थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ३० सावन २६४६, सोम्मार ]
[ वि.सं ३० श्रावण २०७९, सोमबार ]
[ 15 Aug 2022, Monday ]
‘ रानाथारुनके कला, संस्कृति धारापमेः सांसद राना ’

डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग तिजके निर्जल ब्रत

पहुरा | ८ श्रावण २०७७, बिहीबार
डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग तिजके निर्जल ब्रत

पहुरा समाचारदाता
धनगढी,८ सावन ।
डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग रानाथारु समुदायके दिदीबहिनीयाहुक्रे निर्जल ब्रत रख्टी तिज पर्व मनैले बाटै ।

सुदूरपश्चिम प्रदेशके कैलाली ओ कञ्चनपुरमे बसोबास रहल रानाथारु समुदायके महिलाहुक्रे विफेक रोज निर्जल ब्रत राखके तिज पर्व मनाइल हुइट । रानाथारु समुदायके महिलनके सबसे भारी टिहुवारके रुपमे रहल तिजमे डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग निर्जल ब्रत रख्ना प्रचलन रहल सुदूरपश्चिम प्रदेशसभा सदस्य मालामति राना बटैठी ।

‘तिज पर्व असार महिनाके पुर्णिमक दुसर दिनसे सुरुवाट हुइठ, जेम्ने गाउँटोलमे सावनके डोला (बहला) बनाके रात–रातके झुल्टी रहरङगी कैना प्रचलन बा, प्रदेशसभा सदस्य मालामति कहठी–‘डोला (बहला) औसिक टिसरा दिनसम अर्थात १८ दिनटक झुलके रमाइलो कैइजाई ।’ जौन सावन महिनामे परठ ओठहेसे ओजरिया सुरु हुके टिसरा दिन पानी समेट नइपिके तिजके निर्जल ब्रत बैठजाइठ उहाँ कहली ।

डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग दिनभर भुखेपियसे दिनभर ब्रत बैठल दिदीहिनीयाहुक्रे साँझके पुजापाठ करटी झुरखी पुहाके ब्रत टुरना करल प्रदेशसभा राना बटैठी । औसिके टिसरा दिन साँझके दिदीबहिनीयाहुक्रे सावनके डोला झुल्टी अपन परम्परा अनुसारके गीत गैटी रहरङगी करठै ओ (डोला) बहला मनेक लस्रीमे एक ठो गाँठी पारजाइठ जिहीहे मुरिया बन्धना कहिजाइठ ।

गाँठीहे काटके लडियामे अस्रैना चलन रहल बा, प्रदेशसभा सदस्य राना कहली,‘ असराई जाईबेर एक ठो कुस खोजके भोज हुइल दिदीबहिनीया सात ठो गाँठी परठै उहीहे झुरखी बन्धना कहठै ।’ झुरखीमे सिमै, पुरी चढाजाइठ जिहीहे रानाथारु समुदायके तिजके मुख्य पकवानके रुपमे लेजाइठ, उहेसंगसगे घिउ, लवाङ, हुममसला चढैना चलन उहाँ कहली । पुजापाठ करसेकलपाछे जरसहिट उखारके चाँदीसे बनल कोईफे चिज लेके विच लडियामे पुहाजाइठ, पुहाइल कुस जटरा दुरसम जाईठ डाडुभैयनके आयु ओटरा नम्मा रहना जनविश्वासके साथ निर्जल ब्रत रख्टी तिज पर्व मनैना करल प्रदेशसभा सदस्य राना कहली ।

भोज हुइल दिदीबहिनीया जटरा बुढाइल हुलेसेफे अपन घर तिज मनाई अइना चलन रहलफे उहाँ बटैठी । पहिले–पहिले लडियामे झुरखी पुहाई महिला, पुरुष आ–अपन पहिरन लगाके जैना चलन रहे, महिलाहुक्रे पकावन लेके जैना, लउण्डाहुक्रे सोटा (पुन्जासे बनाइल चिज) लेके जैना ओ विच्चे लउण्डा डगर छेक्ना चलन रहे । डगर छोकलपाछे लउण्डीहुक्रे पकवान खाई नइडेलेसे लउण्डन सोटासे पिटना, सोटामे बझाके गिरैना चलन रहे, मने अब्बे डगर छेक्ना चलाउ हटल बा ।

तिजके अवसरमे शुभकामना अदानप्रदान कार्यक्रम

रानाथारु समुदायके महान पर्व तिजके अवसरमे विफेक रोज धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर ८ धनगढी गाउँमे शुभकामना अदानप्रदान कार्यक्रम कैगिल बा । महिला समितिके आयोजनामे हुइल कार्यक्रमके वडका पहुना सुदूरपश्चिम प्रदेशसभा सदस्य मालामति राना रहल रहिट । शुभकामना अदानप्रदान कार्यक्रममे बोल्टी उहाँ रानाथारु समुदायके कला, संस्कृति धारापमे परटी गैल बटैली । ‘रानाथारु समुदाय कला, संस्कृतिके धनी समुदाय हुइट मने परम्परागत संस्कृति लोप हुइटी जाके औरेक संस्कृति अंगल्ना काम हुइटा,’ प्रदेशसभा सदस्य मालामति कहली–‘हमार बालबच्चा हमार संस्कृति नभुलाइट कहटी सक्कु जानेक प्रयाससे यी सालसे सामुहिक तिज मनैना सुरुवाट हुइल बा ।’

लोप हुइटी रहल संस्कृतिहे संरक्षण करेक लाग यी साल धनगढी गाउँके ६ ठाउँमे सावनके डोला बनागिल उहाँ कहली । एकताके सन्देश डेहक असौक साल सावन ८ गते कैलाली कञ्चनपुरमे तिज पर्व मनाइल उहाँ बटैली । तिज पर्व रानाथारु समुदायके महान पर्वके रुपमे रहल ओरसे प्रदेश सरकारसे विदाके लाग अनुरोध समेट करल उहाँ कहली ।

धनगढी गाउँक भल्मन्सा भज्जी राना पहिले–पहिले तिजमे एक रुपता नइरहलेसेफे असौक साल दुनु जिल्लामे बसोबास करल रानाथारु समुदायसंग्गे तिज मनाके एकताके सन्देश डेहल बटैलै । महिला दिदीबहिनीयाहुक्रे डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग ब्रत बैठना ओरसे पुरुषहुक्रे भर सामनके डोला बनाके सहयोग करल उहाँ बटैलै ।

शुभकामना अदानप्रदान कार्यक्रममे धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नम्बर ८ के वडा सदस्य रामस्वरुप राना, धनगढी माविके पूर्व विद्यालय व्यवस्थापन समिति अध्यक्ष शिवराज राना, आठ बरसके आयसना राना लगायत तिजके शुभकामना मन्तव्य राखल रहिठ ।

रानाथारु समाजके केन्द्रीय कोषाध्यक्ष तथा महिला समितिके अध्यक्ष कन्दकला रानाके अध्यक्षतामे हुइल कार्यक्रममे कौशिल्या राना सावनके डोलाके गीत गाके स्वागत करल रहिट । कार्यक्रमके संचालन सोनीयम राना करले रहिट । रानाथारु समुदायके यी बरसके तिज विफेक रोज झुरखी असरैटी विधिवट रुपमे समापनफे हुइल बा ।

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