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हुलाकीके बसन्ता क्षेत्रमे निर्माणके टुंगो हाली लगाई

पहुरा | २५ आश्विन २०७७, आईतवार
हुलाकीके बसन्ता क्षेत्रमे निर्माणके टुंगो हाली लगाई

बसन्ता वन क्षेत्र भिट्टरके दुई किलोमिटर हुलाकी सडक निर्माणके काम कहियासे सुरुवाट हुई कना अभिनसम टुंगो नाइ लागल हो । कैलालीमे पर्ना धनगढीसे सत्तीसमके ६२ किलोमिटर सडकमध्ये ४४ किलोमिटर पाँच बरस पहिले निर्माण हुइलेसे फेन दुई किलोमे केल हाठीक पुच्छर अटकल बा । कटैनीसे कान्द्रा लडियासमके १८ किलोमिटर सडकमध्ये १६ किलोमिटर नेपाल सरकारके लावा मापदण्ड अनुसार दुई लेन (सात मिटर पिच) सहितके लगभग निर्माण सम्पन्न हुइना अवस्थामे पुगल बा मने बसन्ता वन क्षेत्र भिट्टरके दुई किलोमिटर लम्बाइके सडक कहिया बनी कना अभिन टुंगो लागल विल्गाइठ ।

तत्कालीन भारतीय प्रधानमन्त्री चन्द्रशेखरसे ०४७ सालमे नेपाल भ्रमणके क्रममे पूर्वपश्चिम हुलाकी राजमार्ग बनाडेना कहले रहिट, ओकर सैद्धान्तिक सहमति ०६१ सालमे हुइल, ०६२÷६३ के परिवर्तनपाछे नेपाल ओ भारत सरकारबीच १४ सय ४० किमि सडक निर्माण बारे समझदारी पत्रमे हस्ताक्षर हुइल रहे । सन् २०१० से निर्माण सुरु करके २०१५ मे सम्पन्न कैना आयोजना सन् २०२० समफे ओरैना साँटगाँठ नइहो । कहु वन क्षेत्रके कारण रुकल बा, कहु भारतीय पक्षसे अवरोध कारण रुकल बा, कहु ठेकदारके कारणसे रुकल बा टे कहु पुल नइबन्के रुकल बा ।

यी सडकखण्ड निर्माणके लाग ठेक्का लगैना ढिला हुइल ओ काम सुरु हुइलेसेफे पूर्णरुपमे प्रगति नइहुइल विल्गाइल हो । भारतीय ठेकेदारसे निर्माणके काम सुरु करल मने नइनिप्टैटी विचमे अलपत्र छोरलपाछे नेपाल सरकारसे अपनही हुलाकी राजमार्ग निर्माण सुरु करलसे टमान कानूनी जटिलतासे अभिन ढिलाई हुइटी बा ।

यी राजमार्ग पूर्वमे झापाके केचनासे पश्चिममे कञ्चनपुरके दोधारा चाँदनीसम फैलल बा । झापा, मोरङ, सुनसरी, सप्तरी, सिरहा, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा, पर्सा, चितवन, नवलपरासी, रूपन्देही, कपिलवस्तु, दाङ, बाँके, बर्दिया, कैलाली ओ कञ्चनपुरसम यी सडक पूर्णरुपसे निर्माण हुइ कसेलेसे २० जिल्लाके समृद्धिके आधार बने सेकी । टबमारे जहाँ–जहाँ विवाद बा उहीहे सुल्झाके हाली निर्माणके काम आघे बह्रैना जरुरी बा ।

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