थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०८ कुँवार २६४५, शुक्कर ]
[ वि.सं ८ आश्विन २०७८, शुक्रबार ]
[ 24 Sep 2021, Friday ]

सचेतहुके अट्वारी मनाई, टरटिहुवार सरंक्षण करी

पहुरा | २७ भाद्र २०७८, आईतवार
सचेतहुके अट्वारी मनाई, टरटिहुवार सरंक्षण करी

कोभिड–१९ के महामारी अभिन ओराइल नइहो । पहिल ओ दुसरा लहरके कोभिड संक्रमण फैलेबेर ढेर धनजनके क्षति हुइल कलेसे अब्बे टिसरा लहरके लौवा भेरियन्टसहिट लक्ष्ण डेखा परे सुरु हुसेकल । यी रोगके सक्कु ओरे फैल्टी बा, रोग टरटिहुवार, भोजकाज कुहीहेफे नइचिन्हठ जिहीहेफे लागे सेकठ, थारु समुदाय अट्वारीफे मनाई नइछोरही, कोरोना भाइरस भिडभाडसे सरे सेकठ टबमारे सुरक्षा अपनैना जरुरी बा । अट्वारी बल, शक्ति, न्याय ओ सहयोग तथा सद्भावके पर्व हो ।

यी अवसरमे आगी, पानी तथा भेवाँके पूजा करजाइठ् । भेवाँ प्रतिके समर्पण ओ डिडीबहिनीयाहुक्रनके माया स्वरुप यी पर्व अत्यन्त सौहार्द तरिकासे मनैना करजाइठ् । दुई दिन मनैना अट्वारीके पहिल दिन पूजापाठ तथा अट्वारीके मुख्य देउता भेवाँहे रोटी चह्रैना दिन अर्थात् फलाहार कैना दिन । दुसरा अग्रासन डेहे जैना दिन अर्थात चेलिबेटीके लाग टिना भात छुट्याइना दिन हो ।

अट्वारीके तयारी शनिच्चरसम पुरा हुइ परठ् । शनिच्चरके रात पहिल मुर्गा बोल्नासे पहिले भिन्सर्या (दर भात) खैना चलन बा । डोसर दिन अट्वारके दिन भन्सरिया लहाके बहरीमे गैयक गोबरसे लिपपोत कैके रोटीके परिकार पकाइक लाग चुल्हा बनाइ परठ् । रोटी पकाइक लाग आगी चाहना हुइल ओरसे गन्यारी कना कठुवाके आगी बारजाइठ् । रोटी पकैना बेला भान्से ब्रतालु बाहेक औरेहे छुना मनाही रहठ् । सबसे पहिले एकठो किल बरा आकारके रोटी एकओर किल पकाजाइठ् ओ भिवाँके लाग अलग्गे राखजाइठ् । पूजा कैना बेला उहे रोटी चुल्हाके आगी हवन करे परठ् । रोटी पका सेकलपाछे जत्रा जने ब्रतालु रहठ्र ओत्रे भाग लगाके थप एक भाग फेन लगाजाइठ् । उ भागमे रोटी, फलफूल, खिरा रहठ् । स्नान कैके सेकलपाछे सबसे पहिले सक्कुजे आपन भागसे छुट्टे औरे भाँडामे रोटी ओ अन्य फलफूल निकारके राखे परठ् । यिहीहे अग्रासन कहिजाइठ् । अग्रासन छुट्या सेकलपाछे सक्कु मेरके परिकारसे एकएकचुटी निकारके अक्केमे मुछके परिकार पकाइल आगीमे होम करटी धुप, घ्यू ओ जलले पर्छे परठ् । सक्कुजे यी कर्म करसेकल पाछे खानपीन सुुरु हुइठ् । उ बसाईके खवाई पाछे फेरसे खाइ नाइ मिलठ् । थप एक भागसे घरके लर्का पर्काहुकनहे बँटना करजाइठ् ।

एकओर राज्यके उदासिनता टे परली बा औरे ओर थारु समुदायसे अपनहे फेन अइसीन महत्वपूर्ण चाडपर्वके संरक्षण करे परठ् कना सचेतना समेत नाइ हो । औरेक संस्कार ओ संस्कृति ग्रहण कैना नाइ मजा नाइहो । मजा ओ सभ्य संस्कृतिहे अपनैना मजा हो । उ एकठो परिवर्तन तथा विकासके रुपमा लेहे परल । मने अपने संस्कृतिभित्तर डिदीबहिनीयाहे सम्मान कैना, सद्धभाब बह्रैना खालके पर्व बा कलेसे ओइसीन पर्वहे प्रवद्र्धन कैना हमार फेन ओत्रे जिम्मेवारी हो । थारु समुदायके अग्रज जानकार तथा गुरुवाहुक्रे पाछेक पिंढीहे चाडपर्व मनाइ सिकाइ नाइ सेक्ना तथा यकर महत्व बुझाइ नाइ सेक्ना हुइल ओरसे फेन चाडपर्वके महत्व घट्टी गैल बा । अट्वारी मनैना विधि ओ यकर धार्मिक, साँस्कृतिक ओ सामाजिक महत्व बुझाइ नाइ सेकजाइ कलेसे यी पर्व मनुइयनके संख्या घट्टी जाइ । टबमारे आपन टरटिहुवार सरंक्षण करेक लाग अपन रिति संस्कृति अनुसार मनाई, मने कोरोना भाइरसके संक्रमणसे बाचेक लाग सुरक्षा भर जरुर अपनई, सक्कु जनहनहे यी बरसके अट्वारीक शुभकामना बा ।

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