थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १३ अगहन २६४६, मंगर ]
[ वि.सं १३ मंसिर २०७९, मंगलवार ]
[ 29 Nov 2022, Tuesday ]

थाकससे शिक्षा विकास छात्रवृत्ति अक्षयकोष निर्देशिका सार्वजनिक

पहुरा | १९ आश्विन २०७७, सोमबार
थाकससे शिक्षा विकास छात्रवृत्ति अक्षयकोष निर्देशिका सार्वजनिक

चितवन, १९ कुवाँर । थारु कल्याणकारिणी सभा जिल्ला कार्यसमिति चितवनसे शिक्षा विकास छात्रवृत्ति अक्षयकोष निर्देशिका २०७७ सार्वजनिक करले बा ।

बाग्मती प्रदेश चितवन जिल्लाके क्षेत्र नं. १ से १० भिटर बसोबास कैना आर्थिक सामाजिक साँस्कृतिक शैक्षिक दृष्टिकोणसे पाछे पारल विपन्न परिवारके थारु विद्यार्थीहुकनहे गुणस्तरीय शिक्षा हासिल कैना शैक्षिक तथा प्रशिक्षण विभाग मार्फत सञ्चालन एवम् व्यवस्थापन हुइना करके ‘शिक्षा विकास छात्रवृत्ति अक्षयकोष–२०७७ तयार पारल सभापति ललितकुमार चौधरी बटैलै ।

स्वदेश ओ विदेशमे रहल शिक्षाप्रेमी व्यक्तित्वहुक्रे एवम् दातृ संघसंस्था वा निकायसे स्वेच्छिक रुपमे संकलित अनुदान सहयोग रकमके अक्षयकोष स्थापना करके उ कोषसे प्राप्त व्याज रकम ओ कौनो सरोकारवालासे प्रत्यक्ष रुपमे उपलब्ध कराइल छात्रवृत्ति वापतके रकमसे शिक्षा विकास छात्रवृत्ति अक्षयकोष तयार पारल उहाँ बटैलै ।

गरीब तथा विपन्न ओ जेहेन्दार थारु विद्यार्थीके सुनौलो शैक्षिक भविष्यके लाग अक्षयकोषसे प्राप्त ब्याज रकमसे तोकल निश्चित रकम तथा जिन्सी स्वरुप छात्रवृत्ति प्रदान कैना सभापति ललितकुमार जनैले बाटै । छात्रवृत्ति छनौट गरीब तथ जेहेन्दार कोटामे न्युन आय रहल विपन्न परिवारके जेहेन्दार थारु विद्यार्थी ३३ प्रतिशत, समावेशी कोटामे ६७ प्रतिशतहे शतप्रतिशत मानके ओकर ५० प्रतिशत थारु महिला विद्यार्थीहुकनके लाग ओ बाँकी ५० प्रतिशत शारीरिक दृष्टिकोणसे अशक्त, असहाय÷गरीब तथा पिछडा वर्गके थारु विद्यार्थीहे प्रदान करजैना कहल बा ।

चितवनके विद्यालय तथा कलेजमे पठनपाठन कैना ५–१० जाने थारु विद्यार्थीहुकन गरीब तथा जेहेन्दार छात्रवृत्ति, महिला कोटा छात्रवृत्ति, ओ विपन्न तथा अशक्त कोटा छात्रवृत्ति स्वरुप पाँच÷पाँच हजारके दरसे प्रदान कैना निर्देशिकामे जनागिल बा ।

छात्रवृत्तिमे माध्यमिक तह एवम् उच्च शिक्षा हासिल कैना थारु विद्यार्थीहुकनहे जिन्सी अन्तर्गत शैक्षिक सामग्री कपि, कलम, किताब, ड्रेस आदि वा तोकल निश्चित रकम छात्रवृत्ति स्वरुप प्रदान कैजैना कहल बा ।

छात्रवृत्ति अक्षयकोषमे योगदान पुगैना मनकारी सहयोगी व्यक्तित्व एवम् संस्था÷निकायहे थारु कल्याणकारिणी सभा जिल्ला कार्यसमिति चितवन सम्मान अभिलेखन ओ अभिनन्दन कैना जनैले बा ।

यी बरस जिल्लामे केल सीमिति रहल मने अइना बरसमे कार्यक्षेत्र विस्तार करके नेपालके पूर्व मेचीसे पश्चिम महाकालीसम थारु समुदायके विद्यार्थीहुक्रे यी अक्षयकोषसे प्रदान कैना छात्रवृत्तिमे सहभागी करैना योजना रहल बा ।

