थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०३ माघ २६४३, शनिच्चर ]
[ वि.सं ३ माघ २०७७, शनिबार ]
[ 16 Jan 2021, Saturday ]

थारु समुदायके मौलिक टिहुवार माघ

पहुरा | २७ पुष २०७७, सोमबार
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थारु समुदायके मौलिक टिहुवार माघ

माघ महिना ओ थारु समुदायके टिहुवार माघ । हुइना टे टमान समुदाय माघहे अपन चलन अन्सार मनैना प्रचलन बा । कोइ माघेसंक्रान्ति, कोइ खिचडी, कोइ बर्का माघ कहिके मनैना चलन बा । माघेसंक्रान्तिके दिन पूर्वके थारु समुदाय तिलके लड्डु, चाकु, तरुल लगायतके खैनाचिज खैना करठैं ।

पश्चिमा थारु समुदायमे माघ टिहुवार मौलिक बा । पुस महिनाके अन्तिम दिन जिता मर्ना कठैं । जिताके लाग गाउँमे केकर संवर मरना हो । पहिले योजना बनठ । साँझ सबके घरमे सिकार, ढिक्री पाकल रहठ । घरके सबजाने संगे बैठ्के खैठैं । उ रात गाउँक् किसानहुक्रे बरघरके घरमे भेला हुके धुनी जगाके रातभर ढुम्रु गीत गैठैं । बिहान मुर्गा बोललपाछे आगी लेके पुरुषहुक्रे ढोलक बाजासहित लडियामे लहाइ जैठैं । कामेक् मारे महिलाहुक्रे भर घरे लहैठैं । लहाइबेर सबपे पैसा लेहे लहाइपरठ ।

माघ लहैली सुरिक सिकार खैलि रे हाँ

सखियै हो, माघक पिबि गुरी गुरी जाँर

अइसिन गीत थारु बस्तीमे गुञ्जठ । माघ १ गते रात मुर्गा बोललपाछे महिलाहुक्रे बिहान ढिक्री लगायत खानपिन बनाइ उठ्ठैं । गाउँके सब पुरुषहहुक्रे एक ठाँउमे भेला हुके मन्द्रा बजैटी ढमार गैटी लडिया कुलुवा या लग्गेक जलाशयमे जाके लहैठैं । लहाइ जाइबेर साथमे पिठा, चाउर ओ तिल लेके जैठैं । थारु समुदाय प्रकृतिपुजक हुइल ओरसे यी टिहुवामे उहाँहुक्रे पानीमे डुबुल्की मारके कुँरवर्ती जलदेवीसँग अपन माग ढरठैं । लहाके तिलके आगी टप्ना ओ पिठा ओ चाउर मिलाके उज्जर टीका लगैना चलन बा । उज्जर टीका पारदर्शिताके प्रतीक फेन हो । उज्जर बस्तुमे कौनो दाग लागल कलेसे प्रष्ट डेखाइठ । माघ लहाके कौनो गलत क्रियाकलाप नैकरना प्रतिवद्धताके साथ सपथ खाजाइठ । लहाके नयाँ कपडा फेर्ना दिनके रुपमे फेन लेजाइठ । वर्षभर पुरान लुग्रा लगैलेसे फेन आजके दिन नयाँ लुग्रा फेरलेसे मजा हुइना कहाइ बा ।

यहोर घरे महिलाहुक्रे ढिक्री, अन्डीक् रोटी, सुरिक सिकार, घोंघी, मच्छि, गेक्टा, तरुल, गैजी, जाँर  लगायत टमान मेरिक खानाके परिकार तयार पारले रठैं । माघमे बनाइल ढिक्री लम्मा रहठ । लहाके आइलपाछे सबजे निस्राउ कह्रठैं । निस्राउमे नून, मासके दाल, चाउर अलग अलग भाग लगाइल रहठ । उपाछे अपन परिवारके सदस्य ओ गाउँके भारीहे ढोग्ना ओ आर्शिवाद लेजाइठ । सबजाने बैठ्के डोनिया टेपरीमे सबजाने सँगे खैना चलन बा ।

घरेके योजनाबारे फेन छलफल हुइठ उ दिन । सबजाने एक ठाउँमे हुइल बेला यी बह्रलपौरह्रल छावाछाइ बाटै कलेसे भाज करना कि नैकरना कना छलफल हुइठ । भाइ भाइमे घर फुट्ना कि मिलके बैठ्नासे लेके केकर जग्गा बटैया लगैना केकर जग्गा छोरना, किसनुवा (घरमुली) के बन्ना, कत्रा लेनदेन करना लगायतबारे छलफल हुइठ । कमैया मुक्तिसे आघे आजके दिन छाइहे मालिकके घर कमलह्री पठैना कि नैपठैनो, कमैया बैठ्ना कि नैबैठ्नाबारे सल्लाह हुइठ ।

