थारु राष्ट्रिय दैनिक
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[ थारु सम्बत २७ पुष २६४९, अत्वार ]
[ वि.सं २७ पुष २०८२, आईतवार ]
[ 11 Jan 2026, Sunday ]

थारु समुदायमे माघक चहलपहल

पहुरा | २७ पुष २०८२, आईतवार
थारु समुदायमे माघक चहलपहल

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २७ पुस ।
थारु समुदायके नयाँ वर्ष तथा प्रमुख सांस्कृतिक टिहुवार माघ लग्गे हुइटी रहलबेला थारु समुदायमे उत्सवमय वातावरण हुइल बा । गाउँ–गाउँमे सकारेसे साँझसम टिहुवारके तयारीसे चहलपहल बह्रल बा । कलेसे घरेक सक्कु जाने आ–आपन भूमिकामे व्यस्त डेखल बटै ।

माघ टिहुवार मनाइक लाग काठ कैना काम हुइटी बा कलेसे डोना टेपरी बनाइक लाग पटिया टुरना कामफे हुइटी रहल बा । घरआँगनमे महिलाहुक्रे डोनिया–टेपरी बनैटी रहल बटै । पाहुनाहुकनहे पटियाके डोना टेपरीमे खानपान डेना परम्परासे थारु समुदायके प्रकृति–मैत्री जीवनशैली झल्कैना स्थानीय बटैठै ।

धनगढी उपमहानगरपालिका–१४ सी गाउँक स्थानीय लखिराम चौधरीके अनुसार माघ टिहुवारमे परम्परागत खानाके विशेष परिकार अनिवार्य रूपमे तयार करजाइठ । “ढिक्री, अन्दीक भात, सुरिक शिकार ओ जाँड माघक प्रमुख परिकार हुइट, जौन घरमे महिलाहुक्रे तयार करठै,” उहाँ बटैलै । उहाँक अनुसार परिकार तयारी अन्तिम चरणमे पुगल बा । महिलाहुक्रे पहुनाहुकनहे स्वागतके लाग अन्दी जाँर डारु बनैना, ढिक्री बनाइक लाग पिठा पिसैना, तेल पेरैना काममे व्यस्त बटै कलेसे पुरुष सुरिक शिकारके व्यवस्था ओ अन्य तयारीमे जुटल बटै ।

सी गाउँक रामचन्द्र चौधरीके अनुसार माघके तयारीमे सक्कु उमेर समूहके सहभागतिा हुइना ओरसे गाउँमे आपसी सहयोग ओ एकताके भावना ठप बल्गर बनठ । “माघ हमार समुदायहे एक्के ठाउँमे जोरना पर्व हो,” उहाँ कहलै । पर्वके अवसर पारके गाउँक मठमन्दिर, चौतारा ओ डगरघाटमे सामूहिक सरसफाई अभियानफे सञ्चालन हुइटी रहल बा ।

थारु समुदायमे माघ टिहुवारमे पुराना रिसगुस विस्राके आपसी सम्बन्ध सुधर्ना अवसरके रूपमे लेना करजाइठ । “माघमे मनमुटाव टुंग्यइना, मित्रता बह्रैना ओ नयाँ वर्षहे सकारात्मक सोचके साथ सुरु कैना चलन बा ।

पुस अन्तिम रोज जिटा मारके खैना रहरंगी कैना रातभर डफ बजाके धमार, ढुमरु गैना ओ विहान लडिया कुलुवामे लहाके घरे आके चाउर, नोन छुके गछ्य अनुसार ढोग सलाम लग्ना चलन बा । लहाके आके ढोग सलाम सबसे महत्व रहठ । जेम्ने सक्कु जानेक घर जाके ढोग लाके आर्शिबाद ठापजाइठ । कुहीहे रिसगुस बा कलेसे ओठेहेसे ओराइठ ।

माघ २ गतेसे घरेक मुली छन्ना, बरस भरिक आय व्यय सुनैना, लौवा योजना बनैना काम हुइठ कलेसे समाजमेफे माघी डेवानी कैना लौव भल्मन्सा÷बरघर, चौकीदार ओ गुरुवा चयन कैना परम्परा रहल बा ।

स्थानीयके अनुसार माघ केवल खानपान ओ मनोरञ्जनमे सीमति पर्व नाही, यी थारु समुदायके पहिचान, संस्कृति, सामाजिक एकता ओ आत्मसम्मानसँग जोरल टिहुवार हो । माघ लच्कयइटी गैलसँगे थारु गाउँमे माघ मिलन, माघ मेला, माघ महोत्सवके आयोजनासे थारु बस्तीमे उमंग, रौनक ओ सामूहिकताके भावना झन् प्रगाढ बन्टी गैल बा ।

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