थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १६ अगहन २६४३, मंगर ]
[ वि.सं १६ मंसिर २०७७, मंगलवार ]
[ 01 Dec 2020, Tuesday ]

थारु महिलाः हस्तकलामे सिपार

पहुरा | ३० भाद्र २०७७, मंगलवार
  • 485
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    485
    Shares
थारु महिलाः हस्तकलामे सिपार

उन्नती चौधरी
धनगढी, ३० भदौं ।
खेतीपातीके काम सेकल ओ कोरोना संक्रमण महामारी रोकथामके लाग लागू करल लकबन्दी÷निषेधाज्ञासे घरेम बैठे परल बेला थारु महिलाहुक्रे हरचाली अर्थात् फुर्सदके काम करटी हस्तकलाके सामान बनैटी रहल बटै ।

बठौनी सेकलपाछे यहोरके समयमे कैलालीके थारु महिलाहुक्रे फुर्सदमे बाटै । ओम्नेफे कोरोना भाइरस संक्रमण जोखिमके कारण अभिन जिल्लाभर निषेधाज्ञा लगाइल कारण घरेक बसाइमे खाली समय अभिन ढेर बा । यी समयहे थारु महिलाहुक्रे ‘हरचाली’ अर्थात् फुर्सदके काममे लगैटी रहल बाटै ओइने परम्परागत सीपके उपयोग करटी घरायसी प्रयोजनके टमान सामग्री बिन्टी रहल बाटै ।

थारु महिलाको ‘हरचाली’: ढकिया, नुइया बुन्ने सिपालु हात

कैलारी गाउँपालिका–८, दुधियाके रामकिस्नी चौधरी (४८) फुर्सदके समय सदुपयोग करटी ढकिया, नुइया ओ डेलुवा बिन्नामे व्यस्त रहल बटैठी । थारु समुदायमे छाईक भोजमे यी सामग्री सगुनके रुपमे प्रयोग हुइठ । तीन छाई मन्से भोज कैना बाँकी दुई छाईक भोजके लाग बिन्टी रहल रामकिस्नी बटैठी ।

‘और बेला बाहेरके काम ढेर हुइना ओरसे घरेम बैठना ओटरा समय नइरहठ, यी वरस भर कोरोनाके कारण फुर्सदिलो हुइलपाछे ढकिया, नुइया बिन्टी रहल बाटु, उहाँ कहली ।

ढकियाके प्रयोग सामान धरना ओ ओसरना काममे करजाइठ कलेसे कलात्मक रूपमे बनैना डेलुवा पश्चिम नेपालके थारु समुदायमे प्रायः भोज तथा औपचारिक कार्यक्रममे सजावट सामग्रीके रुपमे प्रयोग हुइठ । ढकिया, नुइया, डेलुवा पुँजा, मुन्ज ओ खपहेटसे बनाजाइठ । उ संगे बाँस, जुट, ऊन लगायतके प्रयोग करके यैसिन घरायसी सामग्री बनैना करजाइठ ।

परम्परागत सीप प्रयोग करके बहुट जे व्यक्तिगत प्रयोजनके लाग ओसिन सामग्री बनैना करले बटै कलेसे कतिपय बिक्रीफे कैना करल बाटै ।

कैलारी गाउँपालिका–८ के सानु चौधरी (४५) फे धान लगाई सेकल यहोर डेलुवा बिन्नामे व्यस्त बाटी । उहाँ डेलुवा बिनके घर खर्च जोहो करठी । एक ठो डेलुवा रु.७ हजारसे १० हजारसममे बेच्न करल उहाँ सुनैठी ।

छाईक भोजके लाग मनै डेलुवा किने अइना ओ होटल लगायतमे सजावटके लागफे बिक्री हुइना उहाँ बटैली । ‘मै बिनल ढकिया ओ डेलुवा विदेशी पर्यटकहेफे बेचले बाटु उहाँ कहली ।
डेढ दशकसे यैसिन सामग्री बिन्टी आइल सानुके अनुभवमे डेलुवा बिन्ना सीप चाहना टे परली बा, मिहिनेतफे ढेर लागठ । ‘बुट्टा मसिन रहठ, सजैना ढेर समय लागठ उहाँ कहली, ‘एक ठो डेलुवा तयार परना १० से १५ दिन लागठ ।’

लकबन्दीसे परम्परागत सीपमे केन्द्रित

कोरोना संक्रमण महामारी ग्रामीण भेगसम फैलल बा । संक्रमण रोकथामके लाग लगाइल लकबन्दी÷निषेधाज्ञासे ग्रामीण बासिन्दाहे परम्परागत तथा पुर्ख्यौली ज्ञान ओ सीपमे केन्द्रित हुइना अवसर डेले बा ।

चाडपर्व लग्गे हुइटी जाईबेर पर्वमे चहना वस्तु बनाईबेर एक ओर समयके सदुपयोग हुइना ओ दुसर ओ घरेम बैठना हुइल ओरसे संक्रमणसे सुरक्षित हुइना कैलारी गाउँपालिका–६ बेनौलीके वडा सदस्य महावीर चौधरी बटैठै ।

बेनौलीके सुझावन डंगौरा थारु (६५) हेफे महामारीके वेला यहोर ओहोर नेंगके जोखिम मोल्नासेफे घरेम बैठके हरचाली कैना मजा लागल बा । उहाँ मच्छरी बजैना ढडिया बिन्टी रहल बाटै । थारु जातीमे ढडिया बनैना हस्तकला पुस्तौंसे चल्टी आइल मच्छी बझैना मौलिक प्रविधि हो । ‘ढडियामे दिनहुँ मच्छी फस्ना ओरसे हमार घरेम प्रत्येक दिनके खान्कीमे मच्छी रहठ’ उहाँ कहठै, ‘ढेर रहल मच्छीके पक्ली (सिढरा) बनैठी जौन चाडपर्वमे विशेष परिकार रहठ ।’

अब्बेक फुर्सदके समयमे कैलालीके ग्रामीण बस्तीके थारु समुदायके मनै टापी, जाल, बरेरुवा लगायत मच्छी बझैना साधन, डिलिया, खटिया, सुप्पा, छिट्नी, वस्तुभाउहे बाँध्न प्रयोग कैना पगाहा, बेना (हाते पंखा) लगायत बुन्न काममे व्यस्त विल्गाइठ ।

साभारः हिमालखबर

  • 485
    Shares

जनाअवजको टिप्पणीहरू