माघमे हुइल ढोगभेटसे समुदायमे एकता हुइना, सम्बन्ध प्रगाढ हुइना, आपसी सहयोग सद्भाव आदानप्रदान करना कार्यमे सहयोगी भूमिका खेलठ । टबेमारे माघहे मेलमिलापके रुपमे फेन लेजाइठ । पहिले पहिले माघ मनाइबेर घरे पालल पशुपंक्षी एकदिनके लाग छाडा छोरना चलन रहे । जैसिक मनै स्वतन्त्र रुपमे माघ मनैठैं, ओस्टेक पशुहे फेन स्वतन्त्र छारना चलन रहे । उ दिन केक्रो बाली नोक्सानी हुइलेसे फेन माफी डेना चलन रहे । कोइ फेन किहुहे गाली नैकरठैं ।

माघके एक दिनहे आज टे महिलाके माघ हो कहिके छुट्याजाइठ । उ दिन महिलाहुक्रे फेन कौनो काम नैकरना । खैनापिना रमैना घरघर जैना रमाइलो करना चलन बा । उ दिन पुरुष महिलाहे काम लगाइ फेन नैसेक्ठैं । आज टे महिलाके माघ हो जाउ गाउँमे माघ माने कहिके पुरुष छुट् डेठैं । अइसिन स्वतन्त्र रहठ माघमे । गाउँमे समूह बनाके नाच करठैं । मनभित्तर गुम्सल रहल पीडाहे कम करना गीतके माध्यमसे मन्द्रक तालमे नाच करठैं ।

बाबक टिकुली घर छोरी आइनु रे हाँ
सखिए हो सैयक डिहल टिकुली लेहनु लगा
राइखेत मसुरी मसुरी खेट राइ रे हाँ
सखियै हो जौन खेट रे मोर भिछिया हेरान
टिकुली ले मग्नु बाबा टिकुली नै लिहल्या रे हाँ
सखियै हो टिकुलिक कारन बाबा छोरिडेबु डेसवा टुहाँर
बाबाकी सगरम मुरिया लाहान गैनु हाँ
सखिए हो सेदुरा छुटल पानी घाट ।

अइसिन मेरिक भावना बोकल माघमे गीत गाजाइठ । समयअन्सार अब्बे माघ मनैना शैली बडलटी गिल बा । आजकाल्हके पुस्ता अइसिन गीत गैना आनाकानी करठैं ओ गाइ फेन नैजन्ठैं । शहरीकरणसे माघ मनैना शैली प्रायः महोत्सवके रुपमे परिणत हुइटी बा । गाउँमे जैसिक अपन समूह बनाके घर घरमे नाचजाए, उ आजकाल काम हुइ लागल बा । सायद सबहे आधुनिकता छुले बा ।

माघमे भोज्ही चेलिबेटीहे निस्राउ डेना चलन बा । आज टे लैहरसे निस्राउ डेहे अइही कहिके चेलिबेटीहुकनहे ओत्रे आशा रहठ, जत्रा आशा पहाडी समुदायके तिजमे दर खैना बोलैठैं । औरे दिन माघिदिवानी कना रहठ । प्रत्येक घरके एक जाने अनिवार्य उपस्थिति हुइठैं बरघरके घर । उ दिन गिल वर्षके समीक्षा हुइठ । अइना वर्षके योजना ओ नयाँ वरघरके छनौट फेन हुइठ । अपन अपन घरमे हुइल सल्लाह गाउँके भेलामे बटैठैं । गाउँके नीतिनियम बनैना, किहिनहे का जिम्मेवारी डेना सब उ दिन छलफल हुइठ । गाउँमे गुरुवा, केसौका, चौकीदार किहिनहे बनैना छनौट हुइठ । अइसिक पश्चिमा थारु समुदाय माघ मनैठैं । माघ थारु समुदायके मौलिक टिहुवार हो । थारु समुदायमे यिहिनहे नयाँवर्ष सँगे आर्थिक वर्षके रुपमे फेन मन्ठैं ।

सदियौंसे मनैटी आइल माघके अवसरमे बल्ल बल्ल नेपाल सरकार एक दिन बिदा डेहे लागल बा । यी अवसरमे थारु समुदायहे २/३ दिन विदा डेलेसे अपन समुदायके लाग और मजा योजना बनाइ सेक्टैं । काहेकि रोजगारीमे जैनाहुकनहे एक दिनके विदासे किल नैपुगठ । यम्ने सम्बन्धित निकायके ध्यान जाए ।

(लेखिकाके ‘जीवनका बक्ररेखाहरू’ पुस्तक प्रकाशित बा ।

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