थारु राष्ट्रिय दैनिक
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फिलिपिनी चेली बन्ली थारु पटुहिया

पहुरा समाचारदाता | २२ फाल्गुन २०७६, बिहीबार
फिलिपिनी चेली बन्ली थारु पटुहिया

लखन चौधरी
धनगढी, २२ फागुन । बह्रटी रहल आधुनिकीकरण ओ सूचना प्रविधि विश्व मानचित्रहे साँकिर बनाडेले बा । स्वतन्त्र रुचैना मनै एक कोन्वा मन्से करोडौं माइल दूर पार करके डोसर कोन्वा पुग्ठै । सम्बन्ध विस्तार कर्ठै । आपन संसार सजैठै ।
एक उदाहरण हुइटै कैलालीके धनगढी उपमहानगरपालिकाका–७ देवहरियाके शेरबहादुर चौधरी (३०) । जे हालै फिलिपिनके चेलीसे भोज करके गोसिनिया बनैले बाटै । उ फेन थारु परम्परागत संस्कार अनुसार फिलिपिनके ईलुईलु शहरके ह्यानी गोहुम अर्तुज (३०) के माँग भर्ले बाटै ।
धनगढी देवहरियाके शेरबहादुर ९ बरस पहिले वैदेशिक रोजगारीके क्रममे दुबई पुग्लै । सुरुवाती चरणमे उहाँ दुबईके क्यारीफोर कम्पनीमे ट्रली ब्वाईके रुपमे कार्यरत रहिट ।
फिलिपिनके ईलुईलु शहरके ह्यानी फेन वैदेशिक रोजगारीके क्रममे ५ बरस पहिले ओहे कम्पनीके क्यासियर पदमे आवद्ध रही । कम्पनीके पदीय क्रम अनुसार शेरबहादुर ह्यानीसे तल्लो ओहादामे कार्यरत रहै ।
एक्के कम्पनीमे कार्यरत रहल कारण उहाँहुकनबीच चिनजान हुइल । ढिरेसे प्रेम पलाई लग्लीन् । सायद ओहेकमारे कहठै, प्रेम अँधर रहठ । उहाँहुकनके प्रेम देशके सीमाना नैडेखल । भौगोलिक दुरी नैमानल । धर्म, समाज, संस्कार ओ पारिवारिक टमान बन्धनहे फेन नैडेखलन । सक्कुु बन्धनसे उन्मुक्त रहे । बहुट मैगर रहे, उहाँहुकन प्रेम । ५ बरसके अवधीमे कब्बु नैछुट्न मेरके बाझगिल ।
‘महिल लागठ, प्रेम सम्बन्धके कौनो बन्धन नैरहठ । उ हम्रहिनमे फेन लागु हुइठ’, शेरबहादुर ह्यानीसे रहल सम्बन्ध खुलैलै–‘फरक देश, फरक समाज, फरक संस्कृतिसे आई सेक्ना सम्भावित चुनौतीसे सामना कर्ना हम्रे तयार हुइली । फलतः संगे बच्न, मर्न बाचाके साथ भोजके कदम रोज्न राजी हुइली ।’

भोजसे पहिले सस्रार पुग्लै
प्रेम सम्बन्धपाछे भोज कर्ना राजी हुइल शेरबहादुर सुसुराली देश फिलिपिनके सुुसुराली सहर ईलुईलु पुग्लै । सासुरुवा विलियम अर्तुज ओ ससुइया मारगोरिता अर्तुजसे सम्बन्ध बह्रैलै । प्रेम सम्बन्धपाछे संगे बैठ्न निर्णय सुनैलै ।
‘सस्रार गैनुु, मजासे स्वागत सत्कार कर्लै महिन । हम्रे हमार निर्णय सुनैली, सस्रारके ओहोरसे मजा प्रतिक्रिया पैली । उहाँहकनके सकारात्मक प्रक्रियासे हमार प्रेम आउर पक्रन वातावरण पाइल’, शेरबहादुर आघे कहलै ।
उहाँके सुसुराली परिवारमे (ह्यानीक् लैहर) सासु, ससुरा, २ जेठान, २ साला, १ दिदी रहल बाटै । समान्य कृषि पेशामे ससुरानी परिवार आवद्ध रहल शेरबहादुर सुनैठै ।
ओहोर शेरबहादुर पुगलपाछे, १ बरस पहिले ह्यानी फेन नेपालके सुदूरपश्चिम प्रदेशके राजधानी कैलालीके धनगढी अइली । धनगढीभिट्टरके थारु वस्तीमे १५ दिन बिटैली ।
फलतः भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिकलगायत कठिनाईहे पन्छासेकल ह्यानी आब थारु परिवारके पटोहिया बनके भित्रल बाटी । हाल उहाँके माध्यम भाषा अंग्रेजी हो । तबफेन उहाँ नेपाली भाषा फेन सिख्न प्रयासमे बाटी । शेरबहादुरके परिवारमे उहाँके बाबा, डाई, दादा भौजी, डिडी ओ भतिजुवा बाटै ।

