थारु राष्ट्रिय दैनिक
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[ 28 Oct 2021, Thursday ]
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डसैके चहलपहलसंगे सखियाके रौनक

पहुरा | २६ आश्विन २०७८, मंगलवार
डसैके चहलपहलसंगे सखियाके रौनक

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २६ कुँवार ।
टमान लोक नृत्य, नाचगानके धनी थारु समुदायके बसोबास रहल गाउँमे सखियाके रौनक सुरु हुइल बा । बर्का डसैके चहलसंगे कैलाली, कञ्चनपुरके थारु गाउँमे सखिया नाचके रौनक सुरु हुइल हो । टमान गाउँमे युवती सखिया नाच नाचे लागल बाटै । इ नाच विशेष कैके डसै, डेवारीमे नच्ना करजाइठ् । सखिया नाचके सिजन इहे बेला हो ।

डसैके अवसरमे सखिया नाच नच्ना सुरु हुइलसंगे थारु गाउँमे छुट्टे रौनक थपल बा । डसैके अवसरमे सखियाके रमझम सुरु हुइल कञ्चनपुरस्थित बेलौरी नगरपालिका–१० घोडा गाउँके भलमन्सा रामनाथ चौधरी बटैलै ।

‘डसैंके डुसरा दिनसे हमार गाउँमे सखिया नाच हुइटी रहल बा’, उहाँ कहलै । ‘हरेक साँझ सखिया नाच हुइ लागलपाछे गाउँमे रमाइलो थपल बा ।’

थारु समुदायमे ढिउर नाचगान रहल बा । जौन, सिजन ओ ऋतु अनुसार हुइना करठ् । इ बेला मौलिक नृत्य सखियाके सिजन रहल भलमन्सा चौधरी बटैलै । गैल बरस कोरोनाके कारण डसैँ, डेवारीमे थारु बस्तीमे सखिया नाच हुइ सेकल नैरहे । एक बरसके अन्तरालपाछे फेनसे टमान नाचकोर हुइ लागल बावै ।

‘हमार गाउँमे फेन गैल बरस सखिया नाच नैहुइल’, भलमन्सा चौधरी आघे थप्लै । ‘इ बरससे पुनः सुरु हुइल बा ।’

सखिया नाच मन्द्राके तालमे युवतीहुक्रे तालमे ताल मिलाके सामूहिक रुपमे नच्ना नृत्य हो । डसैँ, डेवारीमे इ नाच विशेष कैके साँझके नच्ना करजाइठ् । सुरुमे भलमन्साके घरमे ओ पाछे जाके गाउँके अन्य व्यक्तिके घरमे जाके फेन सखिया नृत्य कैना करल बा ।

आपन गाउँमे भलमन्साके घरमे सखिया नाच हुइटी रहल धनगढी उपमहानगरपालिका–७ पटेला गाउँके अमृत दहित जानकारी डेलै । इ बरस कञ्चनपुरके घोडा, पिपलारी, जोनापुर, कैलालीके भादा, पटेला, गप्का लगायतके गाउँमे डसैके सुरुवातसंगे सखिया नाच हुइटी रहल जनाइल बा ।

थारु समुदायमे डसैसे लेके डेवारीसम रमाइलो कैटी सखिया नाच नच्ना करजाइठ् । मने पाछेक समय ढिउर थारु गाउँमे सखियाके मन्द्रा बजल आवाजसमेत सुने छोरल बा । सखिया नृत्य नै कैना परिपाटी फेन बह्रटी गैल बा । गैल बरससे भर कोरोना कारण सखिया नाच कुछ गाउँमे किल सीमित हुइल बा ।

सामूहिक रुपमे करजैना नृत्य रहल ओरसे कोरोना सर्ना डरसे थारु बस्तीमे सखिया नाच हुइ नैसेकल कैलारी गाउँपालिका–७ के वडा अध्यक्ष कमलप्रसाद चौधरी बटैलै ।‘ढिउर जैसिन मनै आ–आपन काममे व्यस्त हुइल ओरसे सखिया नृत्य करे नैसेक्ठै’, उहाँ कहलै ।‘गैल बरस कोरोनाके कारण फेन सखिया नाच कम हुइल बा । काहे कि, नाचगान हुइलमे भीडभाड होजाइठ् ।’

थारु संस्कृतिविद अशोक थारुके अनुसार सखिया थारु समुदायके अत्यन्त लोकप्रिय मौलिक नृत्य हो । इ नाच संघरिया संघरिया मिलके सामूहिक रुपमे नच्ना करल ओरसे सखिया नाच कहिजाइठ् । थारु समुदायमे महिलाहुक्रे महिला संघरियाहे ‘सखी’ कना करठै । सखी सखी अर्थात संघरिया संघरिया मिलके नच्ना नाच हुइल ओरसे इहीहे सखिया नाच कहल हो ।

सखियाहे गीतहीन सामूहिक नृत्य फेन कना करल बा । डसैके खुशीयालीमे सङ्गिनीहुक्रे आइट कना अर्थमे सखियाके प्रयोग हुइल थारुनके तर्क बा । डसैँ, डेवारी जैसिन टरटिहारमे सखियासंगे थारु समुदायसे दिननचुवा, हुर्डुङ्वा ओ झुमरा जैसिन मौलिक नृत्य फेन कैना करल बाटै ।

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