थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०९ बैशाख २६४५, बिफे ]
[ वि.सं ९ बैशाख २०७८, बिहीबार ]
[ 22 Apr 2021, Thursday ]
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मनैन्के ज्यान बरा कि पशुन्के ?

पहुरा | १९ फाल्गुन २०७७, बुधबार
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मनैन्के ज्यान बरा कि पशुन्के ?

इहे सोम्मारके बर्दिया राजापुर नगरपालिका–१०, कालाबन्जरके ६५ बर्सक् लालबहादुर थारुक् भैंस चह्राइ गइलमे डिनेके बघुवक आक्रमणसे ज्यान गइलिन । ओस्टक कैलालीक् पुष्पाञ्जली सामुदायिक बनुवामे झालापाटा लेहे गैल गौरीगंगा नगरपालिका–५, अण्डैयाके कला धामीके बघुवासे जम्काभेटमे गैल अँट्वारके ज्यान गैल रहिन । ओकर डुइ दिन आघे किल सीताकुँवा सामुदायिक बनुवामे बघुवा आक्रमण कैके कैलारी गाउँपालिका–८, दुधियाके दुर्गाप्रसाद चौधरीहे घाहिल बनाइल रहे ।

बर्दिया, कैलाली, चितवन लगायट जिल्लामे दुर्लभ पाटेबाघ ओ मनैन बीचके द्वन्द्व लम्मा समयसे चल्टि आइल बा । बाँकेक् बनुवाहे फेन राष्ट्रिय निकुन्ज घोसना करल पाछे बाँकेमे फेन स्थानीय मनैन्के ज्यान जैना डिन आब डुर नैहो । मने इ सवालमे थारु समुदायसे कौनो सामुहिक स्वर उड्गरल नैहो । बाँके राष्ट्रिय निकुन्ज सबसे पछिल्का घोसना करल निकुन्ज हो । यकर घोसनाके क्रममे स्थानीन मनैन् पर्ना असरबारे खासे छलफल नैकैगइल ।

भख्खर निम्जल थरुहट, थारुवान राष्ट्रिय मोर्चाके सम्मेलनमे नेपाल आदिवासी जनजातिके पूर्व महासचिव आङकाजी शेर्पा थारुनहे ओइनके आदिभूमिसे निकारक लाग बाँके, बर्दिया निकुन्ज खोल्ना, चितवन राष्ट्रिय निकुन्ज खोल्ना, शेर्पाहुक्रनके आदिभूमिमे सगरमाथा राष्ट्रिय निकुन्ज राखल आरोप लगैलै । आङकाजी शेर्पा एक हिसाबसे थारुनहे निकुन्ज पारल प्रभावके बारेम व्यापक छलफल हुइ परल कना बाट उड्गरले बाटै ।

काठीपाटा खोज्ना क्रममे वा गोरुभैंस चह्राइ गैल बेला ग्रामीण भेगके कैयौं मनैनके बाघनसे आक्रमन हुइटि बा । बाघनके प्राकृतिक बासस्थान ओ आहारा मासजैटी रहल ओरसे आहाराके खोजीमे बाघ मनैनके बस्तीसम पुग्ना स्वाभाविक हो । स्थानीयवासि ओ वन्यजन्तुबीचके द्वन्द्व न्यूनीकरणके लाग निश्चित क्षेत्रहे संरक्षित क्षेत्र बनैना जरुरी बा । मने सवाल इ बा कि मनैन्के ज्यान बरा कि पशुन्के ? सरकार संरक्षित क्षेत्रके वरपरके जनतनके ज्यानके सुरक्षाके लग ढ्यान डेहे ।

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