थाकससे परम्परागत ज्ञानसीप तथा संस्कृतिके जगेर्ना कैना, सामाजिक कुरीति, विकृति, विसंगति हटैना, स्वच्छ समाज निर्माणके लाग टमान अभियान चलैना, थारु समुदायके हकहितमे पैरवी कैना एवम् शैक्षिक आर्थिक सामाजिक दृष्टिकोणसे पाछे पारल वर्गके उत्थानके लाग टमान मेरिक कार्यक्रम सञ्चालन कैना जनैले बा ।

ओस्टेक थारु कल्याणकारिणी सभा चितवनसे चितोनिया थारु समुदायके चाडपर्व कार्यविधि–२०७७ सार्वजनिक करले बा । नेपाल सरकारसे २०७७ वैशाख १ गतेसे २०७७ चैत्र मसान्तसमके सार्वजनिक विदा तथा पर्व विदा सम्बन्धि मिति २०७६ चैत्र १७ गते राजपत्रमे प्रकाशित करल सूचनाहे मध्यनजर करके वागमती प्रदेश चितवन जिल्लामे बसोबास कैना थारु समुदायके अपने रितिरिवाज अनुसारके चाडपर्व मनाइक लाग कार्यविधि तयार पारल सभापति ललितकुमार चौधरी बटैलै ।

चितोनिया थारु समुदाय जितिया, यमोसा (पितृ औंसी), डशिया, सोहराई (तिहार), छठ, एकादशी, खिचरा (माघे संक्रान्ति), फगुवा (फागु पूर्णिमा), चैतलवमी (चैते डशिया) टिहुवार से मनैटी आइल बाटै । कोरोना सन्त्रासके डौरानमे थारु समुदायसे विगत दिनमे मनैटी आइल चाड–पर्व परिमार्जन करके मनाइक लाग कार्यविधि तयार करल सभापति चौधरी बटैलै ।

जितिया पर्वः थारु समुदायके महिलाहुक्रे मजा वर (गोसिया) पैना ओ आ–अपन गोसिया एवम् सन्तानके सुस्वास्थ्य दीर्घायुके कामना करटी शिवके प्रार्थना करके भदौ कृष्ण अष्टमी तिथिमे ब्रत बैठना पर्वहे जितिया कहल बा । कोरोना सन्त्रासके बीचमे यी पर्व मनाईबेर यी वर्ष चेलीबेटीहे निम्ता करके बोलैना वा लेहे जैना लेलहारी नइकैना कहल रहे । चेलीबेटीके लाग कोसेली (पहुरा) पुगैना कार्य नइकैना कहल रहे । ब्रतालुहुक्रे दर (डट्खट्) खैना, बेल्पाती टुरना, बदहा गैना, रेकर्ड करल कथा सुन्न एवम् पूजापाठ कैना कार्य घरपरिवारमे रहल सदस्यमे सीमित हुके कैना कहल रहे । सामूहिक रुपमे कैना क्रियाकलाप बदहा गैना झम्टा परना, बेल्पाती लोर्न जैसिन कार्य नइकैना थाकसके कार्यविधिमे कहल रहे ।

यमोसा पर्व (पितृ औंसी): थारु समुदायसे अपन पितृहुकनके सम्झनामे श्राद्ध कैना तिथिके रुपमे सोह्रश्राद्धके अन्तिम दिन पितृऔंसी (यमोसा) मे डैलो आघे हरियर काँसके पितृ (पहुनी) स्थापना करके कुशपानी चढैना प्रचलन रहल बा । यी वर्षमे यी पर्व मनाईबेर गाउँघरके छोटसे भारी मनै समूह बनाके एक दुसरके घरमे गीतबाँस गैटी खाना खैना प्रचलन नइकैना कहल बा । पितृ सम्झनामे पितृके रुपमे पहुनी स्थापना करके घरपरिवारमे सीमित रहिके यमोसा मनैना, सामूहिक रुपमे बरहा झुलाई लगायत और कार्यक्रम नइकैना कार्यविधिमे कहल बा ।