थारु परम्परा अनुसार भोजएक्के कम्पनीमे कार्यरत उहाँहुक्रे फागुन १९ गते धनगढीके थारु वस्तीमे थारु परम्परा अनुसार बन्धनमे बाँधल बाटै । डुलहनियाक् पक्षसे कोई फेन उपस्थित नैहुइलेसे फेन थारु वस्तीके भलमन्सालगायत जन्नमान्न मनैन्के रोहबरमे समाजको रिती अनुसार भोज कर्ले बाटै । थारु समुदायमे असिक कर्ना भोजहे पर्छौटी कहिजाइठ । भोजके क्रममे डुलहनियाहे सप्राके छिमेकी एक घरमे लैगिल रहे । ओकरपाछे डुल्हा डुलहनियाहे लेहे गैलै छिमेकी घर । डुल्हाक् भातुुु गन्जुवा (डुल्हाक् अगुवा) बनके बर्झी बोकके आघेआघे नेंग्लै । नानलपाछे डुल्हाक् भौजी नविना चौधरी डुल्हा ओ डुल्हनियाहे ‘संगे रहहो, खुशी रहहो, झगरा नैकरहाे, प्रगती करहो’ कहटी डुल्हा ओ डुल्हनियाक् कपार ढ्वाङ–ढवाङ लराके पर्छली । कुल देउताहुकनके पूजा करागिल । कुल देउतान्हे छाँकी (डारु) चह्रागिल । सुव्वर, छेग्रीलगायत मारके भोजमे आइल नातपात, छरछिमेकलगायतहुकन धुमधामसे खुवागिल ।
शेरबहादुर भोजवारे कहलै–‘थोरचे अपसोच ओत्रही किल हुइल, सुसुराली पक्षके भोजमे सहभागी हुइना इच्छा रहटी रहटी फेन भौगोगिक कठिनाईसे उपस्थित कराई नैसेकगिल ।’
छावाके भोजप्रति शेरबहादुरके परिवारजन फेन बहुट खुशी बाटै । शेरबहादुरके डाई फुुलपति डंगौरा थरुनी फोहैटी कहली–‘हम्रे सक्कु जे बहुट खुशी बाटी । छावाक् कदममे हम्रे साथ डेले बाटी ।’
ह्यानी फेन खुसी बाटी । अप्ने फरक देश, फरक सामज, फरक संस्कारमे सम्बन्ध बह्रैले बाटी कसिन महसुुस करटी कना जिज्ञासामे ह्यानी फेन खुशी सुनैली–‘मै बहुट खुसी बाटुु । भाग्यमानी अनुुभुती कर्ले बाटुु । जीन्दगी जिए जानेक् परठ, बहुट खुसी मिलठ । संघर्ष ते जेहिही फेन करही परठ ।’
भोजपाछे कानूनी प्रक्रिया पूरा करके शेरबहादुर ओ ह्यानी फेरसे दुबई फर्कन बटैले बाटै । हाल उ कम्पनीके जनसम्पर्क अधिकृत (पिआरओ) मे कार्यरत शेरबहादुर कुछ बरस दुबई बसाईपाछे नेपालमे फर्कन योजनामे बाटै ।

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