पूर्व सन्ध्यामे सरसफाईसे लेके वृहत रक्तदान कैनासम
पहुरा |
२९ श्रावण २०८३, शुक्रबार
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २९ सावन । कैलालीके धनगढीमे यिहे भदौ १ गते भव्यताके साथ मनाई जनैटी रहल गुरही पर्वके तयारी पुरा हुइल जनागिल बा ।
“थारु समुदायक मौलिक संस्कृति संरक्षण प्रवद्र्धन सामाजिक एकताक अभियान कना मुल नाराके साथ गुरही असरैना कार्यक्रम २०८३ मूल आयोजक समिति गुरही चौक, धनगढीसे शुकके रोज पत्रकार सम्मेलनके तयारी पुरा हुइल सखी संजालके अध्यक्ष सानु चौधरी जानकारी डेली ।
गुरही टिहुवारके अवसर पारके मूल आयोजक समितिसे सावन ३१ गते विहान ८ः०० बजेसे दुपहर १२ बजेसम वातचित घरके संयोजनमे बृहत्त रक्तदान कार्यक्रम कैना जनैले बा ।
उहे दिन साँझ ५ बजेसे ६ः३० बजेसम गुरही चौक वरपर मूल आयोजक समिति, युवा संजालके संयुक्त पहलमे सरसफाई कार्यक्रम कैना बा ।
भदौ १ गते दुपहर २ बजेसे साँझ ७ बजेसम गुरही असरैना कार्यक्रम २०८३ गुरही असरैना मूल बायोजक समितिके आयोजनामे साँझ ३ बजेसे ४ बजेसम औपचारिक कार्यक्रम ओ साँझ ४ बजेसे ६ बजेसम सास्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न कैना । ओस्टेक करके कार्यक्रम ओराइलपाछे ६ः३० बजेसे ७ बजेसम गुरही समापन तथा सरसफाई कार्यक्रम कैना उहाँ जनैली ।
थारू समुदायके मौलिक चाडपर्वमध्ये गुरही पर्व विशेष ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक महत्व बोकल पर्व हो । परम्परागत रूपमे गुरही पर्वहे थारू समुदायके विशेष पर्वके रूपमे लेना करजाइठ ।
गुरही पर्वके प्राचीनता ओ यकर सांस्कृतिक महत्वहे स्पष्ट रूपमे प्रतिविम्बित करठ । समयक्रमसँगे गुरही पर्वके ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक महत्व यथावत् रहल बा । गुरही पर्व प्रकृति, कृषि ओ मानव जीवनबीचके अन्तरसम्बन्धहे उजागर कैना मौलिक सांस्कृतिक पर्व हो ।
यी पर्व सावन महिनामे नागपञ्चमीके दिन मनैलेसेफे यकर धार्मिक तथा सास्कृतिक मान्यता नागपञ्चमीसे पूर्ण रूपमे फरक रहल बा । गुरही पर्वमे सावनके पूजा नैकरके गाइने किरा (गुरही)प्रति सम्मान प्रकट करठ । कृषि प्रणालीमे गाइने किरासे हानिकारक किरा नियन्त्रण करके वातावरणीय तथा जैविक सन्तुलन कायम कैना सहयोग कैना ओरसे थारू समुदायसे यिहीहे किसानके संघरीयाके रूपमे सम्मान करटी आइल बा । यिहीसे गुरही पर्वहे वातावरण संरक्षण, जैविक विविधता तथा दिगो कृषि प्रणालीसँग जोरल सांस्कृतिक अभ्यासके रूपमे स्थापित करले बा ।
गुरही पर्व बालबालिकाके सक्रिय सहभागितामे मनैना मौलिक सास्कृतिक पर्वफे हो । यी अवसरमे बालिकाहुक्रे कपडासे बनाइल गुरही (गुडिया) तथा घुघरी (भिजाइल चना) सहित गुरही अस्रैना, लउण्डा परम्परागत सोटा लेके सहभागी हुइना तथा सामुदायिक रूपमे प्रसाद वितरण कैना परम्परा रहल बा । यी अभ्याससे बालबालिकामे संस्कृति, सामाजिक उत्तरदायित्व, सहकार्य तथा सामुदायिक एकताके भावना विकास कैना महत्वपूर्ण भूमिका खेल्टी आइल बटै ।
यी कार्यक्रममार्फत गुरही पर्वके संरक्षण, प्रवद्र्धन तथा दस्तावेजीकरण कैनाके साथे नयाँ पुस्तामे सांस्कृतिक हस्तान्तरण, सांस्कृतिक पर्यटनके विकास, स्थानीय कला तथा संस्कृतिके प्रवद्र्धन, महिला तथा युवाके सहभागिता अभिवृद्धि ओ सामाजिक सद्भाव सुद्धीकरणमे महत्वपूर्ण योगदान पुग्न अपेक्षा करल बा । साथे, यी कार्यक्रमसे नेपालके बहुसांस्कृतिक पहिचानके संरक्षण तथा आदिवासी थारू समुदायके अमूर्त सांस्कृतिक सम्पदाहे राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय स्तरमे प्रवद्र्धन कैना सहयोग पुगैना विश्वास करल बा । विगत १७ वर्षसे धनगढी स्थित गुरती चौकमे गुरही असरैना कार्यक्रम भव्य ओ सभ्य रुपमे सम्पन्न करटी आइल बा ।
यी टिहुवार मनाइक लाग संयोजन करुइयामे सखी सञ्जाल, थारु लेखक संघ धनगढी, थारु कल्याणकारिणी सभा नगर समिति धनगढी, बातचित घर, थारु महिला सभा, थारु विद्यार्थी समाज, थारु नागरिक समाज, गुरही मूर्ति निर्माण समिति, राष्ट्रिय थारु कलाकार मञ्च, सखी मञ्च कैलाली, नेपाल आदिवासी जनजाती पत्रकार महासंघ, थारु पत्रकार संघ, थारु महिला सन्जाल, नगर भल्मन्सा समिति धनगढी, हिरगर साहित्यिक बगाल, थारु छात्रवास धनगढी, आदिबासी जनजाती युवा महासंघ, चैनार समूह, गोहिनके फाउण्डेशन, हमार फाउण्डेशन लगायतके रहल बा । पत्रकार सम्मेलन कार्यक्रम संचालन सखी सञ्जालके सचिव तारा चौधरी करल रहिट ।