डशियाः दुर्गा मातासे महिसासुर राक्षसहे मुवाके देव मुनिहुकनके रक्षा करल ओ रामसे रावणहे पराजय करल दिनके सम्झनामे कुवाँर शुक्लपक्ष विशेष करके सप्तमी, अष्टमी ओ नवमी तिथिमे पूजापाठ करके पशुपन्छीके बलि चढैना ओ दशमीके दिन भारी मनैनके हातसे टिका ग्रहण कैना प्रचलन डशियामे रहल बा । थारु समुदायमे कुछ फरक तरिकासे मनैना प्रचलन बा । यी बरस डशिया मनाईबेर फूलपातीके अवसरमे थारु समुदायके धामी (गुरै) काम कैना व्यक्ति जमघट हुके अपन चेलाहुकनहे गुन (मन्त्र) सिखैना, फूलपाती लोह्रन आदि कार्य नइकैना कहल बा । अष्टमीके रातभर थारु गुरौहरुके गुरु ओ चेला लगायत और सामूहिक भेला हुके कैना टमान क्रियाकलाप नइकैना कहल बा । नवमी तिथिमे दुर्गा भवानीके पूजापाठ कार्य कैना मने इष्टमित्र नाताकुटुम्ब बोलाके भोज नइलगैना, दशमीके दिन थारु समुदायमे सक्कु जे टीका लगैना प्रचलन नइहो । जे टीका लगैना करठ सीमित संख्यामे उपस्थित हुके सामाजिक दुरीके ख्याल करटी टीका लगैना ओ खानपिन करके डशिया मनैना कहल बा ।

सोहराई (डेवारी): यी पर्व मनाईबेर लक्ष्मी पूजाके दिन गैयाके पूजा कैना मने दिउलीबाती नइलुट्ना, थारु समुदायमे भाईटीका लगैना परम्परागत प्रचलन नइहो । मने समाजमे यी भिटरल बा, टबमारे भाईटीका लगैना उ दिन वरपरके डिडीबहिनी डाडुभैया टीका ग्रहण कैना ओ कौनो मेरिक तडकभडक खालके गतिविधि नइकैना कहल बा ।

छठ पर्वः कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्टी तिथिमे आंशिक थारु समुदायसे छठीमैयाके ब्रत बैठके छठ मनैना करठै । यी वर्ष भारी भीडभाड नइकरके घरपरिवारमे सीमित रहिके छठ मनैना कहल बा ।

बड्का एकादशी (हरिबोधनी एकादशी): कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तिथिमे खास करके थारु लउण्डा लउण्डी निराहार ब्रत बैठके साँझके फलाहार ग्रहण करठै । यी पर्व मनाईबेर टमान ठाउँमे मेला ओ महोत्सवके रुपमे मनैटी आइल एकादशी पर्व यी वर्ष कौनो मेरिक भीडभाड नइकरके सीमित संख्यामे रहिके विधि पूरा करके मनैना कहल बा ।

खिचरा (माघेसंक्रान्ति): थारु समुदायसे बाली फेरना, कामदार फेरबडल कैना, लौवा वर्षके रुपमे मनैटी आइल माघेसंक्रान्ति पर्व यी वर्ष कोरोना सन्त्रासके विषम परिस्थितिके कारणसे मेला महोत्सवमे ढेर भीडभाड हुइना ओरसे यी वर्ष महोत्सवके रुपमे नइमनैना कहल बा । चालू वर्षभरमे परिवारमे कोईै मुलेसे मृतक परिवारके व्यक्ति बरखी बरना ओ बरखी सेलैना बाहेक देवघाट धाम जैना करठै, यी बरस बरखी सेलैना बाहेक और व्यक्ति देवघाट मेला हेरे नइकैना कहल बा । घरपरिवारमे सीमित रहिके खिचरा पर्व मनैना कहल बा ।

फगुवा (ढुर्हेरीक): थारु समुदायसे फागुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथिमे चीरदहन करके सामूहिक जमघट हुके टमान नाचगान जस्टे डफु, झर्रा, ठेकरा आदि नाचगान करके रङ लगाके फगुवा (ढुर्हेरीक) मनैना करठै । यी वर्ष कोभिड–१९ महामारीके कारणसे फगुवाके समतके दिनमे सीमित संख्यामे रहिके परम्परागत चीर दहन कैना मने जमघट हुके नाँचगान नइकैना कहल बा । धुर्हेरीके दिन धुरा उडैना सामूहिक रुपमे नइजैना कहल बा । रङ अबिर लगाके टोलभर होली नइखेल्ना, घरपरिवारमे सीमित रहिके फगुवा मनैना कहल बा ।

चैतलवमी (दशहरा) : अपन मनोकांक्षा पूरा कैना उद्देश्यसे भाकल कैना चैत्र शुक्लापक्ष प्रतिपदासे पूर्णिमासम १५ दिन चितवन जिल्लाके राष्ट्रिय निकुञ्ज भिटर बिक्रम बाबाके मेला, नवमीके दिन माडीके गोदक मेला छिमेकी मुलुक भारतके डेवाढ कना ठाउँमे लग्ना सहोदरा मेला हेरे जैना प्रचलन रहल बा । यी वर्ष कोरोनाके सन्त्राससे उ मेला हेरे नइजैना ओ घरे बैठके मेलाप्रति समर्पित हुइना कहल बा ।

जनाअवजको टिप्पणीहरू