा । खास कैके छयालिसके आन्दोलनके बाद जातीय पहिचानके बाट उठ्लक हो । डोसर जनआन्दोलन ०६२÷०६३ पाछे जातीय पहिचानके बाट आउर बह्रटा मुखर हुइल । इहे क्रममे राइ, लिम्बु, सुनुवार लगायट जाति २०५८ सालके जनगरनामे अपन धर्म किरात लिखाइ सुरु कर्ला । २०६८ सालके जनगरनामे किराँत लिखुइयनके संख्या आउर बह्रल ।

मने थारु अपनहे हिन्दु लिखाइक नै छोर्ले हुइट । जबकि आदिवासी जनजाति उत्थान राष्ट्रिय प्रतिष्ठान जनजातिन्के परिभासा डेहेबेर जनजातिन हिन्दुइतर कहठ । हुइना टे के का धर्म मन्ना कोनो फे व्यक्टिनके अपन स्वतन्त्रताके बाट हो । २०६४ सालमे लुम्बिनीमे हुइलक भेलामे थारु कल्याणकारिणी सभा थारुन्के धर्म बौद्ध लिखैना निर्नय कर्ले रहे । मने २०६८ सालके जनगरनामे बौद्ध धर्म लिखुइया थारु नगन्य रहलाँ । सप्तरी, उदयपुर लगायटके जिल्लाके कुछ थारु अपनहे बौद्ध धर्मावलम्बी कहटि अपन थर जो शाक्य लिखाइक सुरु कर्टि बटा ।

थारुन्के संस्कार, चालचलन हेरेबेर हिन्दुक लग्गे बिल्गाइठ । बहुट जनजातिनके आरोप बा, राज्य जवर्जस्ति सक्हुन हिन्दु धर्म मन्ना बाध्य बनाइल । ओहेसे अपन अलग पहिचानके लग हिन्दु धर्मसे बाहर निकरना चाहि ।

अप्कि २०७८ सालके जनगरनक् फारममे धर्मके कोलममे ‘प्रकृति’ फेन उल्लेख हुइल बा । थारु कोनो अन्न उब्जलेसे प्रकृतिहे चह्रैठाँ । ओहेसे अइना जनगरनामे थारुनके मन्ना धर्म प्रकति पो लिखैना हो कि थारु अगुवन सल्लाह करिट ।